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Allahabad High Court · body

2026 DAILYLAW 377 (ALL)

DEEPAK RAIDAS v. STATE OF U.P. AND 3 OTHERS

BAIL/9407/2026 · 2026-03-18

Gautam Chowdhary

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 9407 of 2026 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. सूची पुनरीिक्षत वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक दीपक रैदास की ओर से मु.अ.सं० 332/2024 अन्तगर्त धारा 137(2)/ 64(1) बी.एऩ.एस. एवं 5/6 पॉक्सो एक्ट, थाना िगरवां, िजला बांदा में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता अरूण कु मार एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा शपथ पत्र के माध्यम से यह प्रस्तर 17 एवं 18 में यह उिल्लिखत िकया गया आवेदक और पीिड़ता दोनो बािलग है और वह एक दूसरे से प्रेम करते हैं। पीिड़ता ने जब यह बात अपने घर वालों से बतायी तो घर वालों ने उसकी शादी कहीं और कराने का िनणर्य िलया िजसे वह पहले से नहीं जानती थी और वह पीिड़ता से उम्र में भी बड़ा था। इस बात का पीिड़ता द्वारा जब िवरोध िकया गया तो सूचनाकतार् द्वारा आवेदक को उक्त मामले में आरोिपत करके उसे अिभयुक्त बना िदया गया जबिक आवेदक द्वारा अपने शपथ पत्र के माध्यम से यह कथन िकया गया िक वह पीिड़ता से ग्वािलयर में शादी कर चुका है और अब वह आगे का जीवन पीिड़ता के साथ िबताना चाहता है और उसको ससम्मान अपने घर रखने को तैयार है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 29.10.2025 से कारागार में िनरुद्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता उक्त तथ्यों से कोई आपित्त Versus Counsel for Applicant(s) : Akhand Pratap Singh, Shobhit Yadav Counsel for Opposite Party(s) : Arun Kumar Bajpai, G.A. Deepak Raidas .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s) नहीं है। 5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य प्रश्नगत प्रकरण में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 6. अतः वाद के गुण दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की सन्तुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़ 5. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। * आवेदक द्वारा इस आदेश के प्रस्तर 03 में उिल्लिखत कथनों का यिद अक्षरशः पालन न िकया गया तो पीिड़ता उक्त जमानत को िनरस्त करने के िलए स्वतंत्र है। March 19, 2026 S.Mishra BAIL No. 9407 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad