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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 9260 of 2026 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुनरीिक्षत वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक संदीप कु मार की ओर से मु०अ०सं० 562/2025, अन्तगर्त धारा धारा-61(2)/ 115(2)/ 351(2)/ 352/ 69 बी.एऩ.एस. थाना- गौरी बाजार, िजला देविरया में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री चन्दन िसह को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। प्रथम सूचना िरपोटर् तथाकिथत घटना से लगभग 3 माह पश्चात पंजीकृ त करायी गयी है, लेिकन देरी का कोई स्पष्ट कारण प्रथम सूचना िरपोटर् में दजर् नहीं है। अिभयोजन पक्ष के अनुसार उक्त मामले की तथाकिथत पीिड़ता के पित की मृत्यु लगभग 4 वषर् से अिधक समय पूवर् हो चुकी है। तथाकिथत पीिड़ता के दो बच्चे है एवम् पहली बार आवेदक द्वारा जबरजस्ती कब शारीिरक संबंध बनाया गया इस बात का प्रथम सूचना िरपोटर् में कोई उल्लेख नहीं है। आवेदक द्वारा तथाकिथत पीिड़ता को मुम्बई ले जाना व शारीिरक संबंध बनाने की बात प्रथम सूचना िरपोटर् में कही गयी है, लेिकन िकस ितिथ व समय पर आवेदक तथाकिथत पीिड़ता को मुम्बई ले गया एवम् मुम्बई में िकस स्थान पर िकतने िदनों तक रखा व िकतनी बार संबंध बनाया इस बात का प्रथम सूचना िरपोटर् में कही भी उल्लेख नहीं है। आवेदक द्वारा िदनांक 25.09.2025 को शारीिरक संबंध बनाने की बात कही गयी है, लेिकन जबरन संबंध बनाने की बात नहीं कही गयी है। इस प्रकार प्रथम सूचना िरपोटर् की संपूणर् कहानी स्वयं में संदेहास्पद प्रतीत होती है। वास्तिवकता यह है िक वािदनी मुकदमा व आवेदकएक ही गांव के है व तथाकिथत पीिड़ता के पिरवार से आवेदक के पिरवार के मध्य काफी पुराने समय से जमीनी रंिजश चला आ रहा है। Versus Counsel for Applicant(s) : Hemant Kumar Dubey Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Sandeep Kumar .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) िजससे रंज होकर फजीर् व नुमाइशी कहानी के आधार पर उक्त अिभयोग पंजीकृ त करा िदया गया। िजसकी वास्तिवकता से कोई वास्ता सरोकार नहीं है। वािदनी मुकदमा आवेदक से लगभग 15 वषर् से अिधक बड़ी है इस प्रकार प्राथीर् द्वारा कदािप उक्त अपराध कािरत िकया जाना संभव नहीं है तथाकिथत पीिड़ता िरश्ते में आवेदक की चाची लगती है िजनका दजार् माँ के समान होता है एवम् िजससे यह स्पष्ट है िक आवेदक़ द्वारा उक्त अपराध कािरत नहीं िकया गया है। वािदनी मुकदमा द्वारा आवेदक की जमीनों को हड़पने का यथासंभव प्रयास िकया जाता रहा है, लेिकन अपने मंसूबे में सफल न होने पर फजीर् मनगढ़न्त बनावटी व नुमाइशी कहानी तैयार कर उक्त अिभयोग पंजीकृ त करा िदया गया है। आवेदक का कोई आपरािधक इितहास नहीं है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन
िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 20.12.2025 से कारागार में िनरुद्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक 4. पीिड़ता ने अपने धारा 183 बी.एन.एस. के बयान में कथन िकया िक मेरे गांव का संदीप पुत्र पप्पु ने मुझे कहा िक वो मुझसे शादी करेगा। संदीप के मा-बाप भी बोले की वो मेरी शादी संदीप से करा देंगे। संदीप ने मुझे शादी का झांसा देकर मेरे साथ शारीिरक संबंध बनाया। गांव में भी कई बार संबंध बनाया। िफर मुझे डेढ़ साल पहले देविरया लेकर आया। यहाँ भी कई बार शारीिरक संबंध बनाया। अब संदीप और उसके माता-िपता शादी नहीं कर रहे हैं। मना कर िदया है। मुझे माचर् में संदीप बम्बई लेकर आया। िफर ढाई माह बाद मुझे देविरया ले आया। बम्बई में भी शारीिरक संबंध बनाया। मुझे देविरया लाकर िफर शारीिर संबंध बनाया। बोला की मेरे आधार काडर् गाँव छू ट गया है। देविरया में ही कोटर् मैिरज हो जायेगा। शादी नहीं िकया। मुझे कोतवाली रोड पर ले जाकर मुझे धक्का देकर भाग गया। फोन से धमकी दे रहा है िक कहीं जाओगी तो तुमको और तुम्हारे बच्चों को जान से मार देंगे।" तथा पीिड़ता ने अपने मेिडकल प्रपत्र में भी कथन िकया िक आवेदक/अिभयुक्त द्वारा पीिड़ता को शादी का झाँसा देकर पीिड़ता के साथ शारीिरक संबंध बनाये जाने तथा पीिड़ता ने अपनी अंदरुनी जांच करवाये जाने का कथन िकया है। आवेदक द्वारा कािरत अपराध गंभीर व जघन्य प्रकृ ित का है। इसिलए, अिभयुक्त को जमानत पर पर न छोड़ा जाय।
5.
वतर्मान मामले में जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए एवं उभय पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदक की भूिमका और इस मामलें के इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए यह जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है। अतः यह जमानत आवेदन पत्र BAIL No. 9260 of 2026 2
अस्वीकार िकया जाता है।
6. तद्नुसार, यह जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाता है। March 18, 2026 S.Mishra BAIL No. 9260 of 2026 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad