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High Court of Chhattisgarh · body
2026 DAILYLAW 37114 (CHH)
ICICI LOMBARD GENERAL INSURANCE COMPANY LTD. v. LAKSHMANIA
MAC/1004/2023 · 2026-09-23
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2026
[ 2026 DAILYLAW 37114 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 5 {MA(C) No. 1004 of 2023}
CGHC010184832023
2026:CGHC:41569 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिवेतिवेध अपु ल
( प्रतिकर
) क्रमां!क
-1004
/2023
आई.स .आई.स .आई. ल,म्र्ड/ जनरल इं!श्या,र4स क! पुन लिलतिमांटेर्ड, द्वार शाखा प्र!धक, शाखा कया/लया, मांकन क्रमां!क 414, वे र सवेरकर नगर क पुस, लिसति:तिवेनयाक मां!ति;र, प्रभा;वे , मां!ई (मांहारष्ट्र?), तिपुन क्रमां!क 400025, (मां,टेरसइंतिकल क्रमां!क स ज -12- एवेई-9832 कD मां क! पुन ) (;,षी वेहान मां,टेरसइंतिकल क्रमां!क स .ज .-12-ए.वेई.-9832 कD मां क! पुन ) -----अपु लर्थीG तिवेरूद्घ
1. श्री मां लक्ष्मांतिनया, पुति श्री पुर;शा धनहार, आया लगभाग 45 वेषी/,
2. हारिर, तिपु श्री पुर;शा धनहार, आया लगभाग 23 वेषी/, ;,नM तिनवेस ग्रामां तिछर पुर, क,नक,न, र्थीन !ग,, हास ल पु,ड़ी उपुर,ड़ी, लिजल क,र, छत्ती सगढ़, ------(;वेक/गण)
3. धनश्वेर धनहार, तिपु श्री नरयाण धनहार, आया लगभाग 30 वेषी/, तिनवेस ग्रामां तिछर पुर, क,नक,न, र्थीन !ग,, हास ल पु,ड़ी उपुर,ड़ी, लिजल क,र, छत्ती सगढ़ । (;,षी वेहान मां,टेरसइंतिकल क्रमां!क स .ज .-12-ए.वेई.-9832 क चलक एवे! पु!ज कR स्वेमां ) -----प्रत्यार्थीGगण अपु लर्थीG/ मां क! पुन द्वार : श्री शाखार रवे सहा अमां न, अलिधवेक्ता कD ओर स श्री पुलस अग्रावेल, अलिधवेक्ता । ;वेक//प्रत्यार्थीG क्रमां!क-1 स 2 द्वार : क,ई उपुस्थिस्र्थी नहाY । चलक-स्वेमां /प्रत्यार्थीG क्रमां!क-3 द्वार : क,ई उपुस्थिस्र्थी नहाY । POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.09.25 17:19:47 +0530
2 / 5 {MA(C) No. 1004 of 2023} न्यायामांZति/ श्री स!जया क मांर जयासवेल !! तिनण/या पु ठ पुर पुरिर !! 24/09/2026
1. मां,टेर यान अलिधतिनयामां, 1988 कD धर 173 क अ!ग/ प्रस् इंस अपु ल मां4 प्रर्थीमां मां,टेर ;र्घ/टेन ;वे अलिधकरण, कटेर्घ,र, लिजल-क,र (छत्ती सगढ़) द्वार मां,टेर ;र्घ/टेन ;वे प्रकरण क्रमां!क 114/2021, “लक्षमांतिनया वेगbरहा तिवेरु: धनश्वेर धनहार वेगbरहा” मां4 पुरिर अलिधतिनण/या ति;न!क 16/02/2023 क, चनe ; गई हाb । लिजस आग स!क्षपु मां4
“प्रश्नध न अलिधतिनण/या” स स!,लिध तिकया ज रहा हाb ।
2. प्रकरण क थ्या, स!क्षपु मां4, इंस प्रकर हाg तिक ति;न!क 17.07.2020 कD र कर 08.00 ज पुर;शा धनहार (मांRक) रe; खार कD रफ पुb;ल ज रहा र्थी, भा पु छ स मां,टेरसइंतिकल क्रमां!क स .ज .-12-ए.वेई.-9832 (लिजस आग स!क्षपु मां4 “;,षी वेहान” स स!,लिध तिकया ज रहा हाb) क, उसक चलक धनश्वेर धनहार ज गति एवे!
लपुरवेहा पुZवे/क चल हाiए आया, लिजसकD ठ,कर लगन क फलस्वेरूपु आई च,टे क करण पुर;शा धनहार कD मांRत्या हा, गई । उक्ता र्घटेन क स!!ध मां4 र्थीन !ग,, लिजल - क,र मां4 अपुरध क्रमां!क 78/2020, धर 304(क), भार या ;ण्र्ड स!तिहा क अ!ग/ अपुरध पु!ज : तिकया गया र्थी तिवेवेचन उपुर! अतिभाया,गपुत्र प्रस् तिकया गया ।
3. मांRक पुर;शा धनहार कD उक्ता ;र्घ/टेन मां4 मांRत्या क फलस्वेरूपु उसकD पुत्न एवे! पुत्र द्वार मां,टेर यान अलिधतिनयामां कD धर 166 क अ!ग/ प्रतिकर कD मां!ग कर हाiए ;वे आवे;न प्रस् तिकए जन पुर अलिधकरण द्वार याहा पुया गया तिक “;,षी वेहान”, अपु लर्थीG- मां क! पुन स तिमां र्थी । उक्ता वेहान क चलक धनश्वेर धनहार द्वार वेहान क चलन उपुक्षपुZवे/क एवे! उवेलपुन स तिकया जन पुया गया । सर्थी हा , याहा भा तिनध/रिर तिकया
3 / 5 {MA(C) No. 1004 of 2023} गया तिक मां शाl! क क,ई उल्लं!र्घन नहाY हाb । अn अपु लर्थीG- मां क! पुन क तिवेरु: ₹8,57,324/- कD प्रतिकर रतिशा ब्याज सतिहा अलिधतिनणG कD गई । उक्ता अलिधतिनण/या क, अपु लर्थीG- मां क! पुन द्वार इंस अपु ल मां4 चनe ; गई हाb ।
4. अपु लर्थीG- मां क! पुन क तिवेद्वान अलिधवेक्ता क क/ हाb तिक प्रर्थीमां सZचन पुत्र प्र;शा/ पु -7 मां4 तिकस अज्ञा वेहान क तिवेरु: रिरपु,टे/ ;ज/ करई गई र्थी र्थी “;,षी वेहान” कD जब्
र्घटेन क कर 05 मांहा पुश्चr ति;न!क 25/12/2020 क, कD गई हाb । इंस प्रकर,
“;,षी वेहान” क, अनतिच रूपु स ;र्घ/टेन मां4 स!लिलप्त तिकया गया हाb । वेस्वे मां4, ;र्घ/टेन
“;,षी वेहान” स नहाY हाiई र्थी , अn अपु लर्थीG- मां क! पुन तिकस प्रतिकर क भागन क लिलए उत्तीर;या नहाY हाb । फलn, अपु ल स्वे कर कर अपु लर्थीG- मां क! पुन क तिवेरु: पुरिर “प्रश्नध न अलिधतिनण/या” क, अपुस् तिकए जन क तिनवे;न तिकया गया हाb ।
5. उपुस्थिस्र्थी पुक्ष क क/ श्रीवेण तिकए गए र्थी अतिभालखा क सZक्ष्मांपुZवे/क पुरिरशा लन तिकया गया ।
6. अतिभालखा अनसर प्रर्थीमां सZचन पुत्र प्र;शा/ पु -7 मां4 अज्ञा वेहान क उल्लंखा अवेश्या हाb, तिक!
पुलिलस द्वार अ!तिमां प्रतिवे;न प्र;शा/ पु -1 “;,षी वेहान” क चलक धनश्वेर धनहार क तिवेरु: प्रस् तिकया गया हाb । अतिभाया,जन कD सक्ष्या सZच मां4 लिजस रजन्द्र क! वेर क, मांeक क चश्मां; ; सक्ष या गया हाb, वेहा अलिधकरण क समांक्ष उपुस्थिस्र्थी हा,कर सक्ष्या ति;या हाb र्थी
“;,षी वेहान” स हा ;र्घ/टेन हा,न क थ्या कD पुतिष्ट्र तिकया हाb, लिजसक क,ई खाण्र्डन नहाY हा, सक हाb ।
7. मांनन या उच्चमां न्यायालया द्वार न्यायादृष्ट्र! Mangla Ram v. Oriental Insurance Co. Ltd., (2018) 5 SCC 656 मां4 प्रतिपुति; तिकया हाb तिक पुलिलस अतिभालखा, तिवेशाषीकर प्रर्थीमां सZचन पुत्र एवे! अतिभाया,गपुत्र, ;र्घ/टेन र्थी उसमां4 चलक कD स!लिलप्त क स!!ध मां4
4 / 5 {MA(C) No. 1004 of 2023} प्रर्थीमांदृष्ट्रया सक्ष्या क आधर न सक हाg । ऐस अतिभालखा प्रस् तिकए जन पुर उनक प्रभावे क, तिनष्प्रभावे करन क ;तियात्वे उस पुक्ष पुर आ ज हाb ज, वेहान कD स!लिलप्त अर्थीवे चलक कD लपुरवेहा स इं!कर कर हाb ।
8. मांनन या उच्चमां न्यायालया द्वार न्यायादृष्ट्र! Geeta Dubey v. United India Insurance Co. Ltd., 2024 SCC OnLine SC 3779 मां4 प्रतिपुति; तिकया हाb तिक मां,टेर ;र्घ/टेन ;वे प्रकरण मां4, आपुरलिधक मांमांलM मां4 लगZ “यातिक्तायाक्ता स!;हा स पुर” प्रमांण क कठ,र मांन;!र्ड क, लगZ नहाY तिकया ज सक, स्थिxक ;वे क पुर क्षण “स!भावेनओ! कD प्रल” क आधर पुर तिकया जन चतिहाए ।
9. मांनन या उच्चमां न्यायालया द्वार न्यायादृष्ट्र! Meera Bai & Ors. v. ICICI Lombard General Insurance Company Ltd. & Anr., 2025 SCC OnLine SC 992 मां4 याहा प्रतिपुति; तिकया हाb तिक क वेल प्रत्याक्ष;शाG सक्ष क अभावे, मां,टेर ;र्घ/टेन प्रतिकर क ;वे क, तिनरस् करन क एकमांत्र आधर नहाY नया ज सक, ;र्घ/टेन एवे! लपुरवेहा
क यातिक्तास!ग तिनष्कषी/ प्रर्थीमां सZचन पुत्र, अतिभाया,गपुत्र एवे! अन्या आलिधकरिरक अतिभालखाM स तिनकल ज सक हा, ।
10. उपुर,क्ता न्यायादृष्ट्र!M मां4 प्रतिपुति; तिवेलिध-लिस:! क आल,क मां4 तिवेचर करन पुर याहा स्पुष्ट्र हा, हाb तिक मांमांल मां4 मांeक क चश्मां; ; सक्ष रजन्द्र क!
वेर क पुर क्षण तिकया गया हाb, लिजसन ;वेक/ पुक्ष क मांमांल कD पुतिष्ट्र कD हाb । उसक अनसर “;,षी वेहान” ;र्घ/टेन मां4 स!लिलप्त र्थी । इंसकD पुतिष्ट्र अ!तिमां प्रतिवे;न स भा हा, हाb, लिजसक क,ई खाण्र्डन नहाY हा, सक हाb । “;,षी वेहान” क, अनतिच रूपु स ;र्घ/टेन मां4 स!लिलप्त या गया हा,, इंस आशाया क क,ई सक्ष्या भा वेहान क चलक, स्वेमां अर्थीवे मांक/ कD ओर स प्रस् नहाY तिकया
5 / 5 {MA(C) No. 1004 of 2023} गया हाb । ऐस ;शा मां4 अलिधकरण द्वार “;,षी वेहान” कD ;र्घ/टेन मां4 स!लिलप्त क स!!ध मां4 अतिभालिललिखा तिनष्कषी/ क, त्रतिटेपुZण/ नहाY मांन ज सक ।
11. उपुर,क्ता तिवेवेचन क आधर पुर याहा न्यायालया पु हाb तिक अपु लर्थीG- मां क! पुन क क/ स्वे कर तिकए जन या,ग्या नहाY हाb । अलिधकरण द्वार पुरिर “प्रश्नध न अलिधतिनण/या” अतिभालखा पुर उपुलब्ध मांeलिखाक एवे! ;स्वेज सक्ष्या क अनरूपु हा,न स उसमां4 तिकस
हास्क्षपु कD आवेश्याक नहाY पुया ज । फलस्वेरूपु, अपु ल स्वे कर या,ग्या नहाY हा,न स खारिरज कD ज हाb ।
12. तिनण/या कD प्रति क सर्थी अलिधकरण क अतिभालखा शा घ्रपुZवे/क आवेश्याक कया/वेहा हा सZचनर्थी/ वे पुलनर्थी/ वेपुस प्रतिषी हा, । सहा /- (स!जया क मांर जयासवेल) न्यायाध शा पो
मन