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High Court of Chhattisgarh · body
2026 DAILYLAW 4553 (CHH)
SANDEEP YADAV @ PAPPU DADHI v. STATE OF CHHATTISGARH
MCRC/2837/2026 · 2026-04-05
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2026
[ 2026 DAILYLAW 4553 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 4 (M.Cr.C. No.-2837 of 2026)
2026:CGHC:15668 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिवेतिवेध
दाण्डिक प्रकरण
क्रमां$क
-2837
/2026
स$दा पु यादावे उर्फ. पुप्पु0 दाढ़ तिपु-स्वेग2या ग3पुल दाढ़ , वे.मांन उम्र-लगभग 42 वेर्ष., तिनवेस - -11/16, क3वेलपुर, $सर्फटक, पुलिलस थान-दाशाश्वेमांध, लि?ल- वेरणस , उत्तीर प्रदाशा । -----आवेदाक/अतिभयाक्त तिवेरूद्घ छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार थान प्रभर , पुलिलस थान-सकर , लि?ल-तिलसपुर, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदा /रज्या आवेदाक/अतिभयाक्त द्वार : श्री अख्र हुKसLन, अलिधवेक्त । रज्या/उत्तीरवेदा द्वार : श्री अन शा तिवेर , उपु शासकMया अलिधवेक्त । न्यायामां0ति. श्री स$?या क मांर ?यासवेल !! आदाशा पु ठ पुर पुरिर !! 06/04/2026
1. धर-483 भर या नगरिरक सरक्षा स$तिहु, 2023 क हु प्रस् इस तिद्वा या ?मांन आवेदान मांS आवेदाक/अतिभयाक्त स$दा पु यादावे उर्फ. पुप्पु0 दाढ़ क3 पुलिलस थान- POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.04.07 10:47:03 +0530
2 / 4 (M.Cr.C. No.-2837 of 2026) सकर , लि?ल-तिलसपुर, छत्ती सगढ़ क अपुरध क्रमां$क-641/2022 अ$ग. धर- 302, 120- , 201, 341 सहुपुतिठ धर-34 भर या दा स$तिहु, 1860 एवे$ धर-25, 27 आयाध अलिधतिनयामां, 1959 क मांमांल मांS ?मांन दान क तिनवेदान तिकया गया हुL ।
2. अतिभया3?न मांमांल, स$क्षापु मांS, इस आशाया क हुL तिक तिदान$क-14/12/2022 क3 आपुरलिधक र्षड्यं$त्र एवे$ समांन्या आशाया क हु स$?0 तित्रपुठ (मांZक) कM तिपुस्\ल स ग3ल
मांरकर हुत्या कर दा गई, लि?स स$$ध मांS थान-सकर , लि?ल-तिलसपुर, छत्ती सगढ़ मांS अपुरध पु$? द्घ तिकया गया । पुलिलस द्वार तिवेवेचन पु0ण. तिकए ?न क पुश्च क ल-24 अतिभयाक्तगण क तिवेरूद्घ अतिभया3ग पुत्र पुशा तिकया गया, लि?सक तिवेचरण सत्र न्यायालया, तिलसपुर, लि?ल-तिलसपुर, छत्ती सगढ़ क समांक्षा ल$ति हुL ।
3. आवेदाक/अतिभयाक्त पुक्षा क तिवेद्वान अलिधवेक्त क क. हुL तिक आवेदाक तिदान$क 17/03/2023 स तिनर$र न्यातियाक अतिभरक्षा मांS हुL । उसक प्रथामां ?मांन आवेदान तिदान$क 08/12/2025 क3 समांन्वेया पु ठ द्वार तिनरस् तिकया ? चक हुL । उक्त आदाशा क उपुर$ तिवेचरण न्यायालया क3 शा घ्र तिवेचरण पु0ण. करन क तिनदा`शा प्रदान तिकए गए था, थातिपु अ क तिवेचरण पु0ण. नहुa हु3 सक हुL । अतिभया3?न द्वार क ल 54 सतिक्षायाb क3 प्रस् तिकया ?न हुL, लि?नमांS स अ क क वेल 41 सतिक्षायाb क पुर क्षाण तिकया गया हुL था शार्ष सतिक्षायाb क पुर क्षाण मांS पुया.प्त समांया लगन स$भतिवे हुL । अलिधक$शा अतिभया3?न सक्षा
पुक्षाद्रो3हु हु3 चक हुe । आवेदाक/अतिभयाक्त क कब्? स मांत्र एक टनदार चक0 कM ?ब्
दाशा.ई गई हुL, ?तिक अतिभया3?न क अनसर स$पु0ण.
घटन तिपुस्\ल स करिर हु3न या गया हुL । इसक अतिरिरक्त याहु क. प्रस् तिकया गया तिक समांन प्रकZ ति क अपुरध मांS
3 / 4 (M.Cr.C. No.-2837 of 2026) तिगरफ्र क ल 22 अतिभयाक्तb मांS स 20 सहु-अतिभयाक्तb क3 मांनन या सवेiच्च न्यायालया एवे$ इस न्यायालया द्वार ?मांन क लभ प्रदान तिकया ? चक हुL । अj दाल हुKई पुरिरण्डिस्थातियाb क3 दृतिlग रख हुKए उसक ?मांन आवेदान क3 स्वे कर कर उस रिरहु तिकए ?ए ।
4. उत्तीरवेदा /रज्या कM ओर स उपुण्डिस्था तिवेद्वान अलिधवेक्त न ?मांन आवेदान क तिवेर3ध कर हुKए क. प्रस् तिकया तिक वे.मांन प्रकरण अत्या$ ग$भ र प्रकZ ति क हुL, ?3 एक सतिनया3लि? आपुरलिधक र्षड्यं$त्र क हु करिर हुत्या स स$$लिध हुL । याहु क. तिकया गया तिक पु0वे. तिनया3लि? या3?न क अनसर हुर शा0टरb क3 लकर स$?0 तित्रपुठ कM तिपुस्\ल स ग3ल मांरकर हुत्या कM गई । मांख्या अतिभयाक्त दान स अ$सर क सथा वे.मांन आवेदाक/अतिभयाक्त कM भ घटन मांS सतिक्रया एवे$ मांहुत्वेपु0ण. भ0तिमांक रहु हुL, अj उसक मांमांल ?मांन पुर रिरहु तिकए गए अन्या सहु-अतिभयाक्तb स तिभन्न हुL । आवेदाक क आपुरलिधक पु0वे.वेZत्ती हुL, लि?सक अ$ग. उसक तिवेरुद्ध अपुरध क्रमां$क 75/2017, धर 307 भर या दा स$तिहु था अपुरध क्रमां$क 87/2016, आयाध अलिधतिनयामां क अ$ग. प्रकरण पु$? द्ध हुL । आवेदाक क प्रकट करण कथान मांS उसकM सतिक्रया स$लिलप्त पुरिरलतिक्षा हु3 हुL । यातिदा ?मांन पुर रिरहु तिकया ? हुL 3 आवेदाक शार्ष सतिक्षायाb क3 प्रभतिवे कर सक हुL, सक्ष्या स छड़छड़ कर सक हुL था न्यातियाक प्रतिक्रया मांS व्यावेधन उत्पुन्न कर सक हुL । अj ?मांन आवेदान तिनरस् तिकया ?ए ।
5. उभयापुक्षा क3 सन गया था स$पु0ण. अतिभलख क पुरिरशा लन तिकया गया ।
6. अतिभलख क पुरिरशा लन स याहु पुरिरलतिक्षा हु3 हुL तिक आवेदाक/अतिभयाक्त कM घटन मांS प्रथामांदृlया सतिक्रया एवे$ मांहुत्वेपु0ण.
भ0तिमांक रहु हुL । उसक मांमांल उन सहु-अतिभयाक्तb स
4 / 4 (M.Cr.C. No.-2837 of 2026) तिभन्न हुL, लि?न्हुS ?मांन प्रदान कM गई हुL । इसक अतिरिरक्त, आवेदाक क आपुरलिधक पु0वे.वेZत्ती भ तिवेद्यमांन हुL, ?3 उसक तिवेरुद्ध प्रतिक0 ल पुरिरण्डिस्थाति तिनतिमां. कर हुL । उसक प्रथामां ?मांन आवेदान तिनरस् हु3न क पुश्च पुरिरण्डिस्थातियाb मांS ऐस क3ई पुरिरवे.न नहुa पुया ? ?3 तिक उस ?मांन क पुत्र न हु3 । उपुया.क्त थ्या एवे$ उपुलब्ध समांग्री क आल3क मांS याहु न्यायालया पु हुL तिक आवेदाक क प्रकरण ?मांन प्रदान तिकए ?न हु उपुयाक्त नहुa हुL । र्फलj आवेदाक स$दा पु यादावे उर्फ. पुप्पु0 दाढ़ क तिद्वा या ?मांन आवेदान तिनरस् तिकया ? हुL ।
7. उल्लेखन या हुL तिक घटन तिदान$क 14/12/2022 कM हुL था आवेदाक/अतिभयाक्त न वेर्ष. स न्यातियाक अतिभरक्षा मांS हुL । अतिभया3?न क क ल 54 सतिक्षायाb मांS स 41 सतिक्षायाb क पुर क्षाण तिकया ? चक हुL । प्रकरण कM पुरिरण्डिस्थातियाb क3 दृतिlग रख हुKए तिवेचरण न्यायालया क3 तिनदा`तिशा तिकया ? हुL तिक वेहु समांस् सथा.क प्रयास स याथास$भवे मांमांल क तिनरकरण आदाशा कM प्रति प्रतिप्त स 05 मांहु मांS तिकया ?न सतिनण्डिश्च करS, लि?समांS अतिभया3?न था चवे पुक्षा स भ सहुया3ग कM अपुक्षा हुL ।
8. रलि?स्टy क3 तिनदा`तिशा तिकया ? हुL तिक इस आदाशा कM प्रतिलिलतिपु याथाशा घ्र तिवेचरण न्यायालया क3 स0चनथा. वे अनपुलनथा. प्रतिर्ष कM ?ए । सहु /- (स$?या क मांर ?यासवेल) न्यायाध शा पोमन