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High Court of Chhattisgarh · body
2026 DAILYLAW 36608 (CHH)
BRANCH MANAGER v. SANGEETA LAKRA
MAC/1960/2023 · 2026-09-20
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2026
[ 2026 DAILYLAW 36608 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 7 {MA(C) No. 1960 of 2023}
CGHC010384782023
2026:CGHC:41073 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिवेतिवेध अपु ल
( प्रतिकर
) क्रमां!क
-1960
/2023
शाखा प्र!धक, द नेशानेल इं!श्या0र1स क! पुने लिलतिमांटेड, ही र0 मां0टे0क6पु7 वेतिटे7कल, तिदल्ली ड ओ एक्स, 803ए, 8वे= मां!लि>ल, टेवेर-स , कनेक्टेस तिल्डिं@ड!ग, नेई तिदल्ली रलवे स्टेशाने क समांने, भावेभाDति मांग7, दDरभाष क्रमां!क 011-23215595
(प्रश्नेध ने अलिधतिनेर्ण7या क वेद-शा ष7क मां1 पु त्रुतिटेवेशा “8वे= मां!लि>ल, टेवेर-स तिल्डिं@ड!ग, नेई तिदल्ली , भावेभाDति मांग7, तिदल्ली ” अ!तिक तिकया गया हीK) (द0ष वेहीने मां0टेरसइंतिकल क्रमां!क-स .> .-15-ड .एफ.-6547 क मां क! पुने ) -----अपु लर्थीQ तिवेरूद्घ
1. स!ग लकड़ा, पुति स्वेगQया तिरल सया लकड़ा, आया लगभाग 22 वेष7,
2. भाDपुन्द्र लकड़ा, तिपु स्वेगQया तिरल सया, आया लगभाग 6 वेष7,
3. समां र लकड़ा, तिपु स्वेगQया तिरल सया, आया लगभाग 4 वेष7,
4. समांरिर लकड़ा, तिपु स्वेगQया तिरल सया, आया लगभाग 2 वेष7,
5. गललसया लकड़ा, तिपु स्वेगQया झर रमां लकड़ा, आया लगभाग 48 वेष7,
6. र!ग0 ई, पुति स्वेगQया श्री गललसया, आया लगभाग 45 वेष7, टे पु-प्रत्यार्थीQ क्रमां!क-2 स 4 अवेयास्क, द्वार अपुने प्रक\ तिक स!रति]क एवे! मां, प्रत्यार्थीQ क्रमां!क 1 श्री मां स!ग लकड़ा, सभा तिनेवेस -ग्रामां लडवे, पुलिलस र्थीने-र>पुर, लि>ल लरमांपुर-रमांने>ग!>, छत्ती सगढ़, वे7मांने पु—खालपुर, ग!ध नेगर, पुलिलस र्थीने-अल्डिं`कपुर, लि>ल सरग> (छत्ती सगढ़) ------(दवेक7गर्ण) POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.09.23 10:36:12 +0530
2 / 7 {MA(C) No. 1960 of 2023}
7. क\ ष्र्ण तिकb, तिपु क1 द तिकb, आया लगभाग 35 वेष7, >ति—उर!वे, तिनेवेस ग्रामां पुहीड़ा खाडवे! लिझ!ग0, र्थीने एवे! हीस ल-र>पुर, लि>ल लरमांपुर, छत्ती सगढ़ । (द0ष वेहीने मां0टेरसइंतिकल क्रमां!क-स .> .-15-ड .एफ.-6547 क पु!> क\ स्वेमां )
8. चK रमां, तिपु ही@क रमां, आया लगभाग 35 वेष7, तिनेवेस ग्रामां लडवे, र्थीने-र>पुर, लि>ल-लरमांपुर-रमांने>ग!>, छत्ती सगढ़ । (द0ष वेहीने मां0टेरसइंतिकल क्रमां!क-स .> .-15-ड .एफ.-6547 क चलक) -----प्रत्यार्थीQगर्ण अपु लर्थीQ मां क! पुने द्वार : श्री आर.एने. पुस्टे , अलिधवेक्ता कf ओर स श्री
आकशा श्री वेस्वे, अलिधवेक्ता । दवेक7/प्रत्यार्थीQ क्रमां!क-1 स 6 द्वार : श्री हीरिरओमां रया, अलिधवेक्ता । प्रत्यार्थीQ क्रमां!क-7 एवे! 8 द्वार : सDचने तिमांल पुश्च क0ई उपुल्डिंस्र्थी नेही= । न्यायामांDति7 श्री स!>या क मांर >यासवेल !! तिनेर्ण7या पु ठ पुर पुरिर !! 21/09/2026
1.
मां0टेर याने अलिधतिनेयामां, 1988 कf धर 173 क अ!ग7 प्रस् इंस अपु ल मां1 मां0टेर दर्घ7टेने दवे अलिधकरर्ण, लरमांपुर स्र्थीने रमांने>ग!> (छत्ती सगढ़) द्वार मां0टेर दर्घ7टेने दवे प्रकरर्ण क्रमां!क 04/2019, “स!ग लकड़ा वेगKरही तिवेरुद्ध क\ ष्र्ण तिकb वेगKरही” मां1 पुरिर अलिधतिनेर्ण7या तिदने!क 05/09/2023 क0 चनेl द गई हीK । लि>स आग स!]पु मां1
“प्रश्नेध ने अलिधतिनेर्ण7या” स स!0लिध तिकया > रही हीK ।
2. प्रकरर्ण क थ्या, स!]पु मां1, इंस प्रकर हीn तिक तिदने!क 27.08.2018 क0 तिरलसया लकड़ा (मां\क) मां0टेरसइंतिकल मां1 ग्रामां लडवे स र>पुर कf ओर > रही र्थी । उस दlरने
3 / 7 {MA(C) No. 1960 of 2023} चलक चKरमां द्वार अन्या मां0टेरसइंतिकल क्रमां!क स .> .-15-ड .एफ.-6547 (लि>स आग स!]पु मां1 “द0ष वेहीने” स स!0लिध तिकया > रही हीK) क0 > गति एवे! लपुरवेही पुDवे7क चलए >ने क करर्ण उक्ता मां0टेरसइंतिकल कf ठ0कर लगने स तिरलसया क0 ग!भा र च0टे1 आई!, लि>सक पुरिरर्णमांस्वेरूपु उसकf मां\त्या ही0 गई । उक्ता र्घटेने क स!!ध मां1 आर] क न्द्र र>पुर, लि>ल लरमांपुर मां1 अपुरध क्रमां!क 161/2018, धर 304(क), भार या दण्ड स!तिही क अ!ग7 अपुरध पु!> द्ध तिकया गया र्थी तिवेवेचने उपुर! चKरमां क तिवेरुद्ध अतिभाया0गपुत्रु प्रस् तिकया गया ।
3. मां\क तिरलसया कf उक्ता दर्घ7टेने मां1 मां\त्या क फलस्वेरूपु उसकf पुत्ने , ने नेलिलग स!ने र्थी मां-तिपु द्वार मां0टेर याने अलिधतिनेयामां कf धर 166 क अ!ग7 प्रतिकर कf मां!ग कर हीpए दवे आवेदने प्रस् तिकया गया । अलिधकरर्ण द्वार दवे प्रमांतिर्ण पुया गया र्थी मां पु6लिलस कf शाq! क उल्ली!र्घने ही0ने नेही= पुया गया । फलr, अलिधकरर्ण द्वार ₹11,50,000/- कf प्रतिकर रतिशा ब्या> सतिही अलिधतिनेर्णQ कf गई । उक्ता अलिधतिनेर्ण7या क0 अपु लर्थीQ मां क! पुने द्वार इंस अपु ल मां1 चनेl द गई हीK ।
4. अपु लर्थीQ/ मां क! पुने क तिवेद्वाने अलिधवेक्ता क क7 हीK तिक “द0ष वेहीने“ क चलक चKरमां क पुस मां0टेरसइंतिकल चलने ही वेKध चलक अनेज्ञतिv नेही= र्थी , ल्डिं@क उसक पुस क वेल ही@क मां0टेर याने एवे! मांलवेहीक याने चलने कf अनेज्ञतिv र्थी , >0 मां0टेरसइंतिकल चलने क लिलए वेKध अनेज्ञतिv नेही= मांने > सक । अr चलक क पुस मां0टेरसइंतिकल चलने ही वेKध एवे!
प्रभावे चलक अनेज्ञतिv क अभावे मां1 मां पु6लिलस कf शाq! क उल्ली!र्घने हीpआ हीK और इंस करर्ण अपु लर्थीQ/ मां क! पुने प्रतिकर क भागने क दतियात्वे स उन्मांक्ता ही0ने कf अलिधकर हीK । तिवेद्वाने अलिधवेक्ता क आग क7 हीK तिक दर्घ7टेने द0
4 / 7 {MA(C) No. 1960 of 2023} मां0टेरसइंतिकलx कf आमांने-समांने कf टेक्कर क फलस्वेरूपु हीpई र्थी र्थी दDसर
मां0टेरसइंतिकल क0 स्वेया! मां\क तिरलसया द्वार > गति एवे! लपुरवेही पुDवे7क चलया > रही र्थी । इंसक वे>Dद, अलिधकरर्ण द्वार मां\क कf ओर स तिकस प्रकर कf या0गदया
उपु] नेही= मांने गई, >0 त्रुतिटेपुDर्ण7 हीK । अr मां\क कf या0गदया उपु] तिनेध7रिर कर हीpए अपु लर्थीQ/ मां क! पुने क0 प्रतिकर क दतियात्वे स उन्मांक्ता तिकया >ने चतिहीए । फलr, अपु ल स्वे कर कर अपु लर्थीQ/ मां क! पुने क तिवेरुद्ध पुरिर “प्रश्नेध ने अलिधतिनेर्ण7या” क0 अपुस् तिकए >ने क तिनेवेदने तिकया गया हीK ।
5. इंसक तिवेपुर , दवेक7/प्रत्यार्थीQ क्रमां!क-1 स 6 क तिवेद्वाने अलिधवेक्ता ने अपु ल क तिवेर0ध कर हीpए क7 प्रस् तिकया हीK तिक अलिधकरर्ण द्वार अतिभालखा पुर उपुलब्ध मांlलिखाक एवे! दस्वे> सक्ष्या क समांतिच मांD@या!कने कर तिवेलिधस`मां तिनेष्कष7 अतिभालिललिखा तिकया गया हीK । अपु लर्थीQ मां क! पुने क क7 स्वे कर या0ग्या नेही= हीK । अr अपु ल खारिर> तिकया >ए ।
6. उपुल्डिंस्र्थी पु] क क7 श्रीवेर्ण तिकए गए र्थी अतिभालखा क सDक्ष्मांपुDवे7क पुरिरशा लने तिकया गया ।
7. अपु लर्थीQ/ मां क! पुने क क7 याही रही हीK तिक द0नेx मां0टेरसइंतिकलx क मांध्या आमांने-समांने कf टेक्कर हीpई र्थी र्थी दDसर मां0टेरसइंतिकल मां\क तिरलसया द्वार चलई > रही र्थी । अr दर्घ7टेने मां1 मां\क कf भा या0गदया उपु] र्थी , लि>स अलिधकरर्ण द्वार स्वे कर ने तिकया >कर त्रुतिटे कf गई हीK । फलr, मां\क कf या0गदया उपु] तिनेध7रिर तिकए >ने क तिनेवेदने तिकया गया हीK । उक्ता क7 क स!!ध मां1 अतिभालखा पुर प्रस् अतिभावेचने एवे!
सक्ष्या क पुरिरशा लने स याही ल्डिंस्र्थीति स्पुष्ट ही0 हीK तिक दवेक7 पु] कf ओर स मां\क कf पुत्ने स!ग लकड़ा क पुर ]र्ण करया गया हीK, >तिक “द0ष वेहीने“ क चलक, स्वेमां अर्थीवे मांक7 कf ओर स
5 / 7 {MA(C) No. 1960 of 2023} क0ई सक्ष्या प्रस् नेही= तिकया गया हीK । याद्यतिपु मां\क कf पुत्ने स!ग लकड़ा र्घटेने कf प्रत्या]दशाQ स] नेही= हीK, र्थीतिपु उसक द्वार अपुने पु] समांर्थी7ने मां1 प्रस् तिकए गए पुलिलस चलने दस्वे>x मां1 प्रर्थीमां सDचने पुत्रु प्रदशा7 पु -1 स स्पुष्ट ही0 हीK तिक दर्घ7टेने क स!!ध मां1
“द0ष वेहीने“ क चलक क तिवेरुद्ध अपुरध पु!> द्ध तिकया गया र्थी र्थी प्रदशा7 पु -2 स याही भा प्रमांतिर्ण ही0 हीK तिक उक्ता दर्घ7टेने क स!!ध मां1 “द0ष वेहीने“ क चलक चKरमां क तिवेरुद्ध अतिभाया0गपुत्रु प्रस् तिकया गया र्थी ।
8. मांनेने या उच्चमां न्यायालया द्वार न्यायादृष्ट! Mangla Ram v. Oriental Insurance Co. Ltd., (2018) 5 SCC 656 मां1 प्रतिपुतिद तिकया हीK तिक पुलिलस अतिभालखा, तिवेशाषकर प्रर्थीमां सDचने पुत्रु एवे! अतिभाया0गपुत्रु, दर्घ7टेने र्थी उसमां1 चलक कf स!लिलv क स!!ध मां1 प्रर्थीमांदृष्टया सक्ष्या क आधर ने सक हीn । ऐस अतिभालखा प्रस् तिकए >ने पुर उनेक प्रभावे क0 तिनेष्प्रभावे करने क दतियात्वे उस पु] पुर आ > हीK >0 वेहीने कf स!लिलv अर्थीवे चलक कf लपुरवेही स इं!कर कर हीK ।
9. मांनेने या उच्चमां न्यायालया द्वार न्यायादृष्ट! Geeta Dubey v. United India Insurance Co. Ltd., 2024 SCC OnLine SC 3779 मां1 प्रतिपुतिद तिकया हीK तिक मां0टेर दर्घ7टेने दवे प्रकरर्ण मां1, आपुरलिधक मांमांलx मां1 लगD “यातिक्तायाक्ता स!दही स पुर” प्रमांर्ण क कठ0र मांनेद!ड क0 लगD नेही= तिकया > सक, ल्डिं@क दवे क पुर ]र्ण “स!भावेनेओ! कf प्रल” क आधर पुर तिकया >ने चतिहीए ।
10. मांनेने या उच्चमां न्यायालया द्वार न्यायादृष्ट! Meera Bai & Ors.
v. ICICI Lombard General Insurance Company Ltd. & Anr., 2025 SCC OnLine SC 992 मां1 याही प्रतिपुतिद तिकया हीK तिक क वेल प्रत्या]दशाQ स] क अभावे, मां0टेर दर्घ7टेने प्रतिकर क
6 / 7 {MA(C) No. 1960 of 2023} दवे क0 तिनेरस् करने क एकमांत्रु आधर नेही= नेया > सक, यातिद दर्घ7टेने एवे! लपुरवेही क यातिक्तास!ग तिनेष्कष7 प्रर्थीमां सDचने पुत्रु, अतिभाया0गपुत्रु एवे! अन्या आलिधकरिरक अतिभालखाx स तिनेकल > सक ही0 ।
11. उपुर0क्ता न्यायादृष्ट!x मां1 प्रतिपुतिद तिवेलिध-लिसद्ध! क आल0क मां1 तिवेचर करने पुर याही स्पुष्ट ही0 हीK तिक प्रतिकर स!!ध कया7वेही मां1 थ्या क तिनेध7रर्ण ही आपुरलिधक प्रकरर्ण मां1 अपुति] “स!दही स पुर प्रमांर्ण” कf कठ0र कसlटे लगD नेही= ही0 , ल्डिं@क उपुलब्ध सक्ष्या क आधर पुर “प्रल स!भावेनेओ!” कf कसlटे पुर तिनेष्कष7 तिनेकल >ने अपुति] हीK । वे7मांने प्रकरर्ण मां1 याद्यतिपु र्घटेने क तिकस प्रत्या]दशाQ स] क पुर ]र्ण नेही= करया गया हीK, र्थीतिपु अतिभालखा स याही स्पुष्ट हीK तिक “द0ष वेहीने“ क चलक कf > गति एवे! लपुरवेही पुDर्ण7 वेहीने चलने क स!!ध मां1 पुलिलस द्वार उसक तिवेरुद्ध अपुरध पु!> द्ध तिकया गया र्थी तिवेवेचने उपुर! उसक तिवेरुद्ध अतिभाया0गपुत्रु प्रस् तिकया गया । दDसर ओर, मां\क कf ओर स दर्घ7टेने मां1 तिकस प्रकर कf या0गदया उपु] रही ही0, इंस थ्या क0 स्र्थीतिपु करने ही “द0ष वेहीने“ क चलक, स्वेमां अर्थीवे मांक7 कf ओर स ने 0 क0ई मांlलिखाक सक्ष्या प्रस् तिकया गया हीK और ने ही ऐस क0ई अतिभालखा या सक्ष्या प्रस् तिकया गया हीK, लि>सस मां\क कf या0गदया उपु] प्रमांतिर्ण ही0 सक । अr मां\क कf या0गदया उपु] क स!!ध मां1 अतिभालखा पुर क0ई तिवेश्वेसने या सक्ष्या उपुलब्ध नेही= हीK । ऐस
ल्डिंस्र्थीति मां1, अपु लर्थीQ/ मां क! पुने क तिवेद्वाने अलिधवेक्ता क याही क7 तिक दर्घ7टेने मां1 मां\क कf भा या0गदया उपु] र्थी , स्वे कर या0ग्या नेही= पुया > हीK ।
12. >ही! क, मां पु6लिलस क उल्ली!र्घने मां1 वेहीने चलया >ने क प्रश्ने हीK? वे7मांने प्रकरर्ण मां1 याही थ्या अतिवेवेतिद रही हीK तिक अपु लर्थीQ/ मां क!
पुने दर्घ7टेने कf तिलिर्थी क0 “द0ष वेहीने“
7 / 7 {MA(C) No. 1960 of 2023} कf मांक7 र्थी । मां पु6लिलस कf शाq! क उल्ली!र्घने क भार उस पु] पुर ही0 हीK, >0 ऐस उल्ली!र्घने क अतिभावेचने कर हीK । याद्यतिपु अपु लर्थीQ/ मां क! पुने द्वार चलक क पुस वेKध अनेज्ञतिv ने ही0ने स!!ध
मां पु6लिलस कf शाq! क उल्ली!र्घने क अतिभावेचने तिकया गया हीK, र्थीतिपु उक्ता अतिभावेचने क समांर्थी7ने मां1 अलिधर0तिपु सक्ष्या क भार क तिनेवे7हीने करने ही क0ई भा सक्ष्या प्रस् नेही= तिकया गया हीK । ऐस ल्डिंस्र्थीति मां1, सक्ष्या क अभावे मां1 अलिधकरर्ण द्वार मां पु6लिलस कf शाq! क उल्ली!र्घने प्रमांतिर्ण नेही= पुए >ने क तिनेष्कष7 अतिभालखा पुर उपुलब्ध समांग्रा क अनेरूपु हीK । उक्ता तिनेष्कष7 मां1 क0ई त्रुतिटे पुरिरलति] नेही= ही0 , लि>सस उसमां1 हीस्]पु तिकया >ने आवेश्याक ही0 । फलr, अपु लर्थीQ/ मां क! पुने क याही क7 भा
स्वे कर या0ग्या नेही= पुया > हीK ।
13. उपुर0क्ता तिवेवेचने क आधर पुर याही न्यायालया पु हीK तिक अपु लर्थीQ- मां क! पुने क क7 स्वे कर तिकए >ने या0ग्या नेही= हीK । अलिधकरर्ण द्वार पुरिर “प्रश्नेध ने अलिधतिनेर्ण7या” अतिभालखा पुर उपुलब्ध मांlलिखाक एवे! दस्वे> सक्ष्या क अनेरूपु ही0ने स उसमां1 तिकस
हीस्]पु कf आवेश्याक नेही= पुया > । फलस्वेरूपु, अपु ल स्वे कर या0ग्या नेही= ही0ने स खारिर> कf > हीK ।
14. तिनेर्ण7या कf प्रति क सर्थी अलिधकरर्ण क अतिभालखा शा घ्रपुDवे7क आवेश्याक कया7वेही ही सDचनेर्थी7 वे पुलनेर्थी7 वेपुस प्रतिष ही0 । सही /- (स!>या क मांर >यासवेल) न्यायाध शा पो
मन