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High Court of Chhattisgarh · body
2026 DAILYLAW 39201 (CHH)
VISHWANATH NAMBIYAR v. ABHISHEK RAO
MAC/94/2023 · 2026-10-11
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2026
[ 2026 DAILYLAW 39201 (CHH) · dailylaw.ai ]
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1 / 5 {MA(C) No. 94 of 2023}
CGHC010010792023
2026:CGHC:44082 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिवेतिवेध अपु ल
( प्रतिकर
) क्रमां!क
-94
/2023
तिवेश्वेनाथ नाम्बि-यार तिपु क शवे नाम्बि-यार, आया लगभग 50 वेर्ष3, तिनावेस -4धघाट थना क पु छ, स!जया ग!ध वेर्ड3 स!ख्या 34, जगदलपुर, जिजल स्र, छत्ती सगढ़ । (द4र्ष वेहना स्क? ट क्रमां!क स .ज .-17-क .ज .-9120 कC स्वेमां ) -----अपु लथD/दवेक3 तिवेरूद्घ
1. अतिभर्षक रवे तिपु हनामां! रवे, आया लगभग 30 वेर्ष3, तिनावेस -ग!ध नागर, नागर तिनागमां क समांना, जगदलपुर, जिजल स्र, छत्ती सगढ़ । (द4र्ष वेहना स्क? ट क्रमां!क स .ज .-17-क .ज .-9120 कC चलक वे स्वेमां )
2. शखा प्र!धक, द ओरिरया!टल इं!श्या4रKस क! पुना जिलतिमांटर्ड, शखा कया3लया-ह4टल लक्ष्मांण एवेन्या?, जगदलपुर, जिजल-स्र, छत्ती सगढ़ । (द4र्ष वेहना स्क? ट क्रमां!क स .ज .-17-क .ज .-9120 कC मां क! पुना ) -----प्रत्याथDगण अपु लथD/दवेक3 द्वार : श्री एच.ए.पु .एस. भतिटया, अजिधवेक्ता । चलक-स्वेमां /प्रत्याथD क्रमां!क-1 द्वार : क4ई उपुम्बिस्थ नाहU ।
मां क! पुना /प्रत्याथD क्रमां!क-2 द्वार : श्री प्रवे ण क मांर ल्सयाना, अजिधवेक्ता । न्यायामां?ति3 श्री स!जया क मांर जयासवेल !! तिनाण3या पु ठ पुर पुरिर !! 12/10/2026 POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.10.13 15:04:34 +0530
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1. मां4टर याना अजिधतिनायामां, 1988 कC धर 173 क अ!ग3 प्रस् इंस अपु ल मांK प्रथमां अतिरिरक्ता मां4टर दघा3टना दवे अजिधकरण, जगदलपुर, जिजल-स्र (छत्ती सगढ़) द्वार दवे प्रकरण क्रमां!क 295/2021, “तिवेश्वेनाथ नाम्बि-यार तिवेरुद्ध अतिभर्षक रवे वेग^रह” मांK पुरिर अजिधतिनाण3या तिदना!क 30/11/2022 क4 चना` द गई ह^, जिजस आग स!क्षेपु मांK “प्रश्नाध ना अजिधतिनाण3या” स स!4जिध तिकया ज रह ह^ ।
2. प्रकरण क थ्या, स!क्षेपु मांK, इंस प्रकर हc तिक तिवेश्वेनाथ नाम्बि-यार (आह) तिदना!क 20/12/2020 क4 मां4टरसईतिकल मांK अपुना कया3 पुर ज रह थ । ग4याल धमां3शल (जगदलपुर) क पुस प्रत्याथD अतिभर्षक रवे ज?तिपुटर स्क? ट क्रमां!क स .ज .-17-क .ज .- 9120 (जिजस आग स!क्षेपु मांK “द4र्ष वेहना” स स!4जिध तिकया ज रह ह^) क4 ज गति एवे! लपुरवेह पु?वे3क चल हdए आया, जिजसकC ठ4कर लगना क फलस्वेरूपु तिवेश्वेनाथ नाम्बि-यार क हथ कC द4 अ!गजिलयाf, दया! घाटना, चहर, आ!खा एवे! शर र क अन्या भगf मांK ग!भ र च4टK आई! । उक्ता दघा3टना क स!!ध मांK थना-4धघाट, जगदलपुर मांK अपुरध क्रमां!क 395/ 2022 क अ!ग3 अपुरध पु!ज द्ध तिकया गया ।
3.
आह तिवेश्वेनाथ नाम्बि-यार द्वार मां4टर याना अजिधतिनायामां कC धर 166 क अ!ग3 प्रतिकर कC मां!ग कर हdए दवे आवेदना प्रस् तिकया गया । जिजस पुर अजिधकरण द्वार उभयापुक्षे क4 सनाना क पुश्च याह तिनाध3रिर तिकया गया तिक आह तिवेश्वेनाथ नाम्बि-यार छत्ती सगढ़ शसना क जल स!सधना तिवेभग मांK टईपु कCपुर क पुद पुर पुदस्थ ह^ थ पु?वे3 कC भ!ति अपुना वेना प्रप्त कर रह ह^, इंसजिलए उसकC भतिवेष्या कC आया मांK क4ई हतिना नाहU हdई ह^ । अजिधकरण द्वार उपुचर व्याया क मांद मांK ₹4,807/- थ शर रिरक एवे! मांनाजिसक पु ड़ा, सहयाक एवे! पु`तिlक आहर क मांद मांK ₹40,000/- अथ3m क ल ₹44,807/- कC रतिश मांया वेतिर्ष3क ब्याज क अजिधतिनाणD कC गई, जिजसमांK वेoतिद्ध तिकए जना क तिनावेदना अपु ल मांK तिकया गया ह^ ।
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4. अपु लथD/आह पुक्षे क तिवेद्वाना अजिधवेक्ता क क3 ह^ तिक आह तिवेश्वेनाथ नाम्बि-यार कC द4 अ!गजिलया! पु?ण3p क्षेतिग्रस् हdई हc, जिजसक स!!ध मांK जिजल मांतिर्डकल 4र्ड3, जगदलपुर द्वार प्रदश3 पु -22 क रूपु मांK स्थया तिवेकल!ग प्रमांणपुत्र जर तिकया गया ह^, जिजस तिचतिकत्सक लखाना लल ठक र द्वार प्रमांतिण भ तिकया गया ह^ । आह तिवेश्वेनाथ नाम्बि-यार ना भ अपुना दवे क समांथ3ना मांK सक्ष्या प्रस् तिकया ह^, तिफर भ अजिधकरण द्वार स्थया तिवेकल!ग क मांद मांK क4ई प्रतिकर रतिश तिनाध3रिर नाहU कC गई ह^ । अp भतिवेष्या कC आया कC हतिना क सथ-सथ अन्या मांदf मांK भ याथ4तिच प्रतिकर रतिश मांK वेoतिद्ध कC जए ।
5. मां क! पुना /प्रत्याथD क्रमां!क-2 क तिवेद्वाना अजिधवेक्ता ना अपु ल क तिवेर4ध कर हdए क3 प्रस् तिकया तिक अजिधकरण द्वार अतिभलखा पुर उपुलब्ध मां`जिखाक एवे! दस्वेज सक्ष्या क समांतिच मां?ल्या!कना करना क पुश्च तिवेजिधस-मां तिनाष्कर्ष3 अतिभजिलजिखा तिकया गया ह^ । अपु लथD पुक्षे क क3 स्वे कर तिकए जना या4ग्या नाहU ह^ । अp अपु ल खारिरज कC जए ।
6. उपुम्बिस्थ पुक्षे क क3 श्रीवेण तिकए गए थ अतिभलखा क स?क्ष्मांपु?वे3क पुरिरश लना तिकया गया ।
7.
अतिभलखा पुर प्रस् सक्ष्या क अनासर याह म्बिस्थति स्पुl ह^ तिक तिचतिकत्सक लखाना लल ठक र क कथनानासर अपु लथD क दतिहना हथ कC सर एवे! च`थ अ!गल पु?र रह क्षेतिग्रस् ई गई हc, ज4 कया3 नाहU कर पु रह थU थ सथ ह कलई मांK जकड़ाना भ
आ गई थ । याह भ स्पुl ह4 ह^ तिक उक्ता च4ट क करण अपु लथD, ज4 शसकCया सवे मांK ह^, कC आया मांK क4ई हतिना नाहU हdई ह^ । याह भ स्पुl नाहU ह4 तिक उपुचर क जिलए अपु लथD अस्पुल मांK तिकना तिदनाf क भD रह । थतिपु, तिचतिकत्सक लखाना लल ठक र क कथना स याह म्बिस्थति स्पुl ह^ तिक अपु लथD क दतिहना हथ कC कलई मांK ना क वेल
4 / 5 {MA(C) No. 94 of 2023} जकड़ाना ह^, म्बिल्क उसक हथ कC सर एवे! च`थ अ!गजिलया! कया3 नाहU कर हc थ पु?ण3p क्षेतिग्रस् हc । ऐस दश मांK तिनाम्बिश्च रूपु स अपु लथD क4 भतिवेष्या मांK अपुना द^तिनाक कमांकज मांK असतिवेध ह4ग । भतिवेष्या मांK क छ उपुचर व्याया भ स!भतिवे ह^ थ क छ ऐस व्याया भ ह4 हc, जिजनाक स!!ध मांK उपुचर क द`रना तिल अथवे रस द रखाना स!भवे नाहU ह4 ह^ ।
8. उपुर4क्ता अवेस्थ मांK, ज अपु लथD कC आया मांK क4ई हतिना नाहU हdई ह^, इंसजिलए स्थया
तिवेकल!ग क स!!ध मांK पुoथक रूपु स गणना कर प्रतिकर रतिश प्रदना तिकया जना उतिच नाहU पुया ज । थतिपु, उपुया3क्ता पुरिरम्बिस्थतियाf क4 दृतिlग रखा हdए तिना-नानासर प्रतिकर रतिश तिनाध3रिर कC ज ह^:- क्र! . मांद इंस न्यायालया द्वार अजिधतिनाणD प्रतिकर 1 उपुचर खाच3 क जिलए 5,000 2 शर रिरक एवे! मांनाजिसक पु ड़ा क जिलए 25,000 3 सहयाक एवे! पु`तिlक आहर थ पुरिरवेहना क जिलए 25,000 4 द^तिनाक कमांकज मांK ह4ना वेल असतिवेध क जिलए 50,000 5 भतिवेष्या मांK स!भतिवे उपुचर व्याया क जिलए 15,000 क ल 1,20,000
9.
इंस प्रकर, अजिधकरण द्वार अजिधतिनाणD ₹44,807/- कC लना मांK इंस न्यायालया द्वार क ल ₹1,20,000/- क प्रतिकर तिनाध3रिर तिकया ज ह^ । फलp, दवेक3 ₹75,193/- कC अतिरिरक्ता प्रतिकर रतिश प्रप्त करना क अजिधकर ह^ ।
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10. पुरिरणमांस्वेरूपु, दवेक3 द्वार प्रस् अपु ल आ!तिशक रूपु स स्वे कर कC ज ह^ । अजिधकरण द्वार प्रदत्ती प्रतिकर क अतिरिरक्ता ₹75,193/- दवेक3 प्रप्त करना क अजिधकर ह^ । उक्ता अतिरिरक्ता प्रतिकर रतिश पुर दवे आवेदना तिदना!क स उसक वेस्तिवेक भगना क 6% (छp प्रतिश) वेतिर्ष3क कC दर स ब्याज दया ह4ग थ “प्रश्नाध ना अजिधतिनाण3या” क4 उपुया3क्ता स मां क स!श4जिध तिकया ज ह^ ।
11. रजिजस्टw क4 तिनादxतिश तिकया ज ह^ तिक इंस अपु ल मांK दवेक3 क पुक्षे मांK स्वे कo अतिरिरक्ता प्रतिकर रतिश क स!!ध मांK उस तिवेजिधवेm स?तिच तिकया जए । इंस प्रया4जनाथ3, आवेश्याक ह4ना पुर स!!जिध क्षेत्र, जहy दवेक3 तिनावेस कर ह^, क जिजल तिवेजिधक सवे प्रजिधकरण क सतिचवे क समांन्वेया स पु^रल गल स्वेया!सवेकf कC सहया प्रप्त कC ज सक
ह^ ।
12. तिनाण3या कC प्रति क सथ अजिधकरण क अतिभलखा श घ्रपु?वे3क आवेश्याक कया3वेह ह स?चनाथ3 वे पुलनाथ3 वेपुस प्रतिर्ष ह4 । सह /- (स!जया क मांर जयासवेल) न्यायाध श पो
मन