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High Court of Chhattisgarh · body
2026 DAILYLAW 4792 (CHH)
AMAN BANJARE v. STATE OF CHHATTISGARH
CRMP/473/2026 · 2026-02-12
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2026
[ 2026 DAILYLAW 4792 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 4 (Cr. M. P. No.-473 of 2026)
2026:CGHC:7974 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
दाण्डिक प्रक र्ण" यातिचक
क्रमां%क
-473
/2026
अमांन %जार तिपु-पुन रमां %जार, उम्र-लगभग 25 वेर्ष", तिनवेस -ग्रामां खै6रल, पुलिलस थान-नवेगढ़, लिजाल-जा%जाग र चम्पु, छत्ती सगढ़ -----यातिचकक"/अतिभयाक्त तिवेरूद्घ
1. छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार थान प्रभर , पुलिलस थान-नवेगढ़, लिजाल-जा%जाग र चम्पु, छत्ती सगढ़, (रज्या)
2. ( XYZ पु तिA) -----प्रत्याथाCगर्ण यातिचकक"गर्ण/अतिभयाक्त द्वार : श्री पुरस मांतिर्ण श्री वेस, अलिFवेक्त । रज्या/प्रत्याथाC क्रमां%क-1 द्वार : श्री अन श तिवेर , उपु शसक या अलिFवेक्त । पु तिA/प्रत्याथाC क्रमां%क-2 द्वार : सJचन प्रतिर्ष नहींL । मांनन या न्यायामांJति" श्री स%जाया क मांर जायासवेल
, न्यायाF श
!! आदाश पु ठ पुर पुरिर !! 13/02/2026
1. प्रर%तिभक स्र पुर उपुण्डिस्था पुक्ष क क" श्रीवेर्ण तिकए गए । POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.02.13 17:59:45 +0530
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2. भर या नगरिरक सरक्ष स%तिहीं, 2023 क Fर 528 क हीं प्रस् इस यातिचक मांV, तिवेचरर्ण न्यायालया-अपुर सत्र न्यायाF श, एफ.टी .एस.स .(ल[तिगक अपुरF\ स लक\ क स%रक्षर्ण अलिFतिनयामां, 2012 क हीं गतिठ न्यायालया लिजास आग स%क्षपु मांV “तिवेशर्ष अलिFतिनयामां” कहीं गया हीं6), जा%जाग र, लिजाल-जा%जाग र, छत्ती सगढ़ द्वार तिवेशर्ष सत्र प्रकरर्ण क्रमां%क-72/2025 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घ अमांन %जार” मांV पुरिर आदाश तिदान%क- 16/12/2025 क_ चन` दा गई हीं6 । उक्त आदाश क हीं मांमांल क पु तिA द्वार प्रस् Fर-348 भर या नगरिरक सरक्ष स%तिहीं, 2023 क आवेदान तिनरस् कर तिदाया गया, लिजास आग स%क्षपु मांV "प्रश्नF न आदाश" स स%_लिF तिकया जा रहीं हीं6 ।
3.
प्रकरर्ण क थ्या, स%क्षपु मांV, इस प्रकर हीं[ तिक पु तिA (अ.स.–3) स स%%लिF अपुरF क स%%F मांV अतिभयाक्तगर्ण क तिवेरुद्ध तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार Fर 137(2), 87, 64(2) ( m), 65(1) भर या न्याया स%तिहीं, 2023 था तिवेशर्ष अलिFतिनयामां क Fर 4 एवे% 6 क अ%ग" तिदान%क 07/08/2025 क_ आर_पु तिवेरतिच कर, तिवेचरर्ण तिकया जा रहीं हीं6 । न्यायालया मांV पु तिA क सक्ष्या तिदान%क 02/09/2025 क_ अतिभलिललिखै तिकया गया । त्पुश्च पु तिA द्वार तिदान%क 18/11/2025 क_ Fर 348 भर या नगरिरक सरक्ष स%तिहीं, 2023 क अ%ग" एक आवेदान प्रस् तिकया गया, लिजासमांV याहीं तिनवेदान तिकया गया तिक न्यायालया न कथान क समांया वेहीं पुरिरवेर एवे% समांजा क व्यातिक्तया\ क दावे मांV था , लिजासक करर्ण वेहीं सत्या एवे% सहीं कथान नहींL कर सक । उसन याहीं भ उल्लेखै तिकया तिक यातिचकक"/अतिभयाक्त अमांन %जार द्वार उसक सथा क_ई घटीन नहींL क गई हीं6 था न हीं
उसक सथा क_ई ल[तिगक श_र्षर्ण हींmआ हीं6 । समांजा क दावे एवे% मांनलिसक नवे क करर्ण वेहीं तिनष्पुक्ष रूपु स कथान दान मांV असमांथा" रहीं । अo उस पुनo पुर क्षर्ण क अनमांति प्रदान
3 / 4 (Cr. M. P. No.-473 of 2026) क जाए । उक्त आवेदान पुर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार उभयापुक्ष क_ सनकर “प्रश्नF न आदाश” पुरिर कर हींmए आवेदान तिनरस् कर तिदाया गया । उस तिनरस् आदाश क_ यातिचकक"/अतिभयाक्त अमांन %जार द्वार वे"मांन यातिचक मांV चन` दा गई हीं6 ।
4. यातिचकक"/अतिभयाक्त क तिवेद्वान अलिFवेक्त क क" हीं6 तिक न्यायातिहीं मांV याहीं आवेश्याक हीं6 तिक पु तिA क_ स्वेच्छ स एवे% तिनष्पुक्ष रूपु स कथान करन क अवेसर प्रदान तिकया जाए । इस उद्देश्या स पु तिA द्वार तिवेचरर्ण न्यायालया क समांक्ष तिवेलिFवे आवेदान प्रस् तिकया गया था, लिजास न्यायालया द्वार तिनरस् कर तिदाया गया । उक्त तिनरस् आदाश तिवेलिF क दृतिr मांV ण्डिस्थार रखै जान या_ग्या नहींL हीं6 । अo "प्रश्नF न आदाश" अपुस् कर हींmए यातिचक स्वे कर क जाए था पु तिA क_ पुनo पुर क्षर्ण क अनमांति प्रदान क जाए ।
5. रज्या/प्रत्याथाC क्रमां%क-1 क तिवेद्वान अलिFवेक्त क क" हीं6 तिक पु तिA द्वार पुनo पुर क्षर्ण क अनमांति मां%गन न्यातियाक प्रतिक्रया क दारुपुया_ग हीं6 । तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार पुरिर
"प्रश्नF न आदाश" तिवेलिF-सम्मां एवे% उतिच हीं6 । अo यातिचक तिनरस् क जाए ।
6.
अतिभलखै क पुरिरश लन स स्पुr हीं_ हीं6 तिक पु तिA क कथान न्यायालया मांV तिदान%क 02/09/2025 क_ अतिभलिललिखै तिकया जा चक था । उक्त तिलिथा स लगभग ढाई मांहीं पुश्च पु तिA द्वार Fर 348 भर या नगरिरक सरक्ष स%तिहीं, 2023 क अ%ग" आवेदान प्रस् तिकया गया । यातिदा वेस्वे मांV "प्रश्नF न आदाश" स पु तिA अथावे अतिभया_जान पुक्ष तिकस प्रकर स व्यालिथा हीं_, _ उन्हींV तिवेलिF अनसर इस न्यायालया मांV आन चतिहींए था; तिकन् वे"मांन प्रकरर्ण मांV अतिभयाक्त द्वार याहीं यातिचक प्रस् क गई हीं6, लिजासस प्रथामांदृrया, पु तिA एवे% यातिचकक"/अतिभयाक्त क मांध्या दाJरतिभस%लिF क स%भवेन पुरिरलतिक्ष हीं_ हीं6 । चJwतिक पु तिA क कथान न्यायालया मांV तिवेलिFवे अतिभलिललिखै हीं_ चक हीं6
4 / 4 (Cr. M. P. No.-473 of 2026) था ऐस क_ई थ्या अतिभलखै पुर उपुलब्F नहींL हीं6, लिजासस याहीं तिनष्कर्ष" तिनकल जा सक तिक न्यायालया न कथान क समांया पु तिA तिकस प्रकर क दावे मांV था और इस थ्या क उल्लेखै तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार भ
“प्रश्नF न आदाश” मांV तिकया गया हीं6 । अo ऐस
ण्डिस्थाति मांV पु तिA क_ पुनo पुर क्षर्ण क अनमांति प्रदान तिकया जान न्यातियाक प्रतिक्रया क दारुपुया_ग हीं_ग था सक्ष्या प्रभतिवे करन क प्रक{ ति क_ ढ़वे तिमांलग और इसस समांजा मांV अव्यावेस्था उत्पुन्न हीं_न क स%भवेन रहींग ।
7. इस प्रकर, अतिभलखै मांV उपुलब्F समांस् थ्या एवे% पुरिरण्डिस्थातिया\ क_ दृतिrग रखै हींmए, तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार पुरिर "प्रश्नF न आदाश" मांV क_ई अवे6F अथावे अशद्घ पुरिरलतिक्ष नहींL हीं_ हीं6 । अo उसमांV हींस्क्षपु तिकए जान क आवेश्याक नहींL पुई जा । अo याहीं यातिचक प्रर%तिभक स्र पुर खैरिरजा क जा हीं6 ।
8. रलिजास्टी} क_ तिनदा~तिश तिकया जा हीं6 तिक इस आदाश क प्रति याथाश घ्र तिवेचरर्ण न्यायालया क_ सJचनथा" प्रतिर्ष तिकया जाए ।
9. उपुर_क्तनसर, इस दाण्डिक प्रक र्ण" यातिचक क तिनरकरर्ण तिकया जा हीं6 । सहीं /- (स%जाया क मांर जायासवेल) न्यायाF श पु_मांन