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Allahabad High Court · body

2026 DAILYLAW 4873 (ALL)

SMT. AKANKSHA TIWARI AND ANOTHER v. STATE OF U.P. AND 6 OTHERS

WRIC/35560/2026 · 2026-09-08

Gautam Chowdhary

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD WRIT - C No. - 35560 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1- याचीगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान स्थायी अिधवक्ता को सुना एवं पत्रावली का पिरशीलन िकया। 2- याचीगण की ओर से इस यािचका के माध्यम से, याचीगण एक परमादेश िरट जारी करने की मांग कर रहे हैं, िजसमें प्रत्युत्तरदातागण को पित और पत्नी के रूप में यािचकाकतार्ओं के शांितपूणर् वैवािहक जीवन में हस्तक्षेप न करने का िनदेर्श िदया जाए एवं संबंिधत अिधकािरयों को यह िनदेर्श देने की मांग की गयी है िक वे याचीगण को सुरक्षा प्रदान करें। 3- याचीगण के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक याचीगण वयस्क है और उन्होंने अपनी मजीर् एवं सहमित से िबना िकसी दबाव के एक-दूसरे के साथ िववाह कर िलया है एवं दोनों पित- पत्नी के रूप में दांपत्य जीवन व्यतीत कर रह रहे हैं, याचीगण ने अपने उम्र के समथर्न में अपने- अपने हाईस्कू ल प्रमाण पत्र की प्रितिलिप, यािचका के साथ संलग्न िकया है, िजनके अवलोकन से यह स्पष्ट है िक दोनों याचीगण बािलग है, यािचका में िदए गए कथन याचीगण के संयुक्त हलफनामों द्वारा समिथत हैं। याचीगण ने अपने िववाह के पंजीकरण के िलए सक्षम प्रािधकारण के समक्ष आवेदन भी कर िदया है, जो यािचका के साथ संलग्न है। इसके अलावा यह भी अनुरोध िकया गया है िक िनजी प्रत्युत्तरदाता और पिरवार के अन्य सदस्य याचीगण द्वारा िकए गए इस िववाह से नाराज हो गए हैं और उनके द्वारा याचीगण को धमकी दी जा रही है और उन्हें परेशान िकया जा रहा है, उन्हें आशंका है िक िनजी प्रितवादी अपने पिरवार के सम्मान के िलए उन्हें गंभीर उपिहत अथवा खत्म कर सकती है। यिद यह न्यायालय उन्हें सुरक्षा प्रदान नहीं करता है, तो उनका जीवन खतरे में पड़ सकता है। 4- िवद्वान सी.एस.सी. द्वारा उपयुर्क्त तथ्यों से सहमत है। 5- प्रस्तािवत आदेश पािरत िकये जाने के दृिष्टगत, िनजी प्रितवादी को नोिटस जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है, पक्षकारों की ओर से उपिस्थत िवद्वान अिधवक्ताओं की सहमित से इस िरट यािचका को न्यायालय के िनयमों के अनुसार इस स्तर पर अंितम रूप से िनस्तारण िकया जा रहा है। 6- माननीय उच्चतम न्यायालय ने कई िनणर्यों में यह कानून तय िकया है िक जहाँ एक लड़का और लड़की बािलग है और वे अपनी स्वतंत्र इच्छा से एक साथ रह रहे हैं तो उनके माता िपता सिहत िकसी को भी उनके साथ रहने में हस्तक्षेप करने का अिधकार नहीं है। यहां इन मामलों में उच्चमत Versus Counsel for Petitioner(s) : Jitendra Kumar, Manoj Kumar Counsel for Respondent(s) : C.S.C. Smt. Akanksha Tiwari And Another .....Petitioner(s) State Of U.P. And 6 Others .....Respondent(s) न्यायालय के फ़ै सले का िज़क्र प्रासंिगक है- Gian Devi v. The Superintendent, Nari Niketan, Delhi and others, (1976) 3 SCC 234; Lata Singh v. State of U.P. and another, (2006) 5 SCC 475; and Bhagwan Dass v. State (NCT of Delhi), (2011) 6 SCC 396, which have consistently been followed by the Supreme Court and this court, as well as of this Court in Deepika and another v. State of U.P. And others, 2013 (9) ADJ 534. The Supreme Court in Gian Devi (supra) has held as under: "Whatever may be the date of birth of the petitioner, the fact remains that she is at present more than 18 years of age. As the petitioner is sui juris no fetters can be placed upon her choice of the person with whom she is to stay, nor can any restriction be imposed regarding the place where she should stay. The court or the relatives of the petitioner can also not substitute their opinion or preference for that of the petitioner in such a matter." 7- उपरोक्त तथ्यों एवं पिरिस्थितयों के दृिष्टगत इस न्यायालय का मत है िक याचीगण एक साथ रहने के िलए स्वतंत्र है तथा िकसी भी व्यिक्त को उनके शािन्तपूणर् जीवन-िनवार्ह करने में हस्तक्षेप करने की अनुमित नहीं दी जाएगी। यिद याचीगण के शािन्तपूणर् जीवन-िनवार्ह में कोई व्यवधान उत्पन्न होता है तो याचीगण संबंिधत विरष्ठ पुिलस अधीक्षक/ पुिलस अधीक्षक (प्रत्युत्तरदाता सं० 2) से इस आदेश की प्रमािणत प्रितिलिप के साथ संपकर् करेंगे और उक्त प्रत्युत्तरदाता सं० 2 को िनदेर्िशत िकया जाता है िक वे याचीगण को तत्काल सुरक्षा प्रदान करेंगे। 8. चूँिक (2006) 2 SCC 578 and (2008) 1 SCC 180 Seema (Smt.) Vs Ashwani Kumar, मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय के िनणर्य के अनुसार िववाह का पंजीकरण अिनवायर् है, इसिलए याचीगण आज से 02 माह के अन्दर अपने िववाह का पंजीकरण कराने का वचन देते हैं। 9. यिद याचीगण उपरोक्त िनधार्िरत अविध के भीतर अपने िववाह का पंजीकरण नहीं करा पाते हैं तो इस आदेश के तहत दी गयी सुरक्षा स्वतः ही समाप्त हो जाएगी। 10- िनजी प्रत्युत्तरदाता को यह स्वतंत्रता प्रदान की जाती है िक यिद याचीगण द्वारा अिभलेख पर लाए गए दस्तावेज मनगढ़न्त या फजीर् हैं तो वे इस आदेश को वापस लेने के िलए िरकॉल आवेदन दायर करने के िलए स्वतंत्र होंगे। 11- यह स्पष्ट िकया जाता है िक इस न्यायालय ने याचीगण के किथत िववाह पर कोई िनणर्य नहीं िदया है और यह आदेश िकसी भी तरह से याचीगण के िववाह की वैधता के बारे में कोई राय नहीं व्यक्त करता है। 12- उपरोक्त िटप्पिणयों के साथ यह िरट यािचका िनस्तािरत की जाती है। मूल्य के बारे में कोई आदेश नहीं पािरत िकया जा रहा है। September 9, 2026 CP.sahani WRIC No. 35560 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad