Research › Search › Judgment
High Court of Chhattisgarh · body
2026 DAILYLAW 39059 (CHH)
SHRIRAM GENERAL INSURANCE COMPANY LIMITED v. SMT. SANTOSHI NIRMALKAR
MAC/2066/2024 · 2026-10-07
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2026
[ 2026 DAILYLAW 39059 (CHH) · dailylaw.ai ]
[ 2026 DAILYLAW 39059 (CHH) · dailylaw.ai ]
Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
1 / 6 {MA(C) No. 2066 of 2024}
CGHC010345992024
2026:CGHC:43679 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिवेतिवेध अपु ल
( प्रतिकर
) क्रमां!क
-2066
/2024
श्री रमां जनरल इं!श्या-र.स क! पुन लिलतिमांटेड, प्रधन कया2लया—ई-8, र क- इं!डस्ट्रि7टे8याल एरिरया, स पुर, जयापुर (रज7थान), द्वार—क्षेत्री या प्र!धक, लिजसक क्षेत्री या कया2लया प्ल@टे न!. 1, चथा2 ल, मांरुति हाइंट्स, 7कई ऑटे- मांरुति ड लर क जG मां., मांहा- जर, आर.क . मां@ल क जG मां., ज .ई. र-ड, रयापुर, लिजल रयापुर, छत्ती सगढ़ । (दो-षी वेहान मां-टेरसइंतिकल क्रमां!क स .ज .-23-एच.-7461 कN मां क! पुन ) -----अपु लथाO तिवेरूद्घ
1. श्री मां स!-षी तिनमां2लकर, पुति 7वेगOया टेक श्वेर तिनमां2लकर, आया लगभग 33 वेषी2,
2. गज.द्र तिनमां2लकर, तिपु 7वेगOया टेक श्वेर तिनमां2लकर, आया लगभग 11 वेषी2,
3. क . नहा तिनमां2लकर, तिपु 7वेगOया टेक श्वेर तिनमां2लकर, आया लगभग 9 वेषी2,
4. श्री मां गयात्री तिनमां2लकर, पुति 7वेगOया रमांधर तिनमां2लकर, आया लगभग 34 वेषी2, सभ तिनवेस तिUवेज चVक, तिW! गश्वेर, लिजल गरिरया!दो, छत्ती सगढ़ । (प्रत्याथाO क्रमां!क 2 वे 3 नलिलग द्वार अपुन नYसतिग2क स!रतिक्षेक मां श्री मां स!-षी तिनमां2लकर, पुति 7वेगOया टेक श्वेर तिनमां2लकर)
------(दोवेक2गण)
5. घनश्यामां ध्रुवे, तिपु नGरमां ध्रुवे, आया लगभग 38 वेषी2, तिनवेस ग्रामां पु-ड़, थान पु!डक, लिजल गरिरया!दो, छत्ती सगढ़ । (दो-षी वेहान मां-टेरसइंतिकल क्रमां!क स .ज .-23-एच.-7461 कN चलक)
6. रूपु क मांर ध्रुवे, तिपु 7वेगOया Gरमां ध्रुवे, आया लगभग 53 वेषी2, तिनवेस वेड2 क्रमां!क 9, स!जया नगर, तिW! गश्वेर, लिजल गरिरया!दो, छत्ती सगढ़ । (दो-षी वेहान मां-टेरसइंतिकल क्रमां!क स .ज .-23-एच.-7461 कN 7वेमां ) -----प्रत्याथाOगण POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.10.09 10:04:51 +0530
2 / 6 {MA(C) No. 2066 of 2024} अपु लथाO/ मां क! पुन द्वार श्री पु .आर. पुटे!कर एवे! श्री प्रवेU सहा`, अलिधवेक्तागण। दोवेक2/प्रत्याथाO क्रमां!क-1 स 4 द्वार श्री रजन्द्र पुटेल, अलिधवेक्ता । चलक-7वेमां /प्रत्याथाO क्रमां!क-5 वे 6 द्वार श्री सरU टेण्डन, अलिधवेक्ता । न्यायामांGति2 श्री स!जया क मांर जयासवेल !! तिनण2या पु ठ पुर पुरिर !! 08/10/2026
1. मां-टेर यान अलिधतिनयामां, 1988 कN धर 173 क अ!ग2 प्र7 इंस अपु ल मां. अतिरिरक्ता मां-टेर दोघ2टेन दोवे अलिधकरण, गरिरया!दो, लिजल-गरिरया!दो (छत्ती सगढ़) द्वार दोवे प्रकरण क्रमां!क 13/2021, “स!-षी वेगYरहा तिवेरुद्ध घनश्यामां ध्रुवे वेगYरहा” मां. पुरिर अलिधतिनण2या तिदोन!क 01/03/2024 क- चनV दो गई हाY, लिजसक हा अपु लथाO- मां क! पुन क तिवेरुद्ध था दोवेक2गण क पुक्षे मां. ₹15,44,200/- कN रतिU क अलिधतिनण2या ब्याज सतिहा पुरिर तिकया गया हाY था उक्ता रतिU क भगन क लिलए अपु लथाO- मां क!
पुन क- उत्तीरदोया ठहारया गया हाY । उक्ता अलिधतिनण2या क- आग स!क्षेपु मां. “प्रश्नध न अलिधतिनण2या” स स!-लिध तिकया ज रहा हाY ।
2. प्रकरण क थ्या, स!क्षेपु मां., इंस प्रकर हाk तिक टेक श्वेर तिनमां2लकर (मांlक) तिदोन!क 09/02/2020 क- प्रm लगभग 09:00 ज मां-टेरसइंतिकल स ज रहा था और सन ल पु-ल्टे8 W@मां2 क पुस पुहाq!च था । उस समांया मां-टेरसइंतिकल क्रमां!क स .ज .-23-एच.- 7461 (लिजस आग स!क्षेपु मां. “दो-षी वेहान” स स!-लिध तिकया ज रहा हाY) क- उसक चलक घनश्यामां ध्रुवे ज गति एवे! लपुरवेहा पुGवे2क चल हाqए आया लिजसकN ठ-कर क Wल7वेरूपु आई ग!भ र च-टेr क करण मांlक क- मांकहार ल जया गया, जहा! उपुचर क दोVरन उसकN मांlत्या हा- गई । उक्ता घटेन क स!!ध मां. थान तिW! गश्वेर, लिजल गरिरया!दो मां. 3 / 6 {MA(C) No. 2066 of 2024} अपुरध क्रमां!क 57/2020, धर 304(क), भर या दोण्ड स!तिहा क अ!ग2 अपुरध पु!ज द्ध तिकया गया था तिवेवेचन उपुर! अतिभया-गपुत्री प्र7 तिकया गया ।
3. मांlक टेक श्वेर तिनमां2लकर कN उक्ता दोघ2टेन मां. मांlत्या क Wल7वेरूपु उसकN पुत्न , दो- स!न एवे! मां द्वार मां-टेर यान अलिधतिनयामां कN धर 166 क अ!ग2 प्रतिकर कN मां!ग कर हाqए दोवे आवेदोन प्र7 तिकया गया । अलिधकरण द्वार याहा पुया गया तिक दो-षी वेहान अपु लथाO- मां क! पुन स तिमां था । सथा हा , याहा भ तिनध2रिर तिकया गया तिक दो-षी
वेहान क चलन मां. मां Us! क क-ई उल्लं!घन नहाu हाqआ हाY । अm अपु लथाO- मां क! पुन क तिवेरुद्ध ₹15,44,200/- कN प्रतिकर रतिU ब्याज सतिहा अलिधतिनणO कN गई । उक्ता तिनष्कषी2 क- अपु लथाO- मां क! पुन द्वार इंस अपु ल मां. चनV दो गई हाY ।
4. अपु लथाO- मां क! पुन क तिवेद्वान अलिधवेक्ता क क2 हाY तिक दोघ2टेन क समांया दो-षी वेहान क वे7तिवेक चलक Uखर ध्रुवे था, लिजसक पुस वेYध चलन अनज्ञतिy नहाu था । इंसक वेजGदो, मां क!
पुन क- उत्तीरदोया ठहारन क उद्देश्या स दो-षी वेहान क चलक क रूपु मां. घनश्यामां ध्रुवे क नमां दोU2या गया था उसक तिवेरुद्ध अतिभया-गपुत्री प्र7 तिकया गया हाY । चG!तिक वे7तिवेक चलक Uखर ध्रुवे क पुस वेYध चलन अनज्ञतिy नहाu था , अm मां Us! क उल्लं!घन हाqआ हाY । ऐस स्ट्रि7थाति मां. अपु लथाO- मां क! पुन तिकस प्रतिकर क भगन क लिलए उत्तीरदोया नहाu हाY । Wलm, अपु ल 7वे कर कर अपु लथाO- मां क! पुन क तिवेरुद्ध पुरिर “प्रश्नध न अलिधतिनण2या” क- अपु7 तिकया जवे. ।
5. दोवेक2/प्रत्याथाO क्रमां!क 1 स 4 क तिवेद्वान अलिधवेक्ता न “प्रश्नध न अलिधतिनण2या” क समांथा2न तिकया हाY ।
4 / 6 {MA(C) No. 2066 of 2024}
6. चलक-7वेमां /प्रत्याथाO क्रमां!क 5 एवे! 6 क तिवेद्वान अलिधवेक्ता न अपु ल क तिवेर-ध कर हाqए क2 प्र7 तिकया तिक अलिधकरण द्वार अतिभलख पुर उपुलब्ध मांVलिखक एवे! दो7वेज सक्ष्या क समांतिच मांGल्या!कन करन क पुश्च तिवेलिधसम्मां तिनष्कषी2 अतिभलिललिख तिकया गया हाY । अपु लथाO- मां क! पुन क क2 7वे कर तिकए जन या-ग्या नहाu हाY । अm अपु ल खरिरज तिकए जन क तिनवेदोन तिकया गया हाY ।
7. उभयापुक्षे क क2 श्रीवेण तिकए गए था अतिभलख क सGक्ष्मांपुGवे2क पुरिरU लन तिकया गया ।
8. प्रकरण मां. दोवेक2 पुक्षे कN ओर स मांlक कN पुत्न स!-षी तिनमां2लकर था मांVक क सक्षे
क रूपु मां. गणU क मांर मांक2 ण्डया क पुर क्षेण करया गया हाY । दोGसर ओर, मां क! पुन कN ओर स उसक तिवेलिध अलिधकर Uभमां यादोवे क पुर क्षेण करया गया हाY । Uभमां यादोवे न दो-षी वेहान क तिमां हा-न 7वे कर तिकया हाY । Uभमां यादोवे न क!
पुन क अन्वेषीक ओमां प्रकU ज-U द्वार Yयार ज!च प्रतिवेदोन प्रदोU2 ड -1 क सथा-सथा अन्या दो7वेज प्रदोU2 ड -5 स प्रदोU2 ड -16 क प्र7 तिकए हाk । उल्लंखन या हाY तिक Uभमां यादोवे न - घटेन क प्रत्याक्षेदोUO हाY और न हा अन्वेषीक ओमां प्रकU ज-U द्वार Yयार ज!च प्रतिवेदोन क- प्र7 अथावे प्रमांतिण करन क लिलए सक्षेमां सक्षे हाY ।
9. अपु लथाO- मां क! पुन कN ओर स याहा आपुलित्ती ल गई हाY तिक दोघ2टेन क समांया दो-षी वेहान क वे7तिवेक चलक Uखर ध्रुवे था, जतिक पुश्चवेO रूपु स घनश्यामां ध्रुवे क- चलक दोU2 हाqए उसक तिवेरुद्ध अतिभया-गपुत्री प्र7 तिकया गया था दोवे आवेदोन पुU तिकया गया । तिक! अतिभलख क पुरिरU लन स 7पुष्ट हाY तिक इंस आUया क क-ई भ अतिभवेचन अपु लथाO-
मां क! पुन द्वार प्र7 जवेदोवे मां. नहाu तिकया गया हाY । इंस प्रकर, अपु लथाO- मां क! पुन क उक्ता क2 तिकस अतिभवेचन पुर आधरिर नहाu हाY । याहा 7थातिपु तिवेलिधक लिसद्ध! 5 / 6 {MA(C) No. 2066 of 2024} हाY तिक प्रत्याक मांमांल मां. अतिभवेचन हा उसक मांमांल क आधर (नuवे) हा- हाY । ऐस
स्ट्रि7थाति मां. अपु लथाO- मां क! पुन द्वार तिन तिकस अतिभवेचन क उक्ता क2 क आधर पुर अपुन पुक्षे रख गया हाY, लिजसक क-ई आधरभG अतिभवेचन अतिभलख पुर उपुलब्ध नहाu हाY ।
10. अपु लथाO- मां क! पुन क याहा भ क2 हाY तिक वे7तिवेक चलक क नमां प्रदोU2 ड -2 क रूपु मां. प्र7 दोYतिनक समांचर पुत्री मां. प्रकतिU हाqआ था और इंस आधर पुर याहा कहा गया हाY तिक दोघ2टेन क समांया दो-षी वेहान क वे7तिवेक चलक Uखर ध्रुवे था । उल्लंखन या हाY तिक दोYतिनक समांचर पुत्री मां. प्रकतिU उक्ता समांचर क स्रो- क्या था, याहा अतिभलख स 7पुष्ट नहाu हा- हाY । न हा ऐस तिकस स्रो- अथावे समांचर उपुलब्ध करन वेल व्यातिक्ता क मां क! पुन कN ओर स पुर क्षेण करया गया हाY । ऐस स्ट्रि7थाति मां. दोYतिनक समांचर पुत्री प्रदोU2 ड - 2 मां.
प्रकतिU समांचर कN तिवेषीयावे7 क क-ई सतिक्षेक मांहात्वे नहाu हाY ।
11. प्रकरण मां. मांVक क सक्षे क रूपु मां. गणU क मांर मांक2 ण्डया क पुर क्षेण दोवेक2 पुक्षे कN ओर स करया गया हाY । याद्यतिपु उसक नमां अतिभया-जन द्वार प्र7 सक्ष्या सGच मां. नहाu हाY, थातिपु गणU क मांर मांक2 ण्डया, ज- ग्रामां तिW! गश्वेर क हा तिनवेस हाY, न मांVक क सक्षे क रूपु मां. घटेन क- दोखन हाqए कहा हाY तिक ज वेहा पु-ल्टे8 W@मां2 स वेपुस जन क लिलए अपुन तिमांत्री कN प्र क्षे कर रहा था, उसन दोघ2टेन हा- हाqए दोख था था दो-षी वेहान क- घनश्यामां चल रहा था । उल्लंखन या हाY तिक पुलिलस द्वार घनश्यामां ध्रुवे क- हा उक्ता दोघ2टेन क लिलए अतिभया-लिज कर हाqए उसक तिवेरुद्ध अतिभया-गपुत्री प्र7 तिकया गया हाY । सथा हा , गणU क मांर मांक2 ण्डया क उक्ता कथान क प्रतिपुर क्षेण मां. प्रभवे रूपु स खण्डन नहाu हा- सक हाY । इंस प्रकर, दोवेक2 पुक्षे कN ओर स दोघ2टेन क समांया दो-षी वेहान क चलक घनश्यामां ध्रुवे क हा-न या गया हाY और पुलिलस द्वार भ उस क तिवेरुद्ध अतिभया-गपुत्री प्र7 तिकया गया हाY । इंसक तिवेपुर , अपु लथाO- मां क! पुन क तिवेलिध
6 / 6 {MA(C) No. 2066 of 2024} अलिधकर Uभमां यादोवे द्वार प्र7 अन्वेषीण प्रतिवेदोन न - उसक द्वार Yयार तिकया गया हाY और न हा वेहा उस Yयार करन वेल अन्वेषीक क 7थान लकर उसकN तिवेषीयावे7 क- प्रमांतिण करन वेल सक्षेमां सक्षे हाY । वेहा 7वेया! घटेन क प्रत्याक्षेदोUO भ नहाu हाY । लिजस समांचर पुत्री क आधर पुर Uखर ध्रुवे क- वे7तिवेक चलक या ज रहा हाY, उसकN तिवेषीयावे7 क भ क-ई सतिक्षेक मांहात्वे नहाu हाY ।
12. इंस प्रकर, उपुर-क्ता तिवेवेचन क आधर पुर याहा न्यायालया पु हाY तिक अपु लथाO- मां क! पुन क क2 7वे कर तिकए जन या-ग्या नहाu हाY । अलिधकरण द्वार पुरिर “प्रश्नध न अलिधतिनण2या” अतिभलख पुर उपुलब्ध मांVलिखक एवे! दो7वेज सक्ष्या क अनरूपु हा-न स उसमां. तिकस हा7क्षेपु कN आवेश्याक नहाu पुया ज । Wल7वेरूपु, अपु ल 7वे कर या-ग्या नहाu हा-न स खरिरज कN ज हाY ।
13.
तिनण2या कN प्रति क सथा अलिधकरण क अतिभलख U घ्रपुGवे2क आवेश्याक कया2वेहा हा सGचनथा2 वे पुलनथा2 वेपुस प्रतिषी हा- । सहा /- (स!जया क मांर जयासवेल) न्यायाध U पो
मन