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High Court of Chhattisgarh · body

2026 DAILYLAW 3816 (CHH)

SAFIQ AHMAD v. STATE OF CHHATTISGARH

CRA/434/2026 · 2026-04-09

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 5 (Cr. A. No.-434 of 2026) 2026:CGHC:16603 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दाण्डिक अपु ल क्रमां"क -434 /2026  सफी+क अहमांदा तिपु-रफी+क अहमांदा, उम्र-लगभग 49 वेर्ष1, ति2वेस -क" च2पुर, वे1 स"ख्या-14, सक्ती+, पुलिलस था2-सक्ती+, लि8ल-सक्ती+, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा9/अतिभयाक्ती तिवेरूद्घ 1. छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार था2 प्रभर , पुलिलस था2-सक्ती+, लि8ल-सक्ती+, छत्ती सगढ़ (रज्या) 2. धमांAन्द्र लिस"ह तिपु-सरन्द्र हदार लिस"ह, उम्र-लगभग 32 वेर्ष1, ति2वेस -हरिरग8र मांहल, सक्ती+, लि8ल-सक्ती+, छत्ती सगढ़ (प्रथा9) -----उत्तीरवेदा गण अपु लथा9/अतिभयाक्ती द्वार : Fक्टर अरहमां लिसद्दी क+, अलिधवेक्ती । रज्या/उत्तीरवेदा क्रमां"क-1 द्वार : श्री र8क मांर सहL, पुM2ल अलिधवेक्ती । प्रथा9/उत्तीरवेदा क्रमां"क-2 द्वार : श्री हमांन् गप्ता, अलिधवेक्ती । न्यायामांOति1 श्री स"8या क मांर 8यासवेल !! आदाश पु ठ पुर पुरिर !! 10/04/2026 1. अपु ल क+ ग्राह्य पुर उभयापुक्ष क क1 श्रीवेण तिकए गए । POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.04.10 17:35:57 +0530 2 / 5 (Cr. A. No.-434 of 2026) 2. धर 14(क)( ) i अ2सOतिच 8ति एवे" अ2सOतिच 828ति (अत्याचर ति2वेरण) अलिधति2यामां, 1989 (लि8स आग स"क्षपु मांZ "तिवेशर्ष अलिधति2यामां" कह गया हM) क अ"ग1 प्रस् इस अपु ल मांZ तिवेचरण न्यायालया-तिवेशर्ष न्यायाध श (तिवेशर्ष अलिधति2यामां), 8"8ग र चम्पु, छत्ती सगढ़ द्वार तिवेशर्ष सत्र प्रकरण क्रमां"क-37/2025 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घ सफी+क अहमांदा” मांZ तिदा2"क-05/12/2025 कd अपु लथा9 पुर तिवेरतिच आरdपु पुत्र अ"ग1 धर-296, 351(3), 115(2) भर या न्याया स"तिह, 2023 था तिवेशर्ष अलिधति2यामां क+ धर-3(1)(दा), 3(1)(ध), 3(2)(vक) कd च2e दा गई हM । उक्ती आदाश कd आग स"क्षपु मांZ “प्रश्2ध 2 आदाश” स स"dलिध तिकया 8 रह हM । 3. अपु लथा9/अतिभयाक्ती क तिवेद्वा2 अलिधवेक्ती क क1 हM तिक प्रकरण क प्रथा9 धमांAन्द्र लिस"ह, 8d र8 सरन्द्र हदार लिस"ह क दात्तीक पुत्र हM, क 2मां पुर अ2सOतिच 828ति क 8ति प्रमांणपुत्र सरन्द्र हदार लिस"ह क+ 8ति क आधर पुर 8र तिकया गया हM और उस आधर पुर पुलिलस द्वार धमांAन्द्र लिस"ह क+ सOच2 पुर तिदा2"क 24/04/2025 क+ घट2 क स""ध मांZ अपु लथा9/अतिभयाक्ती क तिवेरुद्ध अपुरध क्रमां"क 131/2025, तिदा2"क 24/04/2025 कd पु"8 द्ध तिकया गया हM । याह भ क1 प्रस् तिकया गया हM तिक प्रथा9 धमांAन्द्र लिस"ह स्वेया" उक्ती 8ति क सदास्या 2हl हM, ण्डिmक दात्तीक पुत्र हd2 क करण सरन्द्र हदार लिस"ह क+ 8ति क आधर पुर उसक पुक्ष मांZ 8ति प्रमांणपुत्र 8र तिकया गया हM था उभयापुक्ष क मांध्या पुOवे1 स भOतिमां स""ध तिवेवेदा भ चल रह हM । अo वे1मां2 प्रकरण मांZ तिवेशर्ष अलिधति2यामां क प्रवेध2 आकतिर्ष1 2हl हd हp । इस प्रकर, तिवेशर्ष अलिधति2यामां क अ"ग1 तिवेरतिच आरdपु तिवेलिधसम्मां 2हl हd2 स ण्डिस्थार रखे 82 याdग्या 2हl हp । अo अपु ल स्वे कर कर अपु लथा9/अतिभयाक्ती कd तिवेशर्ष अलिधति2यामां क आरdपुs स उन्मांक्ती तिकया 8ए । तिवेद्वा2 अलिधवेक्ती द्वार अपु2 क1 क समांथा12 मांZ ति2म्2लिललिखे न्यायादृष्टां"s क हवेल तिदाया गया हM- 3 / 5 (Cr. A. No.-434 of 2026) .I Masumsha Hasanasha Musalman v. State of Maharashtra, reported in AIR 2000 SC 1786, II. Dinesh alias Buddha v. State of Rajasthan, reported in AIR 2006 SC 1267, III. Amir v. State of Madhya Pradesh, 2004 Cri.L.J. 3686, & IV. Mekala Raji Reddy v. State of Andhra Pradesh, 2002 Cr.L.J. 3407. 4. उत्तीरवेदा /रज्या था प्रथा9 पुक्ष क तिवेद्वा2 अलिधवेक्तीगण क क1 हM तिक आरdपु क स्र पुर प्रथामां सOच2 पुत्र एवे" अतिभयाdगपुत्र क आधर पुर ह याह दाखे 82 हd हM तिक प्रथामांदृष्टांया अपुरध 2 हM या 2हl । प्रथामां सOच2 पुत्र स याह पुरिरलतिक्ष हd हM तिक तिवेशर्ष अलिधति2यामां क अ"ग1 अपु लथा9/अतिभयाक्ती क तिवेरुद्ध अपुरध पु"8 द्ध तिकया गया हM । याह भ क1 प्रस् तिकया गया हM तिक लि8स 8ति प्रमांणपुत्र क+ 8प्ता क+ गई हM, उसमांZ प्रथा9 धमांAन्द्र लिस"ह क मांOल तिपु क रूपु मांZ ध2श्वेर लिस"ह क उल्लेखे हM था ध2श्वेर लिस"ह स्वेया" उस 8ति तिवेशर्ष क सदास्या हM । अo अतिभलखे मांZ उपुलब्ध समांग्रा स प्रथामांदृष्टांया अपु लथा9/ अतिभयाक्ती क तिवेरुद्ध तिवेशर्ष अलिधति2यामां क अ"ग1 अपुरध ति2तिमां1 हd हM । अo तिवेचरण न्यायालया द्वार पुरिर “प्रश्2ध 2 आदाश” उतिच एवे" तिवेलिधसम्मां हM, लि8समांZ तिकस प्रकर क हस्क्षपु क+ आवेश्याक 2हl हM । अo प्रस् अपु ल खेरिर8 तिकया 8ए । 5. मां22 या सवेxच्च न्यायालया द्वार State of Rajasthan v. Fatehkaran Mehdu, AIR 2017 SC 796 मांZ याह तिवेलिध स्थातिपु क+ गई हM तिक आरdपु ति2ध1रण क चरण पुर न्यायालया आरdपुs क सत्यापु2 अथावे अ"तिमां प्रमांतिणक क पुर क्षण 2हl कर, अतिपु अतिभलखे पुर उपुलब्ध समांग्रा क आधर पुर याह तिवेचर कर हM तिक क्या अतिभयाक्ती द्वार अपुरध तिकए 82 क प्रल स"दाह उत्पुन्न हd हM । यातिदा उपुलब्ध समांग्रा स ऐस सशक्ती स"दाह पुरिरलतिक्ष हd हM, 8d तिवेचरणdपुर" दाdर्षलिसतिद्ध क+ तिदाश मांZ अग्रासर हd सक हM, d 4 / 5 (Cr. A. No.-434 of 2026) आरdपु ति2ध1रण तिवेलिधसम्मां हdग । आरdपु ति2ध1रण क+ अवेस्था दाdर्षलिसतिद्ध क अ"तिमां पुर क्षण क+ अवेस्था 2हl हM । 6. इस प्रकर, State of M.P. v. Deepak, (2019) 13 SCC 62 मांZ मां22 या सवेxच्च न्यायालया 2 धर 397 दा प्रतिक्रया स"तिह क अ"ग1 हस्क्षपु क+ पुरिरलिध स्पुष्टां कर ह{ए प्रतिपुतिदा तिकया हM तिक आरdपु ति2ध1रण क स्र पुर न्यायालया कd क वेल याह पुर क्षण कर2 हd हM तिक क्या अतिभयाक्ती क तिवेरुद्ध अपुरध तिकए 82 क अ2मां2 कर2 ह पुया1प्ता आधर तिवेद्यमां2 हM । इस चरण पुर न्यायालया सक्ष्याs क गण-दाdर्ष क आधर पुर मांOmया"क2 2हl कर और 2 ह याह ति2ष्कर्ष1 ति2कल हM तिक अतिभललिखे सक्ष्या दाdर्षलिसतिद्ध क लिलए पुया1प्ता हsग या 2हl । लि8सक+ कण्डिक-16 ति2म्22सर हMo- “16. It was also noted that at the stage of framing of charges, the Court has to consider the material only with a view to find out if there is a ground for “presuming” that the accused had committed the offence : ( Chitresh Kumar Chopra case [ Chitresh Kumar Chopra v. State (NCT of Delhi), (2009) 16 SCC 605 : (2010) 3 SCC (Cri) 367] , SCC p. 613, para 25) “ 25. It is trite that at the stage of framing of charge, the court is required to evaluate the material and documents on record with a view to finding out if the facts emerging therefrom, taken at their face value, disclose the existence of all the ingredients constituting the alleged offence or offences. For this limited purpose, the court may sift the evidence as it cannot be expected even at the initial stage to accept as gospel truth all that the prosecution states. At this stage, the court has to consider the material only with a view to find out if there is ground for “presuming” that the accused has committed an offence and not for the purpose of arriving at the conclusion that it is not likely to lead to a conviction.” 5 / 5 (Cr. A. No.-434 of 2026) 7. मां22 या सवेxच्च न्यायालया द्वार State (NCT of Delhi) v. Shiv Charan Bansal and Others, (2020) 2 SCC 290 मांZ याह पु2o स्पुष्टां तिकया गया हM तिक आरdपु ति2ध1रण क चरण पुर तिवेचरण न्यायालया द्वार सक्ष्याs क सOक्ष्मां एवे" तिवेस्~ तिवेश्लर्षण या व्यापुक पुर क्षण तिकया 82 अपुतिक्ष 2हl हM । थातिपु, न्यायालया कd याह अलिधकर हM तिक वेह उपुलब्ध समांग्रा क स तिमां पुर क्षण कर याह सति2ण्डिश्च कर तिक अतिभयाक्ती क तिवेरुद्ध तिवेचरण प्रर"भ कर2 ह प्रथामांदृष्टांया मांमांल स्थातिपु हd हM या 2हl । 8. उपुरdक्ती न्यायादृष्टां"s क प्रकश मांZ, चO€तिक प्रथामां सOच2 पुत्र, तिवेशर्ष अलिधति2यामां क ह पु"8 द्ध ह{आ हM था स"पुOण1 अतिभयाdगपुत्र क पुरिरश ल2 स याह भ पुरिरलतिक्ष हd हM तिक तिवेशर्ष अलिधति2यामां क अ"ग1 तिवेरतिच आरdपु प्रथामांदृष्टांया पुए 8 हp । 8ह€ क अपु लथा9 पुक्ष क क1 क प्रश्2 हM, वेह चवे क तिवेर्षया हM था 8ति प्रमांणपुत्र कd भ तिवेचरण क दाeर2 च2e दा 8 सक हM । 9. इस प्रकर, उपुरdक्ती न्यायादृष्टां"s था अतिभलखे मांZ उपुलब्ध समांस् थ्या एवे" पुरिरण्डिस्थातियाs कd दृतिष्टांग रखे ह{ए, तिवेचरण न्यायालया द्वार पुरिर "प्रश्2ध 2 आदाश" मांZ कdई अवेMध अथावे अशद्घ पुरिरलतिक्ष 2हl हd हM । अo उसमांZ हस्क्षपु तिकए 82 क+ आवेश्याक 2हl पुई 8 । अo याह यातिचक प्रर"तिभक स्र पुर खेरिर8 क+ 8 हM । 10. रलि8स्ट‚ कd ति2दाAतिश तिकया 8 हM तिक इस आदाश क+ प्रति याथाश घ्र तिवेचरण न्यायालया कd सOच2था1 प्रतिर्ष तिकया 8ए । सह /- (स"8या क मांर 8यासवेल) न्यायाध श पो मन