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High Court of Chhattisgarh · body

2026 DAILYLAW 39714 (CHH)

THE ORIENTAL INSURANCE COMPANY LTD. v. SMT. SALMA KHAN

MAC/2308/2024 · 2026-10-14

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 6 {MA(C) No. 2308 of 2024} CGHC010412222024 2026:CGHC:44732 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर तिवेतिवेध अपु ल ( प्रतिकर ) क्रमां!क -2308 /2024  ति) ओरिरएं!टल इं!श्या0र1स क! पुनी लिलतिमांटड (गल रूपु स ति) ओरिरएं!टल जनीरल इं!श्या0र1स क! पुनी लिलतिमांटड क नीमां स वेति78), द्वार शाखा प्र!धक, हो0टल लक्ष्मां7 एंवेन्या>, मां>ति8 लइंनी क? ति@ मां!ड क समांनी, जग)लपुर, लिजल स्र, छत्ती सगढ़ ()0@ वेहोनी मां0टरसइंतिकल क्रमां!क स .ज .-17-क .क .-1433 कE मां क! पुनी ) -----अपु लर्थीG तिवेरूद्घ 1. श्री मां सलमां खानी, पुति स्वेगGया अब्)ल रहो मां खानी, आया लगभग 47 वे@8, 2. मां0होम्मां) जवे) खानी, तिपु स्वेगGया अब्)ल रहो मां खानी, आया लगभग 19 वे@8, 3. क . नीलिजया खानी, तिपु स्वेगGया अब्)ल रहो मां खानी, आया लगभग 18 वे@8 (इं!ज तिनीयारिर!ग कE छत्रा), 4. मां0होम्मां) इंस्मांइंल, तिपु स्वेगGया मां0होम्मां) इंब्रातिहोमां, आया लगभग 78 वे@8, 5. श्री मां मां0होर शाखा, पुति मां0होम्मां) इंस्मांइंल, आया लगभग 74 वे@8, सभ तिनीवेस सनीलिसट , च!द्रशाखार वेड8, स>या8 मां!ति)र क पुस, जग)लपुर, लिजल स्र, छत्ती सगढ़, -----)वेक8ग7 6. सतिचनी जयासवेल, तिपु रजशा जयासवेल, आया लगभग 20 वे@8, व्यावेसया-छत्रा, मांतिडकल कSलज, वे8मांनी तिनीवेस तिडमांरपुल, मांतिडकल कSलज Sयाज होSस्टल, कमांर क्रमां!क 318, ग )मां र0ड, र्थीनी पुरपु, लिजल स्र, छत्ती सगढ़ ()0@ वेहोनी मां0टरसइंतिकल क्रमां!क स .ज .-17-क .क .-1433 क चलक-सहो- स्वेमां ) -----प्रत्यार्थीGग7 POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.10.16 13:05:06 +0530 2 / 6 {MA(C) No. 2308 of 2024} अपु लर्थीG/ मां क! पुनी द्वार : श्री आर.एंनी. पुस्ट एंवे! श्री आकशा श्री वेस्वे, अलिधवेक्ताग7 । )वेक8/प्रत्यार्थीG क्रमां!क-1 स 5 द्वार : श्री प्रवे ध धर!धर, अलिधवेक्ता । चलक-स्वेमां /प्रत्यार्थीG क्रमां!क-6 द्वार : स>चनी अ)मां तिमांल । न्यायामां>ति8 श्री स!जया क मांर जयासवेल !! तिनी78या पु ठ पुर पुरिर !! 15/10/2026 1. मां0टर यानी अलिधतिनीयामां, 1988 कE धर 173 क अ!ग8 प्रस् इंस अपु ल मां1 प्रर्थीमां अपुर मां0टर )र्घ8टनी )वे अलिधकर7, जग)लपुर, लिजल-स्र (छत्ती सगढ़) द्वार )वे प्रकर7 क्रमां!क 74/2016, “श्री मां सलमां खानी वेग^रहो तिवेरुद्ध सतिचनी जयासवेल वेग^रहो” मां1 पुरिर अलिधतिनी78या ति)नी!क 24/07/2024 क0 चनीb ) गई हो^ । उक्ता अलिधतिनी78या क0 आग स!क्षेपु मां1 “प्रश्नीध नी अलिधतिनी78या” स स!0लिध तिकया ज रहो हो^ । 2. प्रकर7 क थ्या, स!क्षेपु मां1, इंस प्रकर होf तिक अब्)ल रतिहोमां (मां?क) ति)नी!क 02/01/ 2016 क0 अपुनी मां0टरसइंतिकल स तिडमांरपुल, मांतिडकल कSलज क समांनी स ज रहो र्थी । उस समांया सतिचनी जयासवेल मां0टरसइंतिकल क्रमां!क स .ज .-17-क .क .-1433 (लिजस आग स!क्षेपु मां1 “)0@ वेहोनी” स सम्0लिध तिकया ज रहो हो^) क0 ज गति एंवे! लपुरवेहो पु>वे8क चल होgएं आया, लिजसकE ठ0कर क फलस्वेरूपु आई ग!भ र च0टi क कर7 अब्)ल रतिहोमां क0 अस्पुल ल जया गया, जहो! उपुचर क )bरनी उसकE मां?त्या हो0 गई । उक्ता र्घटनी क स!!ध मां1 र्थीनी पुरपु, लिजल स्र, छत्ती सगढ़ मां1 अपुरध क्रमां!क 02/ 2016 अ!ग8 धर 304(क) भर या )ण्ड स!तिहो मां1 अपुरध पु!ज द्ध तिकया गया । 3 / 6 {MA(C) No. 2308 of 2024} 3. मां?क अब्)ल रतिहोमां कE उक्ता )र्घ8टनी मां1 मां?त्या क फलस्वेरूपु उसकE पुत्नी , )0 स!नी एंवे! मां-तिपु द्वार मां0टर यानी अलिधतिनीयामां कE धर 166 क अ!ग8 प्रतिकर कE मां!ग कर होgएं )वे आवे)नी प्रस् तिकया गया । लिजस पुर तिवेलिधवे सनीवेई क पुश्च अलिधकर7 द्वार “प्रश्नीध नी अलिधतिनी78या” पुरिर तिकया गया र्थी )वेक8ग7 क पुक्षे मां1 ₹44,02,252/- कE प्रतिकर रतिशा ब्याज सतिहो अलिधतिनी7G कE गई, लिजसमां1 “)0@ वेहोनी“ कE अपु लर्थीG- मां क! पुनी क0 उत्तीर)या ठहोरया गया हो^ । उक्ता तिनीष्क@8 क0 अपु लर्थीG- मां क! पुनी द्वार इंस अपु ल मां1 चनीb ) गई हो^ । 4. अपु लर्थीG- मां क! पुनी क तिवेद्वानी अलिधवेक्ता क क8 हो^ तिक उनीक द्वार मां?क अब्)ल रतिहोमां कE या0ग)या उपुक्षे क अतिभवेचनी तिकया गया र्थी, लिजस अलिधकर7 द्वार मांन्या नीहोm तिकया गया हो^, जतिक उनीकE ओर स इंस स!!ध मां1 क! पुनी क प्रशासतिनीक अलिधकर तिशावे सब्राहोमां7यामां अयायार (अनीवे)क सक्षे क्रमां!क-1) एंवे! अन्वे@क अमांरन्द्र क मांर ) तिक्षे (अनीवे)क सक्षे क्रमां!क-2) क पुर क्षे7 करया गया हो^ । उनीक द्वार “)0@ वेहोनी“ क चलक सतिचनी जयासवेल द्वार )ज8 करई गई तिशाकया पुर पुलिलस द्वार )ज8 प्रर्थीमां स>चनी पुत्रा र्थी उस पुर कE गई तिवेवेचनी स स!!लिध )स्वेज सक्ष्या प्र)शा8 एंनी.एं.-2 स एंनी.एं.- 18 क प्रस् तिकएं गएं होf । उक्ता रिरपु0ट8 मां?क अब्)ल रतिहोमां क तिवेरुद्ध )ज8 कE गई र्थी , तिक! उसकE मां?त्या हो0 जनी क कर7 पुलिलस द्वार उसमां1 खात्मां तिकया गया हो^ । उनीक क8 हो^ तिक )र्घ8टनी मां1 अब्)ल रतिहोमां कE भ या0ग)या उपुक्षे र्थी । अn उसकE या0ग)या उपुक्षे मांन्या कर होgएं उसक तिवेरुद्ध पुरिर अलिधतिनी78या क0 यार्थीआवेश्याक स!शा0लिध तिकया जएं । 5. )वेक8/प्रत्यार्थीG क्रमां!क 1 स 5 क तिवेद्वानी अलिधवेक्ता नी अपु ल क तिवेर0ध कर होgएं क8 प्रस् तिकया हो^ तिक मां?क अब्)ल रतिहोमां कE क0ई या0ग)या उपुक्षे नीहोm र्थी , ल्किpक )र्घ8टनी 4 / 6 {MA(C) No. 2308 of 2024} क लिलएं पु>78 रूपु स “)0@ वेहोनी“ क चलक सतिचनी जयासवेल उत्तीर)या रहो हो^ । मां?क अब्)ल रतिहोमां कE या0ग)या उपुक्षे क0 प्रमांति7 करनी क लिलएं अपु लर्थीG- मां क! पुनी अर्थीवे “)0@ वेहोनी“ क चलक/स्वेमां कE ओर स क0ई तिवेश्वेसनी या एंवे! ग्राह्य सक्ष्या प्रस् नीहोm तिकया गया हो^ । अलिधकर7 द्वार अतिभलखा पुर उपुलब्ध मांbलिखाक एंवे! )स्वेज सक्ष्या क समांतिच मां>pया!कनी करनी क पुश्च तिवेलिधसम्मां तिनीष्क@8 अतिभलिललिखा तिकया गया हो^ । अपु लर्थीG- मां क! पुनी क क8 स्वे कर तिकएं जनी या0ग्या नीहोm हो^ । अn अपु ल खारिरज तिकएं जनी क तिनीवे)नी तिकया गया हो^ । 6. उपुल्किस्र्थी पुक्षे क क8 श्रीवे7 तिकएं गएं र्थी अतिभलखा क स>क्ष्मांपु>वे8क पुरिरशा लनी तिकया गया । 7. समांग्रा अतिभलखा क पुरिरशा लनी स याहो ल्किस्र्थीति स्पुष्ट हो0 हो^ तिक मांbक क सक्षे क रूपु मां1 अब्)ल अमां नी (आवे)क सक्षे क्रमां!क-2) क पुर क्षे7 )वेक8 पुक्षे कE ओर स करया गया हो^ । अब्)ल अमां नी पुलिलस द्वार प्रस् अ!तिमां प्रतिवे)नी प्र)शा8 एंनी.एं.-10 क अनीसर स>च द्ध सक्षे हो^ र्थी उसनी अपुनी न्यायालया नी कर्थीनी मां1 इंस थ्या कE पुतिष्ट कE हो^ तिक )र्घ8टनी “)0@ वेहोनी“ क चलक सतिचनी जयासवेल द्वार वेहोनी क0 उपुक्षेपु>वे8क एंवे! उवेलपुनी स चलएं जनी क कर7 होgई र्थी । उक्ता कर्थीनी क क0ई प्रभवे खाण्डनी नीहोm तिकया ज सक हो^ । ल्किpक अब्)ल अमां नी क कर्थीनी )वेक8 पुक्षे कE ओर स प्रस् पुलिलस क चलनी )स्वेजi कE प्रतिलिलतिपुया!, प्र)शा8 एं-1 स एं-10, स समांलिर्थी8 हो^, लिजनीक अनीसर “)0@ वेहोनी“ क चलक सतिचनी जयासवेल कE उपुक्षे एंवे! उवेलपुनी क कर7 )र्घ8टनी हो0नी )तिशा8 हो^ । 5 / 6 {MA(C) No. 2308 of 2024} 8. )>सर ओर, अपु लर्थीG- मां क! पुनी कE ओर स प्रस् सक्ष्या क अवेल0कनी स याहो पुरिरलतिक्षे हो0 हो^ तिक क! पुनी क प्रशासतिनीक अलिधकर तिशावे सब्राहोमां7यामां अयायार नी मां पुSलिलस प्र)शा8 एंनी.एं.-1 प्रस् कE हो^ र्थी अपुनी क! पुनी क अन्वे@क स तिवेवेचनी करया जनी या हो^ । अन्वे@क क रूपु मां1 अमांरन्द्र क मांर ) तिक्षे नी अपुनी सक्ष्या मां1 अन्वे@7 प्रतिवे)नी प्र)शा8 एंनी.एं.-3 क उल्लेखा कर होgएं कहो हो^ तिक उसनी )र्घ8टनी स स!!लिध आपुरलिधक प्रकर7 क )स्वेजi कE प्रमांति7 प्रतिलिलतिपुया! प्रप्त कE र्थीm । )स्वेजi क रूपु मां1 उक्ता सक्षे नी “)0@ वेहोनी“ क चलक सतिचनी जयासवेल द्वार लिलखाई गई रिरपु0ट8 क आधर पुर पुलिलस द्वार कE गई तिवेवेचनी मां1 स!कलिल प्र)शा8 एंनी.एं.-5 स प्र)शा8 एंनी.एं.-18 क क )स्वेज प्रस् तिकएं होf । 9. उल्लेखानी या हो^ तिक क! पुनी क तिवेलिधक अलिधकर तिशावे सब्राहोमां7यामां अयायार नी 0 मांbक क सक्षे हो^ और नी हो उसनी स्वेया! तिकस प्रकर कE तिवेवेचनी कE हो^ । अn या0ग)या उपुक्षे क तिवे@या मां1 उसकE सक्ष्या क तिवेलिधक मांहोत्वे नीहोm हो^ । इंस प्रकर, अमांरन्द्र क मांर ) तिक्षे, ज0 क! पुनी क अन्वे@क हो^, द्वार प्रस् तिकएं गएं )स्वेज पुलिलस तिवेवेचनी स स!!लिध )स्वेज होf और उन्हो1 प्रमांति7 करनी हो अन्वे@क अमांरन्द्र क मांर ) तिक्षे क0 सक्षेमां सक्षे नीहोm कहो ज सक । पुलिलस तिवेवेचनी मां1 स!कलिल सक्ष्या क प्रतिपु)नी तिवेवेचक द्वार तिकया ज सक हो^ अर्थीवे लिजस व्यातिक्ता नी पुलिलस मां1 तिशाकया )ज8 करई हो0 या कर्थीनी ति)या हो0, उस न्यायालया क समांक्षे सक्षे क रूपु मां1 प्रस् तिकया जनी आवेश्याक र्थी, ज0 इंस मांमांल मां1 नीहोm तिकया गया हो^ । 10. या0ग)या उपुक्षे क0 स्पुष्ट रूपु स स्र्थीतिपु करनी हो प्रमांखा सक्षे “)0@ वेहोनी“ क चलक सतिचनी जयासवेल हो0 सक र्थी, ज0 उपुलब्ध भ र्थी, तिक! अपु लर्थीG- मां क! पुनी द्वार 6 / 6 {MA(C) No. 2308 of 2024} उस सक्षे क रूपु मां1 आहोx नीहोm तिकया गया । अपु लर्थीG- मां क! पुनी कE ओर स ऐस क0ई सक्ष्या भ प्रस् नीहोm तिकया गया हो^, लिजस सक्ष्या तिवेलिध क अ!ग8 ग्राह्य मांनी होgएं तिनी78या मां1 तिवेचर7 या नीया ज सक । इंस प्रकर, अपु लर्थीG- मां क! पुनी कE ओर स प्रस् )स्वेजi एंवे! सक्ष्या क या0ग)या उपुक्षे क प्रश्नी पुर अपुतिक्षे तिवेलिधक मांहोत्वे नीहोm हो^ । पुया8प्त एंवे! ग्राह्य सक्ष्या क अभवे मां1 अपु लर्थीG- मां क! पुनी याहो स्र्थीतिपु करनी मां1 असफल रहो हो^ तिक मां?क अब्)ल रतिहोमां कE )र्घ8टनी मां1 क0ई या0ग)या उपुक्षे र्थी । 11. इंस प्रकर, उपुर0क्ता तिवेवेचनी क आधर पुर याहो न्यायालया पु हो^ तिक अपु लर्थीG- मां क! पुनी क क8 स्वे कर तिकएं जनी या0ग्या नीहोm हो^ । अलिधकर7 द्वार पुरिर “प्रश्नीध नी अलिधतिनी78या” अतिभलखा पुर उपुलब्ध मांbलिखाक एंवे! )स्वेज सक्ष्या क अनीरूपु हो0नी स उसमां1 तिकस होस्क्षेपु कE आवेश्याक नीहोm पुया ज । फलस्वेरूपु, अपु ल स्वे कर या0ग्या नीहोm हो0नी स खारिरज कE ज हो^ । 12. तिनी78या कE प्रति क सर्थी अलिधकर7 क अतिभलखा शा घ्रपु>वे8क आवेश्याक कया8वेहो हो स>चनीर्थी8 वे पुलनीर्थी8 वेपुस प्रति@ हो0 । सहो /- (स!जया क मांर जयासवेल) न्यायाध शा पो मन