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2026:CGHC:12939 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
दाण्डिक अपु ल
क्रमां"क
-517
/2026
जाग, सहू. तिपु-टेकरमां सहू., उम्र-लगभग 30 वेर्ष4, ति5वेस -रमां 5गर, मांति6धामां, सपुल, तिभलई, पुलिलस था5-सपुल, लिजाल-दाग4, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा;/अतिभया6 तिवेरूद्घ छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुलिलस था5-जामांल, लिजाल-दाग4, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदा /रज्या अपु लथा;/अतिभया6 द्वार : श्री टे ०क ० झा, अलिधावे6 । रज्या/उत्तीरवेदा द्वार : श्री आकश अग्रवेल, पुH5ल अलिधावे6 । न्यायामांIति4 श्री स"जाया क मांर जायासवेल !! आदाश पु ठ पुर पुरिर !! 18/03/2026
1. धार 14(क)( ) ii अ5सIतिच जाति एवे" अ5सIतिच जा5जाति (अत्याचर ति5वेरण) अलिधाति5यामां, 1989 (लिजास आग स"क्षेपु मांV "तिवेशर्ष अलिधाति5यामां" कहू गया हूH) क अ"ग4 प्रस् इस अपु ल मांV तिवेचरण न्यायालया-तिवेशर्ष न्यायाधा श (तिवेशर्ष अलिधाति5यामां), दाग4, POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.03.19 14:20:45 +0530
2 / 9 (Cr. A. No.-517 of 2026) लिजाल-दाग4, छत्ती सगढ़ द्वार पुलिलस था5-जामांल, लिजाल-दाग4, छत्ती सगढ़ क अपुरधा क्रमां"क-69/2026 अ"ग4 धार 69 भर या न्याया स"तिहू, 2023 था तिवेशर्ष अलिधाति5यामां कZ धार 3(2)( ) v क हू प्रस् अतिग्रमां जामां5 आवेदा5 मांV पुरिर आदाश तिदा5"क-06/02/2026 (त्रुतिटेपुIण4 'वेर्ष4-2025’ उल्लेलि_) क` च5a दा गई हूH लिजासक हू अपु लथा;/अतिभया6 क अतिग्रमां जामां5 आवेदा5 ति5रस् कर तिदाया गया । उ6 आदाश क` स"क्षेपु मांV “प्रश्5धा 5 आदाश” स स"`लिधा तिकया जा रहू हूH ।
2.
अतिभया`जा5 क मांमांल स"क्षेपु मांV इस प्रकर हूH तिक 29 वेर्ष;या अतिभया`क्त्रु , जा` 5aकर कर अपु5 जा वे5यापु5 कर रहू , उसकZ तिदा5"क 05/08/2022 क` अपु लथा; स मांलक हूfई था । उ6 मांलक क पुश्च अपु लथा; 5 अतिभया`क्त्रु क` तिवेवेहू क प्रस्वे तिदाया था उसस प्रमां क इजाहूर कर हूfए तिदा5"क 10/10/2022 स उसक सथा शर रिरक स""धा स्थातिपु तिकए था तिवेवेहू क आश्वेस5 दा रहू । अतिभया`क्त्रु क` याहू जा5कर हूfई तिक अपु लथा; क तिवेवेहू तिदा5"क 08/02/2026 स प्रर"भ हू`5 वेल हूH । ति5वेदा5 पुर उस5 अतिभया`क्त्रु स तिवेवेहू कर5 स इ"कर कर तिदाया । अतिभया`क्त्रु कZ लिललि_ तिशकया पुर था5 जामांल, लिजाल दाग4 मांV अपुरधा क्रमां"क 69/2026 क हू प्रथामां सIच5 पुत्रु तिदा5"क 01/02/2026 क` भर या न्याया स"तिहू, 2023 कZ धार 69 क अ"ग4 पु"जा द्ध कर तिवेवेच5 प्रर"भ कZ गई । तिवेवेच5 क दाaर5 अतिभया`क्त्रु द्वार जाति प्रमांण-पुत्रु प्रस् तिकए जा5 पुर प्रकरण मांV तिवेशर्ष अलिधाति5यामां कZ धारएh भ जा`ड़ी गई" । तिगरफ्र कZ आश"क स अपु लथा;/अतिभया6 द्वार अतिग्रमां जामां5 हू आवेदा5 तिवेचरण न्यायालया क समांक्षे प्रस् तिकया गया, लिजास तिवेशर्ष अलिधाति5यामां कZ धार 18 क प्रवेधा5 क` दृतिlग र_ हूfए ति5रस् कर तिदाया गया । उ6 आदाश क` वे4मां5 अपु ल क मांध्यामां स च5a दा गई हूH ।
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3. इस अपु ल क स""धा मांV अतिभया`क्त्रु क` तिदा5"क-27/02/2026 क` सIच5 प्रतिर्ष कZ गई था । लिजासक अ5पुल5 मांV अतिभया`क्त्रु , आजा तिदा5"क 18/03/2026 क` स""लिधा लिजाल तिवेलिधाक सवे प्रलिधाकरण स आभस रूपु स उपुण्डिस्था हू`कर अपु लथा;/अतिभया6 क` अतिग्रमां जामां5 तिदाए जा5 पुर आपुलित्ती हू`5 कZ अतिभव्याति6 कZ गई ।
4.
अपु लथा; क तिवेद्वा5 अलिधावे6 क क4 हूH तिक अतिभया`क्त्रु , एक वेयास्क मांतिहूल हूH जा` इस प्रकर कZ तिशकयाV कर5 कZ आदा हूH । वे4मां5 प्रकरण मांV उस5 याहू आर`पु लगया हूH तिक वेर्ष4 2022 स तिदास"र, 2025 क अपु लथा; 5 तिवेवेहू क आश्वेस5 दाकर उसक सथा शर रिरक स""धा स्थातिपु तिकए । जातिक, इस अतिभया`क्त्रु द्वार एक अन्या व्याति6, मांक श स`5कर, क तिवेरुद्ध था5 सपुल, दाग4 मांV तिशकया प्रस् कZ गई था , लिजास पुर तिदा5"क 10/09/2025 क` अपुरधा क्रमां"क 1065/2025 पु"जा द्ध तिकया गया । उ6 प्रकरण मांV भ अतिभया`क्त्रु 5 वेर्ष4 2023 स तिवेवेहू क आश्वेस5 क आधार पुर शर रिरक स""धा स्थातिपु कर5 क आर`पु लगया हूH, लिजासमांV मांक श स`5कर क तिवेरुद्ध तिवेचरण ल"ति हूH । उस प्रकरण मांV अतिभया`क्त्रु 5 लिललि_ रूपु स याहू उल्ले_ तिकया था तिक उसक पुस जाति प्रमांण-पुत्रु उपुलब्धा 5हूq हूH ।
5. तिवेद्वा5 अलिधावे6 क याहू भ क4 हूH तिक अपु लथा; द्वार प्रर"भ मांV अतिरिर6 सत्रु न्यायाधा श (एफ.टे .स .), दाग4 क समांक्षे अतिग्रमां जामां5 आवेदा5 प्रस् तिकया गया था, जाहू" अतिभया`क्त्रु 5 स्वेया" उपुण्डिस्था हू`कर जाति प्रमांणपुत्रु प्रस् तिकया क्षेत्रुलिधाकर क अभवे मांV तिदा5"क 05/02/2026 क` गण-दा`र्ष पुर तिवेचर तिकए ति5 ति5रस् कर तिदाया गया । त्पुश्च अपु लथा; 5 तिवेशर्ष न्यायाधा श, दाग4 क समांक्षे तिवेशर्ष अलिधाति5यामां क अ"ग4 अतिग्रमां जामां5 हू आवेदा5 प्रस् तिकया, लिजास पुर प्रश्5धा 5 ति5रस् आदाश पुरिर तिकया गया हूH ।
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6. आग याहू भ क4 तिकया गया तिक अतिभया`क्त्रु द्वार अपु लथा; क` झाIठ प्रकरण मांV फh स5 कZ धामांकZ दा जा रहू था , लिजासक स""धा मांV अपु लथा; 5 तिदा5"क 27/01/2026 क` पुलिलस अधा क्षेक, दाग4 क समांक्षे तिशकया प्रस् कZ था , लिजासमांV याहू उल्ले_ तिकया गया तिक अतिभया`क्त्रु द्वार उसस ₹5,00,000/- कZ मां"ग कZ जा रहू था , अन्याथा उस जाल तिभजावे5 एवे" जा वे5 5l कर5 कZ धामांकZ दा जा रहू था ।
7.
तिवेद्वा5 अलिधावे6 द्वार आग क4 तिकया गया तिक लिजास लिललि_ तिशकया क आधार पुर वे4मां5 अपुरधा पु"जा द्ध तिकया गया हूH, उसमांV तिकस प्रकर क जातिग आर`पु 5हूq लगया गया था था प्रर"तिभक स्र पुर अतिभया`क्त्रु द्वार जाति प्रमांण-पुत्रु भ प्रस् 5हूq तिकया गया था । अतिभया`क्त्रु क आचरण स"दाहूस्पुदा हूH, क्याuतिक उस5 लगभग समां5 समांयावेलिधा मांV दा` तिभन्न व्याति6याu क तिवेरुद्ध समां5 प्रक, ति क आर`पु लगए हूw । उपुर`6 पुरिरण्डिस्थातियाu मांV प्रकरण प्रथामांदृlया स"दाहूस्पुदा हूH था “तिवेशर्ष अलिधाति5यामां” कZ धार 18 क प्रवेधा5 आकतिर्ष4 5हूq हू` हूw । तिवेचरण न्यायालया द्वार अतिग्रमां जामां5 आवेदा5 ति5रस् कर त्रुतिटे कZ गई हूH । पुरिरणमांस्वेरूपु, प्रश्5धा 5 आदाश क` अपुस् कर अपु लथा; क` अतिग्रमां जामां5 क लभ प्रदा5 तिकया जाए । अपु5 क4 क समांथा45 मांV तिवेद्वा5 अलिधावे6 द्वार Prathvi Raj Chauhan v. Union of India and others, (2020) 4 SCC 727 क ति5ण4या क हूवेल तिदाया गया हूH ।
8. उत्तीरवेदा /रज्या क तिवेद्वा5 अलिधावे6 5 अपु लथा; क क4 क तिवेर`धा कर हूfए कहू हूH तिक अतिभया`क्त्रु अ5सIतिच जाति वेग4 कZ सदास्या हूH । उसकZ तिशकया क अवेल`क5 स प्रथामांदृlया “तिवेशर्ष अलिधाति5यामां” क अ"ग4 अपुरधा पुरिरलतिक्षे हू` हूH । अतिभया`क्त्रु द्वार जाति प्रमांण-पुत्रु भ प्रस् तिकया गया हूH, लिजासक आधार पुर तिवेशर्ष अलिधाति5यामां कZ धारएh
5 / 9 (Cr. A. No.-517 of 2026) जा`ड़ी गई हूw । तिवेशर्ष अलिधाति5यामां कZ धार -18 क प्रवेधा5 आकतिर्ष4 हू`5 स अपु लथा; क अतिग्रमां जामां5 आवेदा5 स्वे कर तिकए जा5 या`ग्या 5हूq हूH । अपु लथा;/अतिभया6 क तिवेरुद्ध पुIवे4 मांV आकर अलिधाति5यामां क अ"ग4 एक आपुरलिधाक प्रकरण पु"जा द्ध रहू हूH, लिजासस उसक आपुरलिधाक आचरण पुरिरलतिक्षे हू` हूH । प्रश्5धा 5 अतिग्रमां जामां5 ति5रस्
स""धा आदाश उतिच और वेHधा हूH । अz जामां5 स""धा प्रस् अपु ल _रिरजा तिकया जाए ।
9. उभयापुक्षे क क4 श्रीवेण तिकया था अतिभल_ एवे" क स यार क पुरिरश ल5 तिकया गया ।
10.
अपु लथा; द्वार भर या 5गरिरक सरक्षे स"तिहू, 2023 कZ धार 482 क अ"ग4 अतिग्रमां जामां5 प्रदा5 तिकए जा5 हू प्रस् आवेदा5, तिवेचरण न्यायालया द्वार अ5सIतिच जाति एवे" अ5सIतिच जा5जाति (अत्याचर ति5वेरण) अलिधाति5यामां कZ धार 18 मांV ति5तिहू प्रति"धा क` दृतिlग र_ हूfए ति5रस् तिकया गया हूH; थातिपु, याहू उल्ले_5 या हूH तिक उ6 प्रति"धा क स""धा मांV मां55 या सवे|च्च न्यायालया 5 Dr. Subhash Kashinath Mahajan vs. State of Maharashtra and another, प्रकतिश (2018) 6 एसस स 454, मांV तिवेचर कर हूfए याहू प्रतिपुतिदा तिकया हूH तिक यातिदा अतिभया6 प्रथामांदृlया याहू प्रदातिश4 कर5 मांV सक्षेमां हू` तिक उसक द्वार क`ई अत्याचर करिर 5हूq तिकया गया हूH था आर`पु दाभ4वे5पुIवे4क लगए गए हूw, ` ऐस ण्डिस्थाति मांV धार 18 क अ"ग4 ति5तिहू प्रति"धा आकतिर्ष4 5हूq हू`ग; इस स"दाभ4 मांV उ6 ति5ण4या क अ5च्छदा 50, 51, 53 एवे" 55 प्रस"तिगक हूw, जा` ति5म्55सर हूw :—
“50. We have no quarrel with the proposition laid down in the said judgment that persons committing offences under the Atrocities Act ought not to be granted anticipatory bail in the same manner in which the anticipatory bail is
6 / 9 (Cr. A. No.-517 of 2026) granted in other cases punishable with similar sentence. Still, the question remains whether in cases where there is no prima facie case under the Act, bar under Section 18 operates can be considered. We are unable to read the said judgment as laying down that exclusion is applicable to such situations. If a person is able to show that, prima facie, he has not committed any atrocity against a member of SC and ST and that the allegation was mala fide and prima facie false and that prima facie no case was made out, we do not see any justification for applying Section 18 in such cases. Consideration in the mind of this Court in Balothia (1995 3 SCC 221) is that the perpetrators of atrocities should not be granted anticipatory bail so that they may not terrorise the victims. Consistent with this view, it can certainly be said that innocent persons against whom there was no prima facie case or patently false case cannot be subjected to the same treatment as the persons who are prima facie perpetrators of the crime. 51.
In view of the decisions in Vilas Pandurang Pawar (2012 8 SCC 795) and Shakuntla Devi (2014 15 SCC 521), the learned ASG has rightly stated that there is no absolute bar to grant anticipatory bail if no prima facie case is made out inspite of validity of Section 18 of the Atrocities Act being upheld. xxxx xxxx xxxx xxxx xxxx xxxx xxxx xxxx
53. It is well settled that a statute is to be read in the context of the background and its object. Instead of literal interpretation, the court may, in the present context, prefer purposive interpretation to achieve the object of law. Doctrine of proportionality is well known for advancing the object of Articles 14 and 21. A procedural penal provision affecting liberty of citizen must be read consistent with the concept of fairness and reasonableness. 7 / 9 (Cr. A. No.-517 of 2026) xxxx xxxx xxxx xxxx xxxx xxxx xxxx xxxx
55. In the present context, wisdom of legislature in creating an offence cannot be questioned but individual justice is a judicial function depending on facts. As a policy, anticipatory bail may be excluded but exclusion cannot be intended to apply where a patently mala fide version is put forward. Courts have inherent jurisdiction to do justice and this jurisdiction cannot be intended to be excluded. Thus, exclusion of Court’s jurisdiction is not to be read as absolute.”
11.
तिवेशर्ष अलिधाति5यामां कZ धार-18 क हू अतिग्रमां जामां5 पुर प्रति"धा क € मां55 या उच्चमां न्यायालया द्वार न्यायादृl" Prathvi Raj Chauhan (पुIवे|"6) मांV ति5म्55सर अवेधारण व्या6 कZ गया हूHz-
“Even though, offence under the Act of 1989 is registered, where application for grant of anticipatory bail is filed, the Court is required to apply its mind to the relevant provisions of law and considerations as specified by the Supreme Court in the case of Prathvi Raj Chauhan (Supra) and if material on record leads to satisfaction that the complaint does not make out a prima facie case, for applicability of the provisions of the Act of 1989, the bar created under Section 18 of the Act of 1989 shall not apply and in appropriate cases of exceptional nature, benefit of anticipatory bail could be admitted to the applicant.”
12. उपुर`6 न्यायादृl" क प्रकश मांV, तिवेचरधा 5 मांमांल मांV अतिभल_ क पुरिरश ल5 स याहू प्रथामांदृlया पुरिरलतिक्षे हू` हूH तिक लिजास स्वेरूपु कZ तिशकया अपु लथा; क तिवेरुद्ध अतिभया`क्त्रु द्वार कZ गई हूH, उस स्वेरूपु एवे" लगभग उस समांयावेलिधा स स""लिधा एक अन्या तिशकया भ अतिभया`क्त्रु द्वार तिदा5"क 10/09/2025 क` था5 सपुल, लिजाल दाग4 मांV एक अन्या व्याति6, मांक श स`5कर, क तिवेरुद्ध प्रस् कZ गई था , लिजासमांV वे4मां5 मांV तिवेचरण
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A. No.-517 of 2026) ल"ति हूH । उ6 प्रकरण मांV अतिभया`क्त्रु द्वार लिललि_ रूपु स याहू भ उल्ले_ तिकया गया था तिक उसक पुस जाति प्रमांण-पुत्रु उपुलब्धा 5हूq हूH । याहू भ उल्ले_5 या हूH तिक अपु लथा; क तिवेरुद्ध प्रस् लिललि_ तिशकया मांV इस थ्या क क`ई उल्ले_ 5हूq तिकया गया तिक अतिभया`क्त्रु तिकस जाति वेग4 स स""लिधा हूH, अथावे अपु लथा; द्वार उसकZ जाति कZ जा5कर र_ हूfए या आशयापुIवे4क क`ई अपुरधा तिकया गया हू` । इस प्रकर, अतिभया`क्त्रु
कZ तिशकया क आधार पुर जा` प्रथामां सIच5 पुत्रु पु"जा द्ध कZ गई, वेहू प्रर"भ मांV क वेल भर या न्याया स"तिहू, 2023 कZ धार 69 क अ"ग4 दाजा4 कZ गई था , 5 तिक “तिवेशर्ष अलिधाति5यामां” क प्रवेधा5u क हू । ऐस ण्डिस्थाति मांV याहू थ्या भ मांहूत्वेपुIण4 हूH तिक अपु लथा; 5 अपु5 तिवेरुद्ध अपुरधा पु"जा द्ध हू`5 स पुIवे4 हू तिदा5"क 27/01/2026 क` पुलिलस अधा क्षेक, दाग4 क समांक्षे एक लिललि_ तिशकया प्रस् कZ था , लिजासमांV याहू आर`पु लगया गया था तिक अतिभया`क्त्रु द्वार उसस ₹5,00,000/- कZ मां"ग कZ जा रहू हूH था मां"ग पुIर 5 कर5 पुर उस झाIठ प्रकरण मांV फh स5 कZ धामांकZ दा जा रहू हूH । सथा हू , याहू भ पुरिरलतिक्षे हू` हूH तिक समां5 समांयावेलिधा स स""लिधा इस प्रक, ति क एक अन्या प्रकरण अतिभया`क्त्रु द्वार अन्या व्याति6 क तिवेरुद्ध भ प्रस् तिकया गया हूH ।
13. ऐस दाश मांV अतिभल_ पुर उपुलब्धा समांस् पुरिरण्डिस्थातियाu क` दृतिlग र_ हूfए था मां55 या सवे|च्च न्यायालया द्वार प्रतिपुतिदा तिवेलिधा लिसद्ध" क आल`क मांV अपु लथा; क मांमांल अतिग्रमां जामां5 या`ग्या पुया जा हूH ।
14. अz प्रश्5धा 5 आदाश क` अपुस् कर हूfए अपु लथा; जाग, सहू. क अतिग्रमां जामां5 आवेदा5 स्वे कर तिकया जा हूH । याहू आदातिश तिकया जा हूH तिक अपु लथा; था5 जामांल क अपुरधा क्रमां"क-69/2026 मांV तिगरफ्र कZ अवेस्था मांV, प्रकरण क अ"तिमां ति5रकरण
9 / 9 (Cr. A. No.-517 of 2026) क अपु5 ति5यातिमां उपुण्डिस्थाति हू रु.
25,000/- (पुच्च स हूजार रुपुया) क व्याति6ग मांचलक था उ5 हू रतिश क एक सक्षेमां जामां5दार स""लिधा पुलिलस अलिधाकर या न्यायालया क स"तिl या`ग्या प्रस् कर5 पुर, ति5म्5लिललि_ श|" क अधा 5 अतिग्रमां जामां5 पुर रिरहू तिकया जाएगz– .i अपु लथा;, पुलिलस कZ तिवेवेच5 एवे" अ5स"धा5 मांV पुIण4 सहूया`ग करग । ii. अपु लथा;, मांमांल क थ्याu स पुरिरतिच तिकस व्याति6 अथावे तिकस भ सक्षे क` प्रत्याक्षे या अप्रत्याक्षे रूपु स प्रल`भ5, दावे या धामांकZ 5हूq दाग । iii. अपु लथा;, न्यायालया कZ पुIवे4 अ5मांति क ति5 भर कZ स मां स हूर 5हूq जाएग । iv. अपु लथा;, तिवेचरण क दाaर5 ति5 तिकस अ5वेश्याक स्थाग5 कZ मांhग तिकए, प्रत्याक ति5या तिलिथा पुर स""लिधा न्यायालया क समांक्षे उपुण्डिस्था रहूग था पुर क्षेण मांV ईमां5दार पुIवे4क सहूया`ग करग । v. अपु लथा;, जामां5 पुर रिरहू हू`5 क पुश्च€ जामां5 कZ स्वे"त्रु क दारुपुया`ग 5हूq करग और तिकस भ प्रकर कZ आपुरलिधाक गतितिवेलिधा मांV स"लिलप्त 5हूq हू`ग । सहू /- (स"जाया क मांर जायासवेल) न्यायाधा श पो
मन