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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 32991 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. आवेदक की ओर से धारा 528 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के अंतगर्त प्रस्तुत यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 264/2023 अन्तगर्त धारा 363 भा०दं०िव० व धारा 17/18 पाक्सो एक्ट, थाना गुन्नौर, िजला संभल िस्थत चंदौसी में प्रेिषत आरोप पत्र, िदनांिकत 23.11.2023 से उद्भूत एस.एस.टी. सं० 155/2023 (State Vs. Chandan Gupta) में िवशेष न्यायाधीश, पाक्सो एक्ट/अपर सत्र न्यायाधीश, संबल िस्थत चंदौसी द्वारा पािरत प्रसंज्ञान/तलबी आदेश िदनांिकत 22.12.2023 तथा इस वाद की संपूणर् कायर्वाही को खिण्डत करने हेतु योिजत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, िवपक्षी सं० 3 िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. िवपक्षी सं० 3 िवद्वान अिधवक्ता द्वारा प्रितशपथ-पत्र दािखल िकया गया, इसे पत्रावली पर रखा जाय।
4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक और िवपरीत पक्ष संख्या 3 का िववाह हो चुका है और वे अत्यंत प्रसन्नतापूवर्क एक साथ रह रहे हैं तथा िवगत 1.5 वषर् से हैदराबाद में िनवास कर रहे हैं। आवेदक और िवपरीत पक्ष संख्या 3 तत्समय एक-दूसरे के साथ संबंध में थे और िवपरीत पक्ष संख्या 3 के वयस्क होने के पश्चात िववाह करने का पूणर् आशय रखते थे। किथत घटना के समय िवपरीत पक्ष संख्या 3 घर से गई, उस समय उसकी आयु 17 वषर् 11 महीने और 10 िदन थी, क्योंिक उसकी जन्म ितिथ िदनांक 15.08.2006 है। इसके पश्चात आवेदक ने आदरपूवर्क िवपक्षी संख्या 3 के घर जाकर उसके माता-िपता से उनका िववाह कराने का अनुरोध िकया, और उसने यह भी स्पष्ट िकया िक उनकी पुत्री के िवरुद्ध उसका कोई दुराशय नहीं है। इसके पश्चात आवेदक और िवपरीत पक्ष संख्या 3 का िववाह िदनांक 22.02.2025 को संभल में संपन्न हुआ। तब से आवेदक और िवपरीत पक्ष संख्या 3 Versus Counsel for Applicant(s) : Akanksha Mishra Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Chandan Gupta .....Applicant(s) State Of U.P. And 4 Others .....Opposite Party(s)
हैदराबाद में एक वैवािहक जोड़े के रूप में प्रसन्नतापूवर्क रह रहे हैं। इसिलए, प्रश्नगत आदेश अपास्त िकए जाने योग्य है।
5.
इसके अितिरक्त, िवपक्षी सं० 3 (पीिड़ता) द्वारा भी उपयुर्क्त कथनों पर पूणर् सहमित प्रकट की गई तथा उनके द्वारा प्रितशपथ-पत्र के माध्यम से यह अकाट्य तथ्य प्रस्तुत िकया गया िक पीिड़ता ने अपनी स्वेच्छा से आवेदक का साथ िदया था और इसमें िकसी भी प्रकार का बल, प्रपीड़न या प्रलोभन नहीं था। िवपक्षी सं० 3 (पीिड़ता) ने अपनी व्यिक्तगत रीित-िरवाजों और प्रथाओं के अनुसार िदनांक 22.02.2025 को आवेदक के साथ एक िविधमान्य िववाह संपन्न कर िलया है तथा एक वैवािहक जोड़े के रूप में प्रसन्नतापूवर्क रह रहे हैं। अतः प्रश्नगत आदेश को िनरस्त कर िदया जाए।
6. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्तागण के तकोर्ं एवं माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रितपािदत िविध के िसद्धांतों के आलोक में, जहाँ पक्षकारों ने आपसी सहमित से िववाद का समाधान कर िलया है, वयस्क होने पर िववाह कर िलया है और वतर्मान में एक शांितपूणर् व सुखी जीवन जी रहे हैं, ऐसी िस्थित में आपरािधक कायर्वाही को जारी रखना न्याय के उद्देश्यों को िवफल करेगा। पीिड़ता और उसके पिरवार की सहमित तथा उनके वैवािहक जीवन की िस्थरता को ध्यान में रखते हुए, इस मामले की संपूणर् कायर्वाही को समाप्त करना ही उिचत प्रतीत होता है। इसिलए, यह आवेदन पत्र स्वीकार िकये जाने योग्य है।
7. तद्नुसार, यह आवेदन पत्र स्वीकार िकया जाता है तथा उपरोक्त विणत वाद की संपूणर् कायर्वाही अिभखिण्डत (Quashed) की जाती है।
8. प्रश्नगत प्रकरण में यिद कोई अन्तिरम आदेश हो तो उसे समाप्त समझा जाय।
9. कायार्लय को िनदेर्श िदया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप संबंिधत न्यायालय को अिवलम्ब भेजना सुिनिश्चत करे। September 14, 2026 CP.sahani NA528 No. 32991 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad