ANIL PATEL @ ANIL KUMAR PATEL v. STATE OF U.P. AND ANOTHER
NA528/37290/2026 · 2026-09-07
Gautam Chowdhary
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DailyLaw.ai
[ 2026 DAILYLAW 4852 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 37290 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. आवेदक की ओर से धारा 528 बी.एन.एस.एस. के अन्तगर्त यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 109 सन 2017, अन्तगर्त धारा 381 भा.दं.सं. एवं धारा 65/ 66 आई.टी. एक्ट, थाना सैया, िजला आगरा में प्रेिषत आरोप पत्र िदनांक 23.01.2021 िजसमें एिडशनल चीफ जूडीिसयल मिजस्ट्रेट-V, आगरा द्वारा पािरत प्रसंज्ञान/तलबी आदेश िद० 08.03.2021 को अपास्त करने एवं सम्पूणर् कायर्वाही को अपास्त करने हेतु योिजत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा तकर् प्रस्तुत िकया गया िक आवेदक के िखलाफ कोई अपराध नही बनता है और वतर्मान अिभयोग आवेदक का उत्पीड़न करने के उद्देश्य से दुभार्वनापूणर् इरादे से शुरू िकया गया है। उन्होंने अपने दावे के समथर्न में कु छ दस्तावेज़ और बयान प्रस्तुत िकए। उनका यह भी कथन है िक वह प्राथर्ना खण्ड में की गई अन्य प्राथर्नाओं पर बल नहीं देना चाहते हैं, बिल्क अवर/िवचारण न्यायालय में उन्मोचन प्राथर्ना पत्र दािखल करने की अनुमित चाहते हैं तथा उनके द्वारा दािखल िकए गए उन्मोचन प्राथर्ना पत्र का िनस्तारण करने को संबंिधत अवर न्यायालय को िनदेर्श िदया जाय।
4. िवद्वान अिधवक्ता अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा आवेदक के तकों का प्रबल िवरोध िकया गया।
5. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं एवं अिभलेख पर मौजूद सामग्री के अवलोकन से और इस चरण पर मामले के तथ्यों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता िक आवेदक के Versus Counsel for Applicant(s) : Bakhteyar Yusuf, Santosh Kumar Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Anil Patel @ Anil Kumar Patel .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)
िवरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता है। बार (न्यायालय) के समक्ष िकए गए सभी अिभवचन ( submissions) तथ्य के िववािदत प्रश्नों से संबंिधत हैं, िजनका इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एन.एन.एस. के अंतगर्त न्याियक िनणर्य नहीं िकया जा सकता है। इस चरण पर के वल प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला देखा जाना है, जैसा िक माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा आर.पी. कपूर बनाम पंजाब राज्य, ए.आई.आर. 1960 एस.सी. 866, हिरयाणा राज्य बनाम भजन लाल, 1992 एससीसी (िक्रिमनल) 426, िबहार राज्य बनाम पी.पी.
शमार्, 1992 एससीसी (िक्रिमनल) 192 और अंत में झंडू फामार्स्युिटकल वक्सर् िलिमटेड बनाम मोहम्मद शराफु ल हक एवं अन्य (पैरा-10) 2005 एससीसी (िक्रिमनल) 283 के मामलों में प्रितपािदत कानून के आलोक में स्पष्ट िकया गया है। इसिलए, इस मामले की संपूणर् कायर्वाही को िनरस्त करने की प्राथर्ना को अस्वीकार िकया जाता है।
6. तद्नुसार, आवेदक की ओर से धारा 528 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के अंतगर्त प्रस्तुत यह आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाता है।
7. इस स्तर पर, आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा यह कथन िकया गया िक आवेदक को उन्मोचन प्राथर्ना पत्र दािखल करने की अनुमित दी जाये।
8. यह कहने या िनदेर्श पािरत करने की आवश्यकता नहीं है, आवेदक िविध अनुसार उपलब्ध उपायों का लाभ उठाने के िलए स्वतंत्र हैं।
9. उक्त पयर्वेक्षण के साथ यह प्राथर्ना पत्र अिन्तम रूप से िनस्तािरत िकया जाता है। September 8, 2026 S.Mishra NA528 No. 37290 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad