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High Court of Chhattisgarh · body

2026 DAILYLAW 5227 (CHH)

KHOJHAN PRASAD CHANDRA v. STATE OF CHHATTISGARH

CRA/283/2026 · 2026-02-16

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 8 (Cr. A. No.283 of 2026) 2026:CGHC:8575 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दाण्डिक अपु ल क्रमां"क -283 /2026 1. खो+झन प्रसदा चन्द्रा, तिपु – दाऊलल, आया लगभग 36 वेर्ष4, तिनवेस ग्रामां ल्हा, थान – तिलईगढ़, हास ल – तिलईगढ़, जि;ल – सर"गढ़-तिलईगढ़ (छत्ती सगढ़), 2. चरण लल, तिपु – ?लल, आया लगभग 36 वेर्ष4, तिनवेस ग्रामां ल्हा, थान – तिलईगढ़, हास ल – तिलईगढ़, जि;ल – सर"गढ़-तिलईगढ़ (छत्ती सगढ़), 3. गणश्वेर चन्द्रा, तिपु – तिनमां4ल चन्द्रा, आया लगभग 22 वेर्ष4, तिनवेस ग्रामां ल्हा, थान – तिलईगढ़, हास ल – तिलईगढ़, जि;ल – सर"गढ़-तिलईगढ़ (छत्ती सगढ़), 4. उत्तीमां चन्द्रा (मांनन या न्यायालया क आदाश तिदान"क 30-01-2026 क अनसर तिवेल+तिपु), 5. घसन न ई चन्द्रा, पुत्न – ग"गरमां चन्द्रा, आया लगभग 40 वेर्ष4, तिनवेस ग्रामां दावेरहा, थान – भटग"वे, जि;ल – सर"गढ़-तिलईगढ़ (छत्ती सगढ़), 6. अतिहाल्या ई चन्द्रा, पुत्न – स्वेगHया दाऊलल चन्द्रा, आया लगभग 65 वेर्ष4, तिनवेस ग्रामां ल्हा, थान – तिलईगढ़, हास ल – तिलईगढ़, जि;ल – सर"गढ़-तिलईगढ़ (छत्ती सगढ़), 7. कJ ष्ण ग+तिवेन्दा चन्द्रा, तिपु – दाऊलल चन्द्रा, आया लगभग 45 वेर्ष4, तिनवेस ग्रामां ल्हा, थान – तिलईगढ़, हास ल – तिलईगढ़, जि;ल – सर"गढ़-तिलईगढ़ (छत्ती सगढ़)। -----अपु लथाHगण/अतिभयाक्तगण तिवेरूद्घ POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.02.19 14:14:14 +0530 2 / 8 (Cr. A. No.283 of 2026) 1. छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार सतिचवे, गJहा तिवेभग, मांहानदा भवेन, मां"त्रालया, नवे रयापुर, जि;ल – रयापुर (छत्ती सगढ़), 2. छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार थान प्रभर , पुजिलस थान – तिलईगढ़, जि;ल – सर"गढ़- तिलईगढ़ (छत्ती सगढ़), 3. लक्ष्मां न, पुत्न – दाल रतिवेदास, आया लगभग 25 वेर्ष4, तिनवेस ग्रामां ल्हा, थान – तिलईगढ़, हास ल – तिलईगढ़, जि;ल – सर"गढ़-तिलईगढ़ (छत्ती सगढ़)। -----उत्तीरवेदा गण अपु लथाHगण/अतिभयाक्तगण द्वार : श्री अवेध तित्रापुठी , अजिधवेक्त । रज्या/उत्तीरवेदा क्रमां"क-1 वे 2 द्वार : श्री अतिमां वेमां4, पुXनल अजिधवेक्त । प्रथाH/उत्तीरवेदा क्रमां"क-3 द्वार : स?चन प्रतिर्ष नहाY । मांनन या न्यायामां?ति4 श्री स";या क मांर ;यासवेल , न्यायाध श !! आदाश पु ठी पुर पुरिर !! 17/02/2026 1. पु ति] स""जिध जि;ल तिवेजिधक सवे प्रजिधकरण क मांध्यामां स वे तिया+ क_न्फ्रेंa जिस"ग द्वार उपुण्डिस्था हाbई था अपु लथाH/अतिभयाक्त क+ ;मांन प्रदान तिकए ;न क तिवेरूद्घ आपुजित्ती प्रस् कd । 2. धर 14(क)( ) ii अनस?तिच ;ति एवे" अनस?तिच ;न;ति (अत्याचर तिनवेरण) अजिधतिनयामां, 1989 (जि;स आग स"क्षेपु मांa "तिवेशर्ष अजिधतिनयामां" कहा गया हाX) क अ"ग4 प्रस् इस अपु ल मांa, तिवेचरण न्यायालया-तिवेशर्ष न्यायाध श (तिवेशर्ष अजिधतिनयामां), रयागढ़, जि;ल-रयागढ़, छत्ती सगढ़ द्वार पुजिलस थान-तिलईगढ़, जि;ल-सर"गढ़ तिलईगढ़, 3 / 8 (Cr. A. No.283 of 2026) छत्ती सगढ़ क अपुरध क्रमां"क-322/2025 अ"ग4 धर 191(2), 333, 296, 115(2), 351(2) भर या न्याया स"तिहा, 2023 था तिवेशर्ष अजिधतिनयामां कd धर 3(2) ( va) क अपुरध मांa अपु लथाHगण/अतिभयाक्तगण द्वार प्रस् अतिग्रामां ;मांन आवेदान क तिनरस् आदाश तिदान"क-20/01/2026 क+ चनi दा गई हाX । जि;स आग स"क्षेपु मांa "प्रश्नध न आदाश" स स"+जिध तिकया ; रहा हाX । 3. अतिभया+;न क मांमांल, स"क्षेपु मांa, इस प्रकर हाX तिक तिदान"क 15/12/2025 क+ लगभग दा+पुहार 02:00 ;, ; पु ति] सजिलहातिहा न उर्फ4 लक्ष्मां न अपुन पुरिर;नk क सथा घर पुर उपुण्डिस्था था , उस समांया नया हास लदार, र;स्वे तिनर क्षेक, पुटवेर एवे" क+टवेर आतिदा मांकन +]न हा वेहाl पुहाblच । पु ति] द्वार भ?तिमां स""ध अतिभलखो प्रस् कर याहा अवेग करया गया तिक उक्त भ?तिमां पुर उसक 40–50 वेर्षm" स कब्; हाX, जि;स पुर वे वेपुस लiट गए । त्पुश्च लगभग 03:00 ; अपु लथाHगण/अतिभयाक्तगण एक रया हा+कर पु ति] क घर मांa अनजिधकJ  रूपु स प्रवेश कर अश्ल ल गल -गलi; कर हाbए हाथा- मांक्कk स मांरपु ट तिकए, उसक ल पुक]कर घस ट, वेहान कd च छ न जिलए, था दाल क+ वेहान स धक्क दाकर तिगर तिदाए सथा हा , ;न स मांरन कd धमांकd भ तिदाए । उक्त घटन मांa  , ग"गधर, दाल एवे" लक्ष्मां न क+ च+टa आई" । उस तिदान प्रथाH पुक्षे कd तिशकया पुर थान-सर"गढ़ तिलईगढ़ मांa अपुरध क्रमां"क 322/2025 पु"; द्ध तिकया गया, जि;सकd प्रथामां स?चन पुत्रा रतित्रा 08:20 ; दा;4 कd गई, था प्रकरण कd तिवेवेचन ;र हाX । अपु लथाHगण/अतिभयाक्तगण न अपुन स"भतिवे तिगरफ्र कd आश"क क+ दृतिsग रखो हाbए अतिग्रामां ;मांन हा आवेदान प्रस् तिकया । जि;स तिवेचरण न्यायालया द्वार खोरिर; कर तिदाया गया । जि;स इस अपु ल मांa चनi दा गया हाX । सहा-अतिभयाक्त 4 / 8 (Cr. A. No.283 of 2026) उत्तीमां चन्द्रा कd तिगरफ्र हा+ ;न क करण इस अपु ल स उसक नमां तिवेल+तिपु तिकया ; चक हाX । अपु लथाH पुक्षे क तिवेद्वान अजिधवेक्त द्वार याहा भ अवेग करया गया हाX तिक उत्तीमां चन्द्रा क+ तिवेचरण न्यायालया स तिनयातिमां ;मांन प्रदान कd ; चकd हाX । 4. अपु लथाHगण/अतिभयाक्तगण क तिवेद्वान अजिधवेक्त क क4 हाX तिक ग्रामां तिल्हा ण्डिस्था खोसर न"र 568/1, रक 0.052 हाक्टयार भ?तिमां क+ अपु लथाHगण न पु"; कJ  यानमां क आधर पुर तिवेजिधवे क्रया तिकया हाX । उक्त भ?तिमां क एक भग पुर प्रथाH पुक्षे द्वार कच्च पुत्थारk स घर"दा कर अवेXधतिनक रूपु स कब्; कर जिलया गया था अपु लथाHगण क+ ;न स मांरन एवे" तिवेशर्ष अजिधतिनयामां क अ"ग4 झ?ठी प्रकरण दा;4 करन कd धमांकd दा ;न लग । इस स""ध मांa अपु लथाHगण द्वार तिदान"क 07/12/2023 क+ थान प्रभर , सर"गढ़- तिलईगढ़ क समांक्षे अनलग्नक ए-3 क रूपु मांa जिलजिखो तिशकया प्रस् कd गई, तिकन् उस पुर क+ई कया4वेहा नहाY कd गई । त्पुश्च उन्हाkन छत्ती सगढ़ भ?-र;स्वे स"तिहा कd धर 250 क अ"ग4 हास ल न्यायालया मांa आवेदान प्रस् तिकया, जि;स पुर तिदान"क 05/12/2025 क+ उनक पुक्षे मांa आदाश पुरिर तिकया गया तिक प्रथाH पुक्षे क ललट? क अवेXध कब्; हाटकर अपु लथाH पुक्षे क+ कब्; तिदालया ;ए । उक्त आदाश क अनपुलन हा तिदान"क 05/12/2025 क+ दाखोल वेर"ट (अनलग्नक ए-4) ;र तिकया गया । कजिथा घटन तिदान"क 15/12/2025 क+, ; हास ल न्यायालया क मांल ;मांदार कब्; तिदालन हा मांiक पुर पुहाblच,  खो+झन प्रसदा चन्द्रा, ललट? आतिदा द्वार तिवेर+ध तिकया गया था मांतिहाल पुजिलस ल क अभवे मांa दाखोल कd कया4वेहा पु?ण4 नहाY कd ; सकd । इस आशया क प्रतिवेदान (अनलग्नक ए-5) एवे" पु"चनमां प्रस् तिकया गया हाX । तिवेद्वान अजिधवेक्त न याहा भ क4 तिकया तिक उक्त कया4वेहा क र्फलस्वेरूपु अपु लथाHगण द्वार उस 5 / 8 (Cr. A. No.283 of 2026) तिदान थान मांa पु?वे4 मांa ;कर प्रथाH पुक्षे क तिवेरुद्ध रिरपु+ट4 दा;4 करई गई, जि;स पुर अपुरध क्रमां"क 321/2025 क प्रथामां स?चन पुत्रा रतित्रा 07:20 ; ललट?, दाल, ग"गई, सजिलहातिहा न, नगरतिदाहा न एवे" ग"गरमां पुटल क तिवेरुद्ध नमां;दा दा;4 तिकया गया । इसस चन हा प्रथाH पुक्षे द्वार उस तिदान अपु लथाHगण क तिवेरुद्ध झ?ठी रिरपु+ट4 दा;4 करई गई, जि;सक आधर पुर अपुरध क्रमां"क 322/2025 पु"; द्ध तिकया गया । 5. अपु लथाH पुक्षे क याहा भ क4 हाX तिक उक्त प्रथामां स?चन पुत्रा मांa तिकस ;तिग घटन क उल्लेखो नहाY हाX था न हा प्रर"तिभक रूपु स तिकस अपुरध क+ तिवेशर्ष अजिधतिनयामां क अ"ग4 दा;4 तिकया गया हाX । अपु लथाH कJ ष्ण ग+तिवे"दा चन्द्रा द्वार तिदान"क 01/01/2026 क+ प्रथाH पुक्षे क तिवेरुद्ध पुनx धमांकd स""ध तिशकया प्रस् तिकए ;न क पुश्च, तिवेचर-तिवेमांश4 क उपुर" सजिलहातिहा न उर्फ4 लक्ष्मां न क नमां पुर तिदान"क 08/01/2026 क+ अस्थाया ;ति प्रमांण पुत्रा ;र करया गया, ;+ दा मांa तिनरस् भ हा+ चक हाX । उसक उपुर" तिवेशर्ष अजिधतिनयामां क मांमांल नया ; रहा हाX । उक्त पुरिरण्डिस्थाति मांa अपु लथाHगण क+ तिवेशर्ष अजिधतिनयामां क अ"ग4 तिगरफ्र कd आश"क हाX । प्रथाH पुक्षे द्वार दा;4 करई गई तिशकया प्रतिश+धवेश एवे" पु?वे4 मांa दा;4 अपुरध स चन क उद्देश्या स कd गई हाX, उनक तिवेरूद्घ तिवेशर्ष अजिधतिनयामां क क+ई अपुरध स्थातिपु नहाY हा+ हाX । र्फलस्वेरूपु, तिवेशर्ष अजिधतिनयामां कd धर 18 आकतिर्ष4 नहाY हा+ और अपु लथाHगण अतिग्रामां ;मांन क पुत्रा हा{ । अx अपु ल स्वे कर कर प्रश्नध न आदाश क+ अपुस् कर हाbए उन्हाa अतिग्रामां ;मांन प्रदान तिकया ;या । 6. रज्या/उत्तीरवेदा क्रमां"क–1 एवे" 2 क तिवेद्वान अजिधवेक्त न अपु ल क तिवेर+ध कर हाbए याहा क4 प्रस् तिकया तिक कजिथा घटनक्रमां मांa  , ग"गधर, दाल था लक्ष्मां न क+ उपुहाति 6 / 8 (Cr. A. No.283 of 2026) (च+ट) करिर हाbई हाX । अपु लथाHगण खो+झन प्रसदा चन्द्रा एवे" चरण लल क तिवेरुद्ध पु?वे4 मांa आपुरजिधक मांमांल इश्गश क रूपु मांa दा;4 रहा हाX, जि;सस उनक आपुरजिधक आचरण क स"क  तिमांल हाX । मांमांल मांa “तिवेशर्ष अजिधतिनयामां” कd धर 18 क प्रति"ध आकतिर्ष4 हा+ हाX, जि;सक करण अपु लथाHगण/अतिभयाक्तगण क अतिग्रामां ;मांन आवेदान स्वे कर तिकए ;न या+ग्या नहाY हाX । अx प्रस् अपु ल खोरिर; कd ;ए । 7. उभयापुक्षे क क4 श्रीवेण तिकया था अतिभलखो क पुरिरश लन तिकया गया । 8. तिवेशर्ष अजिधतिनयामां कd धर-18 क हा अतिग्रामां ;मांन पुर प्रति"ध क • मांनन या उच्चमां न्यायालया द्वार न्यायादृs" Prathvi Raj Chauhan (पु?वेm"क्त) मांa तिनम्ननसर अवेधरण व्याक्त कd गया हाXx- “Even though, offence under the Act of 1989 is registered, where application for grant of anticipatory bail is filed, the Court is required to apply its mind to the relevant provisions of law and considerations as specified by the Supreme Court in the case of Prathvi Raj Chauhan (Supra) and if material on record leads to satisfaction that the complaint does not make out a prima facie case, for applicability of the provisions of the Act of 1989, the bar created under Section 18 of the Act of 1989 shall not apply and in appropriate cases of exceptional nature, benefit of anticipatory bail could be admitted to the applicant.” 9. अतिभलखो मांa प्रस् दास्वे;k क अवेल+कन स याहा पुरिरलतिक्षे हा+ हाX तिक अपु लथाHगण/अतिभयाक्तगण एवे" प्रथाH पुक्षे क मांध्या भ?तिमां स""ध तिवेवेदा कd ण्डिस्थाति पु?वे4 स तिवेद्यमांन रहा हाX । अतिभलखो स याहा भ स्पुs हाX तिक तिवेवेतिदा भ?तिमां क स""ध मांa प्रथाH पुक्षे क पुस क+ई वेXध दास्वे; नहाY हाX । र;स्वे न्यायालया क आदाश उनक तिवेरूद्घ हाX । तिदान"क 7 / 8 (Cr. A. No.283 of 2026) 15/12/2025 कd कजिथा घटन क स""ध मांa प्रथामां तिशकया अपु लथाH पुक्षे द्वार दा;4 करई गई था , जि;सक उपुर" प्रथाH पुक्षे न थान मांa अपुन तिशकया प्रस् कd । प्रथाH पुक्षे कd तिशकया पुर अपुरध क्रमां"क 322/2025 पु"; द्ध तिकया गया हाX । उक्त प्रथामां स?चन पुत्रा क अवेल+कन स याहा भ स्पुs हा+ हाX तिक उसमांa तिकस ;तिग आधर पुर अपुरध करिर तिकए ;न क उल्लेखो नहाY हाX था न हा तिवेशर्ष अजिधतिनयामां कd तिकस धर क अ"ग4 प्रर"तिभक रूपु स अपुरध पु"; द्ध तिकए ;न क उल्लेखो हाX । 10. उपुया4क्त समांस् पुरिरण्डिस्थातियाk क+ दृतिsग रखो हाbए था मांनन या सवेmच्च न्यायालया द्वार न्यायादृs" Prathvi Raj Chauhan (पु?वेm"क्त) मांa प्रतिपुतिदा तिवेजिध जिसद्ध" क आल+क मांa याहा न्यायालया पु हाX तिक वे4मांन प्रकरण मांa अपु लथाHगण/आवेदाकगण क+ अतिग्रामां ;मांन प्रदान तिकया ;न उतिच हाX । र्फलस्वेरूपु प्रश्नध न आदाश ण्डिस्थार रखो ;न या+ग्या नहाY पुया ; । 11. अx अपु ल स्वे कर कd ; हाX । प्रश्नध न आदाश अपुस् तिकया ; हाX । याहा आदातिश तिकया ; हाX तिक अपु लथाH क्रमां"क-01 स 03 वे 05 स 07, इस प्रकरण मांa तिगरफ्र कd अवेस्था मांa, प्रकरण क अ"तिमां तिनरकरण क अपुन तिनयातिमां उपुण्डिस्थाति सतिनण्डिश्च करन हा प्रत्याक रु. 25,000/- (पुच्च स हा;र रुपुया) क व्यातिक्तग मांचलक था उन हा रतिश क एक सक्षेमां ;मांनदार स""जिध न्यायालया क स"तिs या+ग्या प्रस् करन पुर उन्हाa तिनम्नजिलजिखो शm" क अध न अतिग्रामां ;मांन पुर रिरहा तिकया ;ए– .i पुजिलस कd तिवेवेचन एवे" अनस"धन मांa पु?ण4 सहाया+ग करaग । ii. मांमांल क थ्याk स पुरिरतिच तिकस व्यातिक्त अथावे तिकस भ सक्षे क+ प्रत्याक्षे या अप्रत्याक्षे रूपु स प्रल+भन, दावे या धमांकd नहाY दाaग । 8 / 8 (Cr. A. No.283 of 2026) iii. न्यायालया कd पु?वे4 अनमांति क तिन भर कd स मां स हार नहाY ;याaग । iv. तिवेचरण क दाiरन तिन तिकस अनवेश्याक स्थागन कd मांlग तिकए, प्रत्याक तिनया तिजिथा पुर स""जिध न्यायालया क समांक्षे उपुण्डिस्था रहाaग था पुर क्षेण मांa ईमांनदार पु?वे4क सहाया+ग करaग । v. ;मांन पुर रिरहा हा+न क पुश्च• ;मांन कd स्वे"त्रा क दारुपुया+ग नहाY करaग और तिकस भ प्रकर कd आपुरजिधक गतितिवेजिध मांa स"जिलप्त नहाY हाkग । सहा /- (स";या क मांर ;यासवेल) न्यायाध श पो मन