Research › Search › Judgment
High Court of Chhattisgarh · body
2026 DAILYLAW 37604 (CHH)
SUNIL DAS MAHANT v. STATE OF CHHATTISGARH
MCRC/9229/2026 · 2026-09-30
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2026
[ 2026 DAILYLAW 37604 (CHH) · dailylaw.ai ]
[ 2026 DAILYLAW 37604 (CHH) · dailylaw.ai ]
Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
1 / 4 (M.Cr.C. No.-9229 of 2026)
CGHC010382722026
2026:CGHC:42745 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिवेतिवेध
दाण्डिक प्रकरण
क्रमां$क
-9229
/2026
सनी ल दास मांहं$ तिपु-दार्ज.नी दास मांहं$, आया लगभग 28 वेर्ष., तिनीवेस -ग्रामां गर4ल, पुलिलस थानी-भर, लिर्जल-सक्ती8, छत्ती सगढ़ -----आवेदाक/अतिभयाक्ती तिवेरूद्घ छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार थानी प्रभर , पुलिलस थानी-भर, लिर्जल-सक्ती8, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदा आवेदाक/अतिभयाक्ती द्वार : श्री प्रवे ण शमां., अलिधवेक्ती । रज्या/उत्तीरवेदा द्वार : श्री रAतिहंस्वे लिस$हं, उपु शसक8या अलिधवेक्ती सतिहं श्री
सरश टनी, पु4नील अलिधवेक्ती । मांनीनी या न्यायामांDति. श्री स$र्जया क मांर र्जयासवेल
, न्यायाध श
!! आदाश पु ठ पुर पुरिर !! 01/10/2026
1. धर 483 भर या नीगरिरक सरक्षा स$तिहं, 2023 क हं प्रस् र्जमांनी आवेदानी मांL पुलिलस थानी-भर, सक्ती8, छत्ती सगढ़ क अपुरध क्रमां$क 257/2025, अ$ग. धर 103(1), 332(ख), 324(6), 191(1), 191(3), 296, 115(2), 351(3), POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.10.01 15:33:18 +0530
2 / 4 (M.Cr.C. No.-9229 of 2026) 109(1), 325 एवे$ 103(2) भर या न्याया स$तिहं, 2023 मांL र्जमांनी तिदाए र्जनी क तिनीवेदानी तिकया गया हं4 लिर्जसक र्जमांनी आवेदानी तिदानी$क 02/09/2026 कA तिवेचरण न्यायालया द्वार तिनीरस् कर तिदाया गया ।
2. अतिभयाAर्जनी क मांमांल, स$क्षापु मांL, इस आशया क हं4 तिक घटनी तिदानी$क 10/08/2025 कA सवेU दास (मांVक) नी सरकर पु$पु तिगड़ र्जनी क करण नीया स्टट.र लकर उस लगवेया था पु$पु चलD करवे तिदाया । त्पुश्चZ अपुनी पुत्र तिवेमांल दास मांहं$ क लनी पुर वेहं घर चल गया । उस तिदानी शमां कर 06:00 र्ज पुरनी र$लिर्जश कA लकर आवेदाक/अतिभयाक्ती अन्या सहं-अतिभयाक्तीगण क सथा लठ , $ एवे$ र\ लकर आया और मां$-हंनी क8 गलिलया$ दा हं^ए था र्जनी स मांरनी क8 धमांक8 दा हं^ए घर क दारवेर्ज एवे$ लिखड़क8 Aड़कर अ$दार घस गया था सवेU दास एवे$ तिवेमांल दास मांहं$ क सथा मांरपु ट तिकया । मांरपु ट स तिवेमांल दास कA चAटL आईं$ था सवेU दास कA ग$भ र चAटL आईं$, लिर्जसक करण उस अस्पुल, भर ल र्जया गया, र्जहं$ रतित्र कर 09:00 र्ज सवेU दास क8 मांVत्या हंA गईं । उसक8 पुत्नी क$ति ईं मांहं$ क8 सDचनी पुर पुलिलस द्वार 09 व्यातिक्तीयाa क तिवेरुद्ध नीमांर्जदा प्रथामां सDचनी पुत्र दार्ज. क8 गईं था स$पुDण. तिवेवेचनी उपुर$ अतिभयाAगपुत्र प्रस् तिकया गया ।
3. आवेदाक/अतिभयाक्ती पुक्षा क तिवेद्वानी अलिधवेक्ती क क.
हं4 तिक सनी ल दास मांहं$ अस्वेस्था चल रहं हं4 था उस खDनी क8 उण्डिdटया$ हंA रहं हंe, लिर्जसक उतिच रूपु स उपुचर नीहंf हंA पु रहं हं4 । वे तिनीर्ज अस्पुल मांL उसक उपुचर करवेनी चहं हंe । सहं-अतिभयाक्तीगण उतिमां.ल, याशAदा मांहं$ एवे$ रहं^ल तिदावेनी कA र्जमांनी प्रप्त हंA चक8 हं4 । वे.मांनी अतिभयाक्ती क मांमांल भ उक्ती सहं-अतिभयाक्तीगण स तिभन्न नीहंf हं4 । वेहं तिदानी$क-11/08/2025 स अतिभरक्षा मांL हं4 । तिवेचरण मांL समांया लगनी स$भतिवे हं4 । अi उस र्जमांनी पुर रिरहं तिकया र्जए ।
3 / 4 (M.Cr.C. No.-9229 of 2026)
4. उत्तीरवेदा /रज्या क8 ओर स उपुण्डिस्था तिवेद्वानी अलिधवेक्ती क क. हं4 तिक वे.मांनी प्रकरण हंत्या क8 घटनी स स$$लिध हं4 । आवेदाक/अतिभयाक्ती क तिवेरुद्ध नीमांर्जदा प्रथामां सDचनी पुत्र दार्ज. क8 गईं हं4, र्जतिक लिर्जनी सहं-अतिभयाक्तीगण कA र्जमांनी पुर रिरहं तिकया गया हं4, प्रथामां सDचनी पुत्र मांL उनीक नीमां नीहंf हं4 । इस प्रकर, आवेदाक/अतिभयाक्ती क मांमांल उनीस तिभन्न हं4 । मांमांल मांL प्रत्याक्षा सक्ष्या मांlर्जDदा हंe । प्रस् तिचतिकत्स या रिरपुAट. अ$तिमां मांहं लिसम्र, 2026 क8 नी हंAकर पुDवे. मांहं अगस्, 2026 क8 हं4 । अi आवेदाक/अतिभयाक्ती क8 भDतिमांक ग$भ र एवे$ घटनीक्रमां क8 मांख्या कड़ हं4 । यातिदा आवेदाक/अतिभयाक्ती कA र्जमांनी पुर रिरहं तिकया र्ज हं4, A वेहं शर्ष गवेहंa कA प्रभतिवे कर सक हं4, सक्ष्याa स छड़छड़ कर सक हं4 था न्यातियाक प्रतिक्रया मांL व्यावेधनी उत्पुन्न कर सक हं4 । अi उसक8 र्जमांनी स$$ध अपु ल तिनीरस् क8 र्जए ।
5. उभयापुक्षा क क. श्रीवेण तिकया था अतिभलख एवे$ क स यार क पुरिरश लनी तिकया गया ।
6. स$पुDण. पुरिरश लनी स याहं ण्डिस्थाति स्पुष्ट हंA हं4 तिक पुDवे. मांL र्जमांनी पुर रिरहं तिकए गए सहं- अतिभयाक्तीगण रहं^ल तिदावेनी, उतिमां.ल एवे$ याशAदा मांहं$ स आवेदाक/अतिभयाक्ती सश ल दास मांहं$ क मांमांल तिभन्न हं4 । वे.मांनी मांL आवेदाक/अतिभयाक्ती क8 ण्डिस्थाति नीर्जक हंA, ऐस दाश.नी वेल कAईं नीवे नी तिचतिकत्स या रिरपुAट. प्रस् नीहंf तिकया गया हं4 । आवेदाक/अतिभयाक्ती क तिवेरुद्ध प्रत्याक्षा सक्ष्या मांlर्जDदा हंe था उसक कब्र्ज स लठ क8 र्जब् भ हं^ईं हं4 । आहं एवे$ तिशकयाक.
पुर तिक्षा नीहंf या गया हंe । इस प्रकर, याहं न्यायालया पु हं4 तिक लिर्जनी सहं-अतिभयाक्तीगण कA र्जमांनी प्रदानी क8 गईं हं4, उनीस वे.मांनी आवेदाक/अतिभयाक्ती क मांमांल समांरूपु नीहंf हं4 । इस अवेस्था मांL आवेदाक/अतिभयाक्ती क मांमांल र्जमांनी प्रदानी तिकए र्जनी क लिलए उपुयाक्ती नीहंf पुया र्ज हं4 । फलi, आवेदाक/अतिभयाक्ती क र्जमांनी आवेदानी खरिरर्ज तिकया र्ज हं4 ।
4 / 4 (M.Cr.C. No.-9229 of 2026)
7. इस मांमांल मांL आवेदाक/अतिभयाक्ती तिदानी$क 10/08/2025 स अतिभरक्षा मांL हं4 । तिवेचरण ल$ समांया स ल$ति हं4, लिर्जसमांL क ल 37 सक्षा ए गए हंe था वे.मांनी मांL कर 13 सतिक्षायाa क पुर क्षाण हंAनी या गया हं4 । मांमांल मांL श घ्र तिवेचरण क8 आवेश्याक हं4 । अi उपुरAक्ती पुरिरण्डिस्थातियाa कA दृतिष्टग रख हं^ए, तिवेचरण न्यायालया कA तिनीदाUतिश तिकया र्ज हं4 तिक वेहं स$पुDण. प्रयासa क सथा तिवेचरण क8 कया.वेहं मांL गति ल हं^ए, इस आदाश क8 प्रति प्रप्त हंAनी क8 तिलिथा स अलिधकमां 05 मांहं क8 अवेलिध क भ र मांमांल क तिनीरकरण करनी सतिनीण्डिश्च कर ।
8. रलिर्जस्टu कA तिनीदाUतिश तिकया र्ज हं4 तिक इस आदाश क8 प्रतिलिलतिपु याथाश घ्र तिवेचरण न्यायालया कA सDचनीथा. वे अनीपुलनीथा. प्रतिर्ष क8 र्जए । सहं /- (स$र्जया क मांर र्जयासवेल) न्यायाध श पोमन