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High Court of Chhattisgarh · body

2026 DAILYLAW 4726 (CHH)

DEVENDRA PRASAD VERMA v. STATE OF CHHATTISGARH

CRR/253/2026 · 2026-02-17

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 7 (Cr. R. No.-253 of 2026) 2026:CGHC:8665 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दाण्डिक पुनर क्षण क्रमां%क -253 /2026 1. दावेन्द्र प्रसदा वेमां. तिपु स्वेग0या च%तिद्रक प्रसदा, उम्र-लगभग 70 वेर्ष., 2. रन दावे वेमां. पुति-दावेन्द्र प्रसदा वेमां., उम्र-लगभग 70 वेर्ष., दा5न6 तिनवेस -प्ल8ट न%.-04, ट .पु . नगर क5र, पुलिलस थान-रमांपुर, लि>ल-क5र, छत्ती सगढ़ -----पुनर क्षणक.गण/अतिभयाक्तगण तिवेरूद्घ  छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार लि>ल दालिDकर , लि>ल->%>ग र चम्पु, छत्ती सगढ़ -----अनवेदाक/रज्या पुनर क्षणक.गण/अतिभयाक्तगण द्वार : श्री रूपुश श्री वेस्वे, अलिDवेक्त । अनवेदाक/रज्या द्वार : श्री अतिमां वेमां., पुJनल अलिDवेक्त । मांनन या न्यायामांKति. श्री स%>या क मांर >यासवेल , न्यायाD श !! आदाश पु ठ पुर पुरिर !! 18/02/2026 1. पुनर क्षण कR ग्राह्य पुर प्रर%तिभक क. सन गए । POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.02.19 14:14:42 +0530 2 / 7 (Cr. R. No.-253 of 2026) 2. Dर 438/442 भर या नगरिरक सरक्ष स%तिV, 2023 क अ%ग. प्रस् इस पुनर क्षण यातिचक मांX, तिवेचरण न्यायालया—तिद्वा या अपुर सत्र न्यायाD श, >%>ग र, लि>ल >%>ग र-चम्पु (छत्ती सगढ़) द्वार सत्र प्रकरण क्रमां%क 96/2025, “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरुद्ध दावेन्द्र प्रसदा वेमां. वे एक अन्या” मांX पुरिर आदाश तिदान%क 07/01/2026 (07/01/2025 त्रतिट पुKण.) क5 चनb दा गई VJ । उक्त आदाश क मांध्यामां स पुनर क्षणक.गण/अतिभयाक्तगण दावेन्द्र प्रसदा वेमां. एवे% उनकR पुत्न श्री मां रन दावे वेमां. द्वार Dर 250 भर या नगरिरक सरक्ष स%तिV, 2023 क अ%ग. प्रस् उन्मां5चन आवेदान तिनरस् तिकया गया VJ । उक्त आदाश क5 स%क्षपु मांX “प्रश्नD न आदाश” स स%5लिD तिकया > रV VJ । 3. “प्रश्नD न आदाश” क अ%ग. तिवेचरण न्यायालया द्वार पुनर क्षणक./अतिभयाक्त दावेन्द्र प्रसदा वेमां. क तिवेरुद्ध Dर 281, 125(क), 137(2)/3(5), 105/3(5) एवे% 238(ख)/3(5) भर या न्याया स%तिV, 2023 क अ%ग. आर5पु इस आशया क तिवेरतिच तिकया गया VJ तिक उसन तिदान%क 12/06/2025 क5 सया% लगभग 04:30 > एक ल5क स्थान पुर वेVन क्रमां%क -12- -5113 CG BN क5 उपुक्ष एवे% उवेलपुन स चलकर मांनवे > वेन क5 स%कटपुन्न तिकया, लि>सस लिलक तिशवे%ग क5 उपुVति करिर Viई । उसन लिलक क5 उसक स%रक्षक कR अनमांति अथावे सVमांति क तिन अपुन वेVन मांX ल >कर उसक व्यापुVरण तिकया था उपुचर न करकर उस तिचतिकत्स स वे%तिच रख, लि>सक पुरिरणमांस्वेरूपु उसकR मांkत्या V5 गई, >5 Vत्या कR श्रीण मांX न आन वेल आपुरलिDक मांनवे वेD VJ । इसक अतिरिरक्त, अतिभयाक्त द्वार लिलक क पुVन Viए वेस्त्रों6 क5 चकK स कटकर उसकR पुVचन तिछपुन क उद्देश्या स सक्ष्या क तिवेल5पुन तिकया गया । 3 / 7 (Cr. R. No.-253 of 2026) 4. पुनर क्षणक./अतिभयाक्त रन दावे वेमां. क तिवेरुद्ध Dर 137(2)/3(5), 105/3(5) एवे% 238(ख)/3(5) भर या न्याया स%तिV, 2023 क अ%ग. इस आशया क आर5पु तिवेरतिच तिकया गया VJ तिक उसन अपुन पुति सV-अतिभयाक्त दावेन्द्र प्रसदा वेमां. क सथा समांन्या आशया क अग्रासरण मांX कया. कर Viए व्यापुVरण, Vत्या कR श्रीण मांX न आन वेल आपुरलिDक मांनवे वेD था सक्ष्या क तिवेल5पुन क कk त्या मांX सVभतिग कR । 5. अतिभया5>न मांमांल स%क्षपु मांX आशया क रV तिक घटन तिदान%क 12/06/2025 क5 सया% लगभग 04:30 > 07 वेर्ष0या लिलक तिशवे%ग पुटल अन्या च्च6 क सथा अपुन घर स क छ दाKर पुर सड़क तिकनर खल रV था । उस समांया पुनर क्षणक.गण/अतिभयाक्तगण तिलसपुर कR ओर स वेVन स वेVr पुVirच । पुनर क्षणक./अतिभयाक्त दावेन्द्र प्रसदा वेमां. द्वार वेVन क5 उपुक्ष एवे% उवेलपुन स चलए >न क करण लिलक तिशवे%ग क5 टक्कर लग , लि>सस उस च5टX आई% । त्पुश्च अन्या च्च6 क5 याV कVकर तिक लिलक क5 उपुचर V अस्पुल ल >या > रV VJ, अतिभयाक्तगण उस अपुन वेVन मांX सथा ल गए, तिकन् उस अस्पुल न ल >कर उपुचर स वे%तिच रख, फलस्वेरूपु लिलक कR मांkत्या V5 गई । शवे स दागuD न आए, इस उद्देश्या स उस रतित्र भर वेVन मांX एयार क% शनर चलकर रख गया । तिदान%क 13/06/2025 क5 सक्ष्या तिछपुन क आशया स लिलक क पुVन Viए वेस्त्रों6 क5 चकK स कटकर अलग कर तिदाया गया था घटन कR क5ई सKचन पुलिलस क5 नVv दा गई । उस तिदान Vरदा >र चbक क समां पु वेVन कR लश क दाbरन लिलक तिशवे%ग क शवे अतिभयाक्तगण क वेVन स रमांदा Viआ । त्पुश्च अपुरD पु%> द्ध कर तिवेवेचन उपुर% अतिभया5गपुत्र न्यायालया मांX प्रस् तिकया गया । 6. पुनर क्षणक.गण/अतिभयाक्तगण क तिवेद्वान अलिDवेक्त क क. VJ तिक कलिथा घटन क समांया पुनर क्षणक./अतिभयाक्त रन दावे वेमां. कR घटनस्थाल पुर उपुण्डिस्थाति अथावे अपुरD मांX 4 / 7 (Cr. R. No.-253 of 2026) उसकR तिकस प्रकर कR स%लिलप्त क स%%D मांX प्रथामां सKचन पुत्र या मांग. सKचन मांX क5ई उल्लेख अथावे सक्ष्या उपुलब्D नVv VJ । प्रथामां सKचन पुत्र एवे% मांग. सKचन कR समांग्रा क आDर पुर पुनर क्षणक./अतिभयाक्त दावेन्द्र प्रसदा वेमां. क तिवेरुद्ध भ आर5तिपु अपुरD क गठन नVv V5 । तिवेचरण न्यायालया द्वार उन्मां5चन आवेदान तिनरस् कर आर5पु क गठन तिकया >न उतिच नVv VJ था “प्रश्नD न आदाश” ण्डिस्थार रख >न या5ग्या नVv VJ । फलस्वेरूपु, पुनर क्षण यातिचक स्वे कर कर “प्रश्नD न आदाश” क5 अपुस् कर Viए पुनर क्षणक.गण/अतिभयाक्तगण क5 उन्मां5तिच तिकया >न उतिच V5ग । तिवेद्वान अलिDवेक्त द्वार अपुन क. क समांथा.न मांX न्यायादृष्टां% SLP (Crl.) No. 13533/2025, Govind Mandavi v. State of Chhattisgarh मांX पुरिर तिनण.या तिदान%क-08/12/2025 क Vवेल तिदाया गया VJ । 7. रज्या/अनवेदाक क तिवेद्वान अलिDवेक्त क क. VJ तिक तिवेचरण न्यायालया द्वार पुरिर “प्रश्नD न आदाश” उतिच एवे% वेJD VJ । अतिभया5गपुत्र मांX स%कलिल सक्ष्या स अतिभयाक्तगण क तिवेरुद्ध आर5पु क प्रथामांदृष्टांया गठन स्पुष्टां रूपु स पुरिरलतिक्ष V5 VJ । अ} यातिचक तिनरस् कR >ए । 8. उभयापुक्ष क क. श्रीवेण तिकया गया था अतिभलख क पुरिरश लन तिकया गया । 9. तिवेलिD क याV सस्थातिपु लिसद्ध% VJ तिक आर5पु तिनD.रण क चरण पुर अतिभयाक्त अपुन प्रतिरक्षण प्रस् नVv कर सक । इस स्र पुर न्यायालया सक्ष्या क तिवेस्k पुर क्षण या लघ-तिवेचरण नVv कर, ण्डि~क क वेल याV दाख VJ तिक अतिभलख पुर उपुलब्D समांग्रा स अतिभयाक्त क तिवेरुद्ध अपुरD क प्रथामांदृष्टांया गठन V5 VJ या नVv । यातिदा प्रथामांदृष्टांया पुया.प्त आDर उपुलब्D V5, 5 तिवेचरण V आर5पु तिनD.रिर तिकया >न उतिच V5 VJ । 5 / 7 (Cr. R. No.-253 of 2026) 10. मांनन या सवे•च्च न्यायालया द्वार State of Rajasthan v. Fatehkaran Mehdu, AIR 2017 SC 796 मांX याV तिवेलिD स्थातिपु कR गई VJ तिक आर5पु तिनD.रण क चरण पुर न्यायालया आर5पु6 क सत्यापुन अथावे अ%तिमां प्रमांतिणक क पुर क्षण नVv कर, अतिपु अतिभलख पुर उपुलब्D समांग्रा क आDर पुर याV तिवेचर कर VJ तिक क्या अतिभयाक्त द्वार अपुरD तिकए >न क प्रल स%दाV उत्पुन्न V5 VJ । यातिदा उपुलब्D समांग्रा स ऐस सशक्त स%दाV पुरिरलतिक्ष V5 VJ, >5 तिवेचरण5पुर% दा5र्षलिसतिद्ध कR तिदाश मांX अग्रासर V5 सक VJ, 5 आर5पु तिनD.रण तिवेलिDसम्मां V5ग । आर5पु तिनD.रण कR अवेस्था दा5र्षलिसतिद्ध क अ%तिमां पुर क्षण कR अवेस्था नVv VJ । 11. इस प्रकर, State of M.P. v. Deepak, (2019) 13 SCC 62 मांX मांनन या सवे•च्च न्यायालया न Dर 397 दा प्रतिक्रया स%तिV क अ%ग. Vस्क्षपु कR पुरिरलिD स्पुष्टां कर Viए प्रतिपुतिदा तिकया VJ तिक आर5पु तिनD.रण क स्र पुर न्यायालया क5 क वेल याV पुर क्षण करन V5 VJ तिक क्या अतिभयाक्त क तिवेरुद्ध अपुरD तिकए >न क अनमांन करन V पुया.प्त आDर तिवेद्यमांन VJ । इस चरण पुर न्यायालया सक्ष्या6 क गण-दा5र्ष क आDर पुर मांK~या%कन नVv कर और न V याV तिनष्कर्ष. तिनकल VJ तिक अतिभललिख सक्ष्या दा5र्षलिसतिद्ध क लिलए पुया.प्त V6ग या नVv । लि>सकR कण्डिक-16 तिनम्ननसर VJ}- “16. It was also noted that at the stage of framing of charges, the Court has to consider the material only with a view to find out if there is a ground for “presuming” that the accused had committed the offence : ( Chitresh Kumar Chopra case [ Chitresh Kumar Chopra v. State (NCT of Delhi), (2009) 16 SCC 605 : (2010) 3 SCC (Cri) 367] , SCC p. 613, para 25) “ 25. It is trite that at the stage of framing of charge, the court is required to evaluate the material and documents on record with a view 6 / 7 (Cr. R. No.-253 of 2026) to finding out if the facts emerging therefrom, taken at their face value, disclose the existence of all the ingredients constituting the alleged offence or offences. For this limited purpose, the court may sift the evidence as it cannot be expected even at the initial stage to accept as gospel truth all that the prosecution states. At this stage, the court has to consider the material only with a view to find out if there is ground for “presuming” that the accused has committed an offence and not for the purpose of arriving at the conclusion that it is not likely to lead to a conviction.” 12. मांनन या सवे•च्च न्यायालया द्वार State (NCT of Delhi) v. Shiv Charan Bansal and Others, (2020) 2 SCC 290 मांX याV पुन} स्पुष्टां तिकया गया VJ तिक आर5पु तिनD.रण क चरण पुर तिवेचरण न्यायालया द्वार सक्ष्या6 क सKक्ष्मां एवे% तिवेस्k तिवेश्लर्षण या व्यापुक पुर क्षण तिकया >न अपुतिक्ष नVv VJ । थातिपु, न्यायालया क5 याV अलिDकर VJ तिक वेV उपुलब्D समांग्रा क स तिमां पुर क्षण कर याV सतिनण्डिश्च कर तिक अतिभयाक्त क तिवेरुद्ध तिवेचरण प्रर%भ करन V प्रथामांदृष्टांया मांमांल स्थातिपु V5 VJ या नVv । 13. स%पुKण. अतिभलख क पुरिरश लन स याV स्पुष्टां पुरिरलतिक्ष V5 VJ तिक पुलिलस द्वार प्रस् अतिभया5गपुत्र मांX न क वेल इस थ्या स%%D सक्ष्या स%कलिल V„ तिक कलिथा घटन क समांया पुनर क्षणक./अतिभयाक्त दावेन्द्र प्रसदा वेमां. क सथा उसकR पुत्न पुनर क्षणक./अतिभयाक्त रन दावे वेमां. भ उपुण्डिस्था था , ण्डि~क अतिभयाक्त दावेन्द्र प्रसदा वेमां. क तिवेरुद्ध याV प्रत्याक्ष एवे% पुरिरण्डिस्थाति>न्या सक्ष्या भ उपुलब्D VJ तिक दाघ.टन मांX स%लिलप्त वेVन वेV चल रV था । अतिभलख स याV भ प्रकट V5 VJ तिक वेV आV लिलक तिशवे%ग क5 उपुचर V अस्पुल ल >न क आश्वेसन दाकर अपुन सथा वेVन मांX ल गया, तिकन् उस अस्पुल नVv ल >या गया, फलस्वेरूपु उपुचर क अभवे मांX लिलक तिशवे%ग कR मांkत्या V5 गई । 7 / 7 (Cr. R. No.-253 of 2026) घटन कR क5ई सKचन पुलिलस क5 नVv दा गई था सक्ष्या क5 तिछपुन क आशया स लिलक क पुVन Viए वेस्त्रों6 क5 चकK स कटकर फX क तिदाया गया । पुश्च… तिदान%क 13/06/2025 क5 वेVन कR लश क दाbरन लिलक तिशवे%ग क शवे उक्त वेVन स रमांदा तिकया गया । पुनर क्षणक.गण द्वार लि>स न्यायादृष्टां% ग5तिवे%दा मांवे (पुKवे•क्त) क Vवेल तिदाया गया VJ वेV दा5र्षमांतिक्त स स%%लिD VJ । >तिक तिवेचरD न आदाश आर5पु तिनD.रण क स%%D मांX VJ । दा5न6 स्र पुर सक्ष्या क मांK~या क तिनD.रण तिभन्न V5 VJ । इसलिलए उसक समांथा.न पुनर क्षणक.गण क5 नVv तिमांल । 14. इस प्रकर, उपुर5क्त न्यायादृष्टां%6 था अतिभलख मांX उपुलब्D समांस् थ्या एवे% पुरिरण्डिस्थातिया6 क5 दृतिष्टांग रख Viए, तिवेचरण न्यायालया द्वार पुरिर "प्रश्नD न आदाश" मांX क5ई अवेJD अथावे अशद्घ पुरिरलतिक्ष नVv V5 VJ । अ} उसमांX Vस्क्षपु तिकए >न कR आवेश्याक नVv पुई > । अ} याV यातिचक प्रर%तिभक स्र पुर खरिर> कR > VJ । 15. रलि>स्ट‡ क5 तिनदाˆतिश तिकया > VJ तिक इस आदाश कR प्रति याथाश घ्र तिवेचरण न्यायालया क5 सKचनथा. प्रतिर्ष तिकया >ए । 16. उपुर5क्तनसर, इस पुनर क्षण यातिचक क तिनरकरण तिकया > VJ । सV /- (स%>या क मांर >यासवेल) न्यायाD श पो मन