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High Court of Chhattisgarh · body
2026 DAILYLAW 38924 (CHH)
CHOWA RAM SAHU v. TUMESHWAR KUMAR
MAC/1334/2023 · 2026-10-07
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2026
[ 2026 DAILYLAW 38924 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 5 {MA(C) No. 1334 of 2023}
CGHC010255692023
2026:CGHC:43740 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिवेतिवेध अपु ल
( प्रतिकर
) क्रमां!क
-1334
/2023
च)वेरमां सहू+ तिपु रमांभर)स सहू+, आया लगभग 53 वेर्ष0, ति1वेस ग्रामां उड़े1, पुलिलस था1-अर्जु01 , डाकघर-छ , हूस ल वे लिर्जुल-धमांर , छत्ती सगढ़ । (दो)र्ष वेहू1 ट्रै<=क्ट्रैर क्रमां!क स .र्जु .-05-डाब्ल्याB.-4467 कE स्वेमां ) -----अपु लथाG तिवेरूद्घ
1. ट्रैमांश्वेर क मांर तिपु रूण क मांर र्जु!गड़े, आया लगभग 15 वेर्ष0, 1लिलग द्वार पुलक तिपु श्री रूण क मांर र्जु!गड़े तिपु र्जुगश्वेर र्जु!गड़े, ति1वेस ग्रामां उड़े1, पुलिलस था1- अर्जु01 , डाकघर-छ , हूस ल वे लिर्जुल-धमांर , छत्ती सगढ़ । -----दोवेक0
2. शाखा प्र!धक, या1ईट्रैडा इं!तिडाया इं!श्या)रRस क! पु1 लिलतिमांट्रैडा, शाखा कया0लया-इं!तिडाया1 Sक क ऊपुर, स्र र)डा, धमांर , लिर्जुल-धमांर , छत्ती सगढ़ । (दो)र्ष वेहू1 ट्रै<=क्ट्रैर क्रमां!क स .र्जु .-05-डाब्ल्याB.-4467 कE मां क! पु1 ) -----प्रत्याथाGगण अपु लथाG/स्वेमां द्वार : श्री पुष्पुन्द्र क मांर पुट्रैल, अलिधवेक्ता कE ओर स श्री उत्कर्ष0 पुट्रैल, अलिधवेक्ता । दोवेक0/प्रत्याथाG क्रमां!क-1 द्वार : क)ई उपुस्थिस्था 1हू\ ।
मां क! पु1 /प्रत्याथाG क्रमां!क-2 द्वार : श्री र्जु .व्हू .क . रवे सतिहू सश्री स)1ल क शारवे1 , अलिधवेक्तागण । न्यायामांBति0 श्री स!र्जुया क मांर र्जुयासवेल POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.10.09 15:31:25 +0530
2 / 5 {MA(C) No. 1334 of 2023} !! ति1ण0या पु ठ पुर पुरिर !! 08/10/2026
1. मां)ट्रैर या1 अलिधति1यामां, 1988 कE धर 173 क अ!ग0 प्रस् इंस अपु ल मांR अपुर मां)ट्रैर दोघ0ट्रै1 दोवे अलिधकरण, धमांर , लिर्जुल-धमांर (छत्ती सगढ़) द्वार दोवे प्रकरण क्रमां!क 54/2021, “ट्रैमांश्वेर क मांर वेग=रहू तिवेरुद्ध प्रहूलदो सहू+ वेग=रहू” मांR पुरिर अलिधति1ण0या तिदो1!क 11/04/2023 क) च1g दो गई हू=, लिर्जुस आग स!क्षेपु मांR “प्रश्1ध 1 अलिधति1ण0या” स स!)लिध तिकया र्जु रहू हू= ।
2. प्रकरण क थ्या, स!क्षेपु मांR, इंस प्रकर हूS तिक ट्रैमांश्वेर क मांर (आहू) तिदो1!क 17/01/2020 क) प्रj लगभग 07:00-08:00 र्जु अपु1 च्चk क सथा था । उस
समांया ग)वेध01 सहू+ ट्रै<=क्ट्रैर क्रमां!क स .र्जु .-05-डाब्ल्याB.-4467 (लिर्जुस आग स!क्षेपु मांR
“दो)र्ष वेहू1” स स!)लिध तिकया र्जु रहू हू=) क) र्जु गति एवे! लपुरवेहू पुBवे0क चल हूmए आया, लिर्जुसकE ठ)कर लग1 क फलस्वेरूपु ट्रैमांश्वेर क मांर क ए! पु=र क अ!गBठ क गल वेल अ!गल मांR ग!भ र च)ट्रै आई । तिचतिकत्सक द्वार ऑपुरशा1 कर उक्ता अ!गल क) कट्रैकर अलग कर तिदोया गया । अन्या तिहूस्सk मांR भ च)ट्रैR आई! । कलड़े अस्पुल मांR उसक उपुचर चल, र्जुहू!
वेहू कर 11 तिदो1 क अस्पुल मांR भG रहू । दोघ0ट्रै1 क था1-अर्जु01 , धमांर मांR अपुरध क्रमां!क-164/2020 क अ!ग0 अपुरध पु!र्जु द्ध तिकया गया ।
3. आहू ट्रैमांश्वेर क मांर द्वार मां)ट्रैर या1 अलिधति1यामां कE धर 166 क अ!ग0 प्रतिकर कE मां!ग कर हूmए दोवे आवेदो1 प्रस् तिकया गया । दो)र्ष वेहू1 क चलक ग)वेध01 कE मांpत्या हू) र्जु1 क फलस्वेरूपु उसक तिपु प्रहूलदो सहू+ क) पुक्षेकर क रूपु मांR स!या)लिर्जु कर दोवे
3 / 5 {MA(C) No. 1334 of 2023} आवेदो1 प्रस् तिकया गया । तिवेचरणकल मांR प्रहूलदो सहू+ कE भ मांpत्या हू) र्जु1 स उसक 1मां तिवेल)तिपु तिकया गया । उभयापुक्षे क) स11 क पुश्च अलिधकरण द्वार आहू ट्रैमांश्वेर क मांर क पुक्षे मांR ₹1,62,603/- कE प्रतिकर रतिशा ब्यार्जु सतिहू दो)र्ष वेहू1 क पु!र्जु कp स्वेमां अपु लथाG च)वेरमां सहू+ क तिवेरुद्ध अलिधति1णG कE गई । चल1 अ1ज्ञतिs क अभवे मांR मां शाt! क उल्लं!घ1 मां1 र्जुकर मां क! पु1 क) उत्तीरदोतियात्वे स मांक्ता तिकया गया और आदोतिशा तिकया गया तिक प्रतिकर रतिशा क प्रथामां भग1 मां क! पु1 द्वार तिकया र्जुएग, लिर्जुस मां क! पु1 दो)र्ष वेहू1 क पु!र्जु कp स्वेमां अथा0w अपु लथाG च)वेरमां सहू+ स वेसBल कर सक ग । उक्ता ति1ष्कर्ष0 क) अपु लथाG च)वेरमां सहू+ द्वार इंस अपु ल मांR च1g दो गई हू= ।
4. अपु लथाG पुक्षे क तिवेद्वा1 अलिधवेक्ता क क0 हू= तिक दोघ0ट्रै1 क समांया दो)र्ष वेहू1 क चलक ग)वेध01 सहू+ 1हू\, स्थिल्क अपु लथाG क पुत्र दोवेन्द्र था और इंस उन्हूk1 अपु1 र्जुवेदोवे मांR स्पुष्ट अतिभवेच1 तिकया हू=, दोवेन्द्र क कथा1 करया हू= तिफर भ अलिधकरण द्वार उ1क उक्ता अतिभवेच1 एवे! सक्ष्या क) मांन्या 1 कर हूmए ग)वेध01 सहू+ क) चलक मां1कर त्रतिट्रैपुBण0 ति1ष्कर्ष0 अ!तिक तिकया हू= । चलक दोवेन्द्र क पुस वे=ध चलक अ1ज्ञतिs था । तिकस
प्रकर क मां शाt! क उल्लं!घ1 1हू\ हूmआ हू= । अj मां क! पु1 पुBण0j उत्तीरदोया हू= । फलj, अपु ल स्वे कर कर उ1क तिवेरुद्ध पुरिर “प्रश्1ध 1 अलिधति1ण0या” क) अपुस् तिकया र्जुए ।
5. मां क!
पु1 /प्रत्याथाG क्रमां!क-2 क तिवेद्वा1 अलिधवेक्ता 1 अपु ल क तिवेर)ध कर हूmए क0 प्रस् तिकया तिक अलिधकरण द्वार अतिभलखा पुर उपुलब्ध मांgलिखाक एवे! दोस्वेर्जु सक्ष्या क समांतिच मांBल्या!क1 कर1 क पुश्च तिवेलिधसम्मां ति1ष्कर्ष0 अतिभलिललिखा तिकया गया हू= । अपु लथाG पुक्षे क क0 स्वे कर तिकए र्जु1 या)ग्या 1हू\ हू= । अj अपु ल खारिरर्जु कE र्जुए ।
4 / 5 {MA(C) No. 1334 of 2023}
6. उपुस्थिस्था पुक्षे क क0 श्रीवेण तिकए गए था अतिभलखा क सBक्ष्मांपुBवे0क पुरिरशा ल1 तिकया गया।
7. मांमांल मांR आहू ट्रैमांश्वेर क मांर र्जु!गड़े 1 अपु1 न्यायालया 1 सक्ष्या मांR स्पुष्ट रूपु स कथा1 तिकया हू= तिक दोघ0ट्रै1 क समांया दो)र्ष वेहू1 क) ग)वेध01 सहू+ चल रहू था, लिर्जुसक सक्ष्या मांR खाण्डा1 1हू\ हूmआ हू= । उभयापुक्षे 1 याहू स्थिस्थाति स्वे कर कE हू= तिक ग)वेध01 कE मांpत्या हू) चकE हू=, इंसलिलए पुलिलस द्वार अतिभया)गपुत्र क र्जुया खात्मां पुशा तिकया गया था । याहू भ स्वे कp थ्या हू= तिक ग)वेध01 सहू+ कE मांpत्या हू)1 क फलस्वेरूपु दोवे आवेदो1 मांR उसक तिपु प्रहूलदो सहू+ क) पुक्षेकर क रूपु मांR स!या)लिर्जु तिकया गया था, तिक! तिवेचरणकल मांR प्रहूलदो सहू+ कE भ मांpत्या हू) र्जु1 स उसक 1मां तिवेल)तिपु कर तिदोया गया । ट्रैमांश्वेर क मांर क कथा1 क समांथा01 अतिभलखा मांR प्रस् पुलिलस दोस्वेर्जु प्रदोशा0 पु -1 स पु -6 स भ हू) हू= । प्रदोशा0 पु -6, तिगरफ्र पुत्र क अ1सर, मांमांल मांR ग)वेध01 सहू+ कE तिगरफ्र कE गई था । इंस प्रकर, दोवेक0 पुक्षे कE ओर स इंस स्पुष्ट एवे! तिवेश्वेस1 या सक्ष्या उपुलब्ध हू= तिक दोघ0ट्रै1 क समांया दो)र्ष वेहू1 क चलक ग)वेध01 सहू+ था ।
8. दोBसर ओर, दो)र्ष वेहू1 क पु!र्जु कp स्वेमां च)वेरमां सहू+ 1 याहू अतिभवेच1 तिकया हू= तिक दोघ0ट्रै1 क समांया चलक ग)वेध01 सहू+ 1हू\, स्थिल्क दोवेन्द्र था । अपु1 उक्ता अतिभवेच1 क) प्रमांतिण कर1 क वेस् दोवेन्द्र क मांर क पुर क्षेण करया गया हू=, तिक!
उल्लंखा1 या रूपु स दोवेन्द्र अथावे उसक तिपु अपु लथाG च)वेरमां सहू+ 1 इंस पुलिलस मांR तिकस प्रकर कE क)ई तिशाकया कभ 1हू\ कE, तिक दो)र्ष वेहू1 क चलक क रूपु मांR ग)वेध01 सहू+ क 1मां त्रतिट्रैपुBवे0क दोशा0या गया हू) । दो)र्ष वेहू1 क पु!र्जु कp स्वेमां हू)1 क 1 अपु लथाG च)वेरमां क याहू दोतियात्वे था तिक यातिदो दोघ0ट्रै1 क समांया चलक दोवेन्द्र था, ) वेहू पुलिलस क)
5 / 5 {MA(C) No. 1334 of 2023} वेस्स्थिस्थाति स अवेग कर, र्जु) च)वेरमां द्वार 1हू\ तिकया गया हू= । ऐस दोशा मांR, दोवेन्द्र द्वार याहू कथा1 कर1 तिक दोघ0ट्रै1 क समांया वेहू दो)र्ष वेहू1 क चल1 कर रहू था, स्वेभतिवेक एवे! तिवेश्वेस1 या प्र 1हू\ हू) । अj उक्ता कथा1 पुर भर)स तिकया र्जु1 उतिच 1हू\ हू= ।
9. इंस प्रकर, उपुर)क्ता तिवेवेच1 एवे! अतिभलखा पुर उपुलब्ध सक्ष्या क समांग्रा पुरिरशा ल1 क आधर पुर याहू न्यायालया पु हू= तिक अपु लथाG पुक्षे क याहू क0 तिक दोघ0ट्रै1 क समांया दो)र्ष
वेहू1 क चलक दोवेन्द्र था, स्वे कर तिकए र्जु1 या)ग्या 1हू\ हू= । अलिधकरण द्वार “प्रश्1ध 1 अलिधति1ण0या” मांR ग)वेध01 सहू+ क) दो)र्ष वेहू1 क चलक मां1 हूmए अतिभलिललिखा ति1ष्कर्ष0 अतिभलखा पुर उपुलब्ध मांgलिखाक एवे! दोस्वेर्जु सक्ष्या क अ1रूपु हू= । अj उसमांR तिकस
हूस्क्षेपु कE आवेश्याक 1हू\ पुया र्जु हू= । फलस्वेरूपु, अपु ल स्वे कर तिकए र्जु1 या)ग्या 1हू\ हू)1 स खारिरर्जु कE र्जु हू= ।
10. ति1ण0या कE प्रति क सथा अलिधकरण क अतिभलखा शा घ्रपुBवे0क आवेश्याक कया0वेहू हू सBच1था0 वे पुल1था0 वेपुस प्रतिर्ष हू) । सहू /- (स!र्जुया क मांर र्जुयासवेल) न्यायाध शा पो
मन