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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 37185 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. आवेदक की ओर से धारा 528 बी.एन.एस. के अन्तगर्त यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 139/2026, अन्तगर्त धारा 3/25 आम्सर् एक्ट एवं धारा 9(ख)/ 1(ख) िवस्फोटक अिधिनयम , थाना कटघर, िजला मुरादाबाद में प्रेिषत आरोप पत्र िदनांक 08.06.2026 में चीफ जूडीिसयल मिजस्ट्रेट मुरादाबाद द्वारा पािरत प्रसंज्ञान/तलबी आदेश िदनांक 21.07.2026 के द्वारा िदये गये आदेश के िवरूद्ध दायर िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता अिखलेश चन्द्र िद्ववेदी एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा तकर् प्रस्तुत िकया गया िक आवेदक के िखलाफ कोई अपराध नही बनता है और वतर्मान अिभयोग आवेदक का उत्पीड़न करने के उद्देश्य से दुभार्वनापूणर् इरादे से शुरू िकया गया है। उन्होंने अपने दावे के समथर्न में कु छ दस्तावेज़ और बयान प्रस्तुत िकए। उनका यह भी कथन है िक वह प्राथर्ना खण्ड में की गई अन्य प्राथर्नाओं पर बल नहीं देना चाहते हैं, बिल्क अवर/िवचारण न्यायालय में उन्मोचन प्राथर्ना पत्र दािखल करने की अनुमित चाहते हैं तथा उनके द्वारा दािखल िकए गए उन्मोचन प्राथर्ना पत्र का िनस्तारण करने को संबंिधत अवर न्यायालय को िनदेर्श िदया जाय।
4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने उनके तकोर् का प्रबल िवरोध िकया। मैंने िवद्वान अिधवक्ताओं के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य एवं प्रश्नगत आदेश का पिरशीलन िकया।
5. मैंने उभयपक्ष के िवद्वान अिधवक्ताओं के तकोर् पर िवचार िकया।
6. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ताओं के तकोर् पर िवचारोपरान्त एवं अिभलेख के अवलोकन से इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता है िक आवेदक के िखलाफ उपरोक्त धाराओं के अन्तगर्त कोई अपराध गिठत नहीं होता है। आवेदक की ओर से जो तकर् प्रस्तुत िकए गए हैं वे िववािदत तािथ्यक प्रश्न से संबंिधत हैं, िजनके िवषय में इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एन.एस.एस. के आवेदन पत्र पर कोई फै सला देना संभव नहीं है, चूंिक उक्त तािथ्यक प्रश्नों का िविनश्चय िवचारण न्यायालय द्वारा ही साक्ष्य आने के बाद िकया जा सकता है। इस संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा R.P. Kapur Vs. State of Punjab, AIR 1960 SC 866, State of Haryana Vs. Bhajan Lal, 1992 SCC (Cri.) 426, State of Bihar Vs. P.P. Sharma, 1992 SCC (Cri.) 192 and lastly Zandu Pharmaceutical Works Ltd. Vs. Mohd.
Saraful Haq and another, (Para-10) 2005 SCC Versus Counsel for Applicant(s) : Akhilesh Chandra Dwivedi, Kamal Kumar Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Rishabh Sharma .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)
(Cri.) 283 में िदए गए िनणर्यों में यह अवधािरत िकया गया है िक इस स्तर पर के वल प्रथम दृष्टया ही के स देखा जाना है। मुलिजमान का जो िववािदत बचाव कथन है उस पर इस स्तर पर िवचार नहीं िकया जा सकता है। आवेदक/अिभयुक्त का जो िववािदत बचाव कथन है उस पर इस स्तर पर िवचार नहीं िकया जा सकता है।
6. इस स्तर पर, आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा यह कथन िकया गया िक आवेदक को उन्मोचन प्राथर्ना पत्र दािखल करने की अनुमित दी जाये।
7. यह कहने या िनदेर्श पािरत करने की आवश्यकता नहीं है, आवेदक िविध अनुसार उपलब्ध उपायों का लाभ उठाने के िलए स्वतंत्र हैं।
8. उक्त पयर्वेक्षण के साथ यह प्राथर्ना पत्र अिन्तम रूप से िनस्तािरत िकया जाता है। September 8, 2026 S.Mishra NA528 No. 37185 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad