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High Court of Chhattisgarh · body

2026 DAILYLAW 37981 (CHH)

NATIONAL INSURANCE COMPANY LIMITED v. SMT. KUWARIYA BAI SAHU

MAC/188/2025 · 2026-09-28

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 6 {MA(C) No. 188 of 2025} CGHC010001062025 2026:CGHC:42373 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर तिवेतिवेध अपु ल ( प्रतिकर ) क्रमां!क -188 /2025  नेशनेल इं!श्या-र.स क! पुने लिलतिमांटेड, द्वार प्रभाग या प्र!धक, प्रभाग या कया4लया, ललग!ग श5तिपु!ग मां5ल क जू7, जू .ई. र-ड, रयापुर, लिजूल-रयापुर (छत्ती सगढ़) (दो-षी वेहने मां-टेरसइंतिकल क्रमां!क-स .जू .-08-ए.एच.-0896 क मां क! पुने ) -----अपु लर्थीA तिवेरूद्घ 1. श्री मां क वेरिरया ई सहF, पुति स्वेगAया गनेपुरमां सहF, आया लगभाग 55 वेषी4, तिनेवेस ग्रामां-भागवेने टे-ल, र्थीने-गनेदो , लिजूल-रजूने!दोग!वे (छत्ती सगढ़) -------(दोवेक4) 2. धश्वेर सहF (मांJ) (दो-षी वेहने मां-टेरसइंतिकल क्रमां!क-स .जू .-08-ए.एच.-0896 क पु!जू कJ स्वेमां ) द्वार- तिवेलिधक वेरिरसने (मांनेने या न्यायालया क आदोश तिदोने!क 23-09-2025 क अनेसर) 2.1 गणेश्वेर सहF, पुत्ने स्वेगAया धश्वेर सहF, आया लगभाग 30 वेषी4, 2.2 रुद्र क मांर सहF, तिपु स्वेगAया धश्वेर सहF, आया लगभाग 9 वेषी4, 2.3 रिरतिक सहF, पुत्री स्वेगAया धश्वेर सहF, आया लगभाग 7 वेषी4, 2.4 ऋषीभा सहF, पुत्री स्वेगAया धश्वेर सहF, आया लगभाग 5 वेषी4, 2.2 स 2.4 नेलिलग, द्वार अपुने मां गणेश्वेर सहF, सभा तिनेवेस ग्रामां- भागवेनेटे-ल, पुलिलस र्थीने-गनेदो , लिजूल-रजूने!दोग!वे (छत्ती सगढ़) -----प्रत्यार्थीAगणे POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.09.30 10:32:02 +0530 2 / 6 {MA(C) No. 188 of 2025} अपु लर्थीA मां क! पुने द्वार : श्री दोशरर्थी गप्ता, अलिधवेक्ता । दोवेक4/प्रत्यार्थीA क्रमां!क-1 द्वार : सश्री प्रचA लिस!ह, अलिधवेक्ता । प्रत्यार्थीA क्रमां!क-2.1 स 2.4 द्वार : क-ई उपुस्थिस्र्थी नेहY । न्यायामां7ति4 श्री स!जूया क मांर जूयासवेल !! तिनेणे4या पु ठ पुर पुरिर !! 29/09/2026 1. मां-टेर याने अलिधतिनेयामां, 1988 क\ धर 173 क अ!ग4 प्रस् इंस अपु ल मां. सप्तामां मां-टेर दोर्घ4टेने दोवे अलिधकरणे, रयापुर, लिजूल-रयापुर (छत्ती सगढ़) द्वार दोवे प्रकरणे क्रमां!क 511/2020, “श्री मां क वेरिरया ई सहF तिवेरुद्ध धश्वेर सहF वेग`रह” मां. पुरिर अलिधतिनेणे4या तिदोने!क 30/09/2024 क- चनेb दो गई ह` । लिजूस आग स!क्षेपु मां. “प्रश्नेध ने अलिधतिनेणे4या” स स!-लिध तिकया जू रह ह` । 2. प्रकरणे क थ्या, स!क्षेपु मां., इंस प्रकर हe तिक मांJक दो नेदोयाल सहF अपुने भाई धश्वेर सहF क स्वेतिमांत्वे वेल मां-टेरसइंतिकल क्रमां!क-स .जू .-08-ए.एच.-0896 (लिजूस आग स!क्षेपु मां. “दो-षी वेहने” स स!-लिध तिकया जू रह ह`) मां. तिदोने!क-18/02/2020 क- धश्वेर क कया4 स जू रह र्थी । इंस दोbरने ल-ह पुलिलया र्घ-रल क पुस “दो-षी वेहने” क\ दोर्घ4टेने ह- गई, लिजूसमां. ग!भा र च-टे. आने क करणे दो नेदोयाल सहF क\ मांJत्या ह- गई । उक्ता र्घटेने क स!!ध मां. र्थीने-गनेदो , रजूने!दोग!वे, छत्ती सगढ़ मां. अपुरध क्रमां!क 10/2020 पु!जू द्ध तिकया गया । 3. मांJक दो नेदोयाल सहF क\ दोर्घ4टेने मां. मांJत्या क फलस्वेरूपु उसक\ मांg श्री मां क वेरिरया ई सहF द्वार मां-टेर याने अलिधतिनेयामां, 1988 क\ धर 164 क अ!ग4 प्रतिकर ह दोवे 3 / 6 {MA(C) No. 188 of 2025} आवेदोने प्रस् तिकया गया । उक्ता दोवे आवेदोने पुर जू!च उपुर! अलिधकरणे द्वार दोवे प्रमांतिणे पुए जूने पुर मांJक दो नेदोयाल सहF क\ मांg श्री मां क वेरिरया ई सहF क पुक्षे मां. र्थी अपु लर्थीA मां क! पुने क तिवेरुद्ध ₹5,75,000/- क अलिधतिनेणे4या, 9% वेतिषी4क ब्याजू सतिह, पुरिर तिकया गया । उक्ता अलिधतिनेणे4या क- अपु लर्थीA मां क! पुने द्वार इंस अपु ल मां. चनेb दो गई ह` । 4. अपु लर्थीA- मां क! पुने क तिवेद्वाने अलिधवेक्ता क क4 ह` तिक मांJक दो नेदोयाल सहF स्वेया! “दो-षी वेहने” क चलक र्थी, लिजूसक स्वेमां उसक सग भाई धश्वेर सहF र्थी । ऐस स्थिस्र्थीति मां., जू दोर्घ4टेने मां. क-ई अन्या वेहने शतिमांल नेहY र्थी र्थी मांJक उक्ता “दो-षी वेहने” क स!!ध मां. J या पुक्षे नेहY र्थी और मांJक क जू-लिmमां क लिलए क-ई प्र तिमांयामां भा अदो नेहY तिकया गया र्थी, अपु लर्थीA- मां क! पुने क- प्रतिकर रतिश क भागने ह उत्तीरदोया ठहरया जूने त्रीतिटेपु7णे4 ह` । अn अपु ल स्वे कर कर अपु लर्थीA- मां क! पुने क- उक्ता दोतियात्वे स उन्मां-तिच तिकया जूए । 5. इंसक तिवेपुर , दोवेक4/प्रत्यार्थीA क्रमां!क-1 क तिवेद्वाने अलिधवेक्ता ने प्रति-आक्षेपु अपु ल प्रस् कर हoए क4 तिकया ह` तिक उन्हpने याह प्रमांतिणे तिकया ह` तिक मांJक दो नेदोयाल सहF, “दो-षी वेहने” क स्वेमां धश्वेर सहF क तिनेया-जूने मां. कया4 कर र्थी और दोर्घ4टेने क समांया उस क कया4 स जू रह र्थी । ऐस स्थिस्र्थीति मां. अपु लर्थीA- मां क! पुने प्रतिकर रतिश क भागने ह उत्तीरदोया ह` । प्रतिकर रतिश क आ!कलने भा कमां तिकया गया ह` । अलिधकरणे द्वार अतिभालm पुर उपुलब्ध मांbलिmक एवे! दोस्वेजू सक्ष्या क समांतिच मां7ल्या!कने कर हoए तिवेलिधसम्मां तिनेष्कषी4 अतिभालिललिm तिकया गया ह` । अपु लर्थीA- मां क! पुने क क4 स्वे कर तिकए जूने या-ग्या नेहY ह` । अn अपु ल mरिरजू क\ जूए । 4 / 6 {MA(C) No. 188 of 2025} 6. उभायापुक्षे क क4 श्रीवेणे तिकए गए र्थी अतिभालm क स7क्ष्मांपु7वे4क पुरिरश लने तिकया गया । 7. याह थ्या अतिवेवेतिदो ह` तिक दोर्घ4टेने तिदोने!क-18/02/2020 क- हoई र्थी र्थी मां-टेर याने अलिधतिनेयामां, 1988 क\ धर 164 क अ!ग4 दोवे आवेदोने प्रस् तिकया गया र्थी । मां-टेर याने अलिधतिनेयामां क\ अनेस7च - II मां. वेषी4 2018 मां. तिकए गए स!श-धने क अनेसर, प्रतिकर क\ रतिश ₹5 लm स अलिधक नेहY ह- सक । ऐस स्थिस्र्थीति मां., अलिधकरणे द्वार ₹5,75,000/- क अलिधतिनेणे4या पुरिर तिकया गया ह` । अn दोवेक4 पुक्षे द्वार प्रस् प्रति-आक्षेपु, जू- मांख्याn प्रतिकर क\ रतिश ढ़ए जूने स स!!लिध ह`, स्वे कर तिकए जूने या-ग्या नेहY पुया जू । फलn प्रति-आक्षेपु mरिरजू तिकया जू ह` । 8. जूहg क, अपु लर्थीA- मां क! पुने क क4 क प्रश्ने ह`? इंस स!!ध मां. याह थ्या अतिवेवेतिदो ह` तिक मांJक स्वेया! “दो-षी वेहने” क चलक र्थी । अn याह तिवेचरणे या ह` तिक ऐस स्थिस्र्थीति मां. क्या अपु लर्थीA- मां क! पुने क- प्रतिकर रतिश क भागने ह उत्तीरदोया ठहरया जू सक ह` । 9. मांनेने या उच्चमां न्यायालया द्वार न्यायादृष्टां! Ramkhiladi and another vs. United India Insurance Company and another, (2020) 2 SCC 550 क प्रकरणे मां., न्यायादृष्टां! Ningamma v. United India Insurance Co. Ltd., (2009) 13 SCC 710 क अपुने पु7वे4 तिनेणे4या पुर भार-स कर हoए स्पुष्टां रूपु स अतिभातिनेध4रिर तिकया गया ह` तिक अलिधतिनेयामां क\ धर 163-क (वे4मांने मां. स!श-लिध धर 164) क प्रवेधने उस दोर्घ4टेने क मांमांल मां. लग7 नेहY ह-, लिजूसमां. मां-टेर वेहने क स्वेमां स्वेया! दोर्घ4टेने मां. शतिमांल ह- । इंस स!!ध मां. तिनेणे4या क\ कस्थि{डक 9.4 प्रस!तिगक ह`, जू- तिक तिनेम्नेनेसर ह`: “9.4. An identical question came to be considered by this Court in Nigamma. In that case, the 5 / 6 {MA(C) No. 188 of 2025} deceased was driving a motorcycle which was borrowed from its real owner and met with an accident by dashing against a bullock cart i.e. without involving any other vehicle. The claim petition was filed under Section 163-A of the Act by the legal representatives of the deceased against the real owner of the motorcycle which was being driven by the deceased. To that, this Court has observed and held that since the deceased has stepped into the shoes of the owner of the vehicle, Section 163-A of the Act cannot apply wherein the owner of the vehicle himself is involved. Consequently, it was held that the legal representatives of the deceased could not have claimed the compensation under Section 163-A of the Act. Therefore, as such in the present case, the claimants could have even claimed the compensation and/or filed the claim petition under Section 163-A of the Act against the driver, owner and insurance company of the offending vehicle i.e. motorcycle bearing Registration No. RJ 29 2M 9223, being a third party with respect to the offending vehicle. However, no claim under Section 163-A was filed against the driver, owner and/or insurance company of the motorcycle bearing Registration No. RJ 29 2M 9223. It is an admitted position that the claim under Section 163-A of the Act was only against the owner and the insurance company of the motorcycle bearing Registration No. RJ 02 SA 7811 which was borrowed by the deceased from the opponent-owner Bhagwan Sahay. Therefore, applying the law laid down by this Court in Ningamma and as the deceased has stepped into the shoes of the owner of the vehicle bearing Registration No. RJ 02 SA 7811, as rightly held by the High Court, the claim petition under Section 163-A of the Act against the owner and insurance company of the vehicle bearing Registration No. RJ 02 SA 7811 shall not be maintainable.” 10. उपुर-क्ता न्यायादृष्टां! स याह स्पुष्टां ह` तिक जू मांJक स्वेया! उस वेहने क चलक र्थी, लिजूसक दोर्घ4टेने मां. सस्थिम्मांलिल ह-ने प्रश्नेग ह`, वेह उस वेहने क स्वेमां क स्र्थीने पुर आ जू 6 / 6 {MA(C) No. 188 of 2025} ह` । वे4मांने मांमांल मां. “दो-षी वेहने” क स्वेमां मांJक क सग भाई धश्वेर सहF ह` र्थी मांJक स्वेया! उक्ता “दो-षी वेहने” चल रह र्थी । अn क वेल इंस आधर पुर तिक मांJक “दो-षी वेहने” क स्वेमां क तिनेया-जूने मां. कया4 कर रह र्थी, उस उक्ता वेहने क स!!ध मां. J या पुक्षे नेहY मांने जू सक । 11. इंसक अतिरिरक्ता, अतिभालm स याह भा स्पुष्टां ह` तिक मांJक क जू-लिmमां क स!!ध मां. मां क! पुने क- क-ई पुJर्थीक प्र तिमांयामां अदो नेहY तिकया गया र्थी । ऐस स्थिस्र्थीति मां. दोवेक4 पुक्षे क तिवेद्वाने अलिधवेक्ता क याह क4 तिक मांJक “दो-षी वेहने” क स्वेमां क तिनेया-जूने मां. कया4र र्थी और इंसलिलए वेह मां क! पुने स प्रतिकर प्रप्ता करने क अलिधकर ह`, स्वे कर तिकए जूने या-ग्या नेहY ह` । 12. फलn, उपुर-क्ता न्यायादृष्टां! र्थी प्रकरणे क\ पुरिरस्थिस्र्थीतियाp क समांग्रा पुरिरश लने स याह पुया जू ह` तिक वे4मांने मांमांल मां. अपु लर्थीA- मां क! पुने क- प्रतिकर रतिश क भागने ह उत्तीरदोया ठहरया जूने उतिच नेहY ह` । इंसलिलए “प्रश्नेध ने अलिधतिनेणे4या“ स्थिस्र्थीर रm जूने या-ग्या नेहY ह` । अn अपु लर्थीA- मां क! पुने क\ अपु ल स्वे कर क\ जू ह` । दोवेक4 क पुक्षे मां. पुरिर “प्रश्नेध ने अलिधतिनेणे4या“ अपुस् तिकया जू ह` । 13. तिनेणे4या क\ प्रति क सर्थी अलिधकरणे क अतिभालm श घ्रपु7वे4क आवेश्याक कया4वेह ह स7चनेर्थी4 वे पुलनेर्थी4 वेपुस प्रतिषी ह- । सह /- (स!जूया क मांर जूयासवेल) न्यायाध श पो मन