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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 17234 of 2026 Court No. - 82 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. आवेिदका की ओर से धारा 528 भारतीय सुर्षा संिहता के अंतगर्त यह आवेदन प्ऴ, वाद सं० 1735/2025 (महेश शाही बनाम संजय िसह व अन्य) जो िसिवल जज ( जू०िड०) एफ.टी.सी., क्ष सं० 2, देविरया ्षारा पािरत ्ऺसं्ञान/आदेश िदनांक 06.04.2026 को अपास्त करने हेतु योिजत िकया गया है।
2. आवेिदका के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
3.
आवेिदका के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक िवप्षी संख्या-२, आवेदक का पु्ऴ है और आवेिदका की आयु लगभग 81 वषर् है। आवेिदका के पित की मृत्यु 10.02.2024 को गुदरॏ की बीमारी के कारण हो गई थी और आवेिदका ने अपना एक गुदार् दान िकया था, िकतु वे जीिवत न रह सके । अपने पित की मृत्यु के प्ाात, आवेिदका अपने पु्ऴ के साथ देविरया में रहने लगी और वह वृ्धावस्था की शारीिरक बीमािरयों से भी ्षिसत है, िकतु उसका पु्ऴ उसकी देखभाल नहीं कर रहा था। इसिलए आवेिदका ने गोरखपुर िस्थत अपने मायके जाने का िनणर्य िलया और अपने चचेरे भाई एवं भतीजों को गोरखपुर बुलाया तािक वहां उसे बेहतर उपचार िमल सके , क्योंिक उसका पु्ऴ न तो उसके साथ अच्छा ्िवहार कर रहा था और न ही उसके उपचार की उिचत ्िवस्था कर रहा था तथा वह आवेिदका को उसके चचेरे भाई और भतीजों के साथ भेजने के िलए भी तैयार नहीं था। िदनांक ३० अ्ऺैल, २०२५ को उसके भतीजे सौरभ िसह व आिदत्य िसह तथा चचेरे भाई राम कु मार िसह आवेिदका को अपने साथ ले जाने के िलए आए, िकतु उसका पु्ऴ तैयार नहीं था और उसके िलए उन्होंने एक शपथ- प्ऴ तैयार िकया और आवेिदका के हस्ता्षर ्ऺाप्त िकए तथा आवेिदका ने अपने कल्याण को ध्यान में रखते हुए उस पर हस्ता्षर कर िदए। तत्प्ाात, ३ मई, २०२५ को आवेिदका के अनुरोध पर उसकी पु्ऴी िमथलेश िसह पत्नी संजय कु मार िसह गोरखपुर आई और आवेिदका को अपनी स्वतं्ऴ इच्छा से और िबना िकसी दबाव के Versus Counsel for Applicant(s) : Ved Byas Mishra Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Vimala Shahi .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) अपने साथ झाँसी ले गई। इसके उपरांत, आवेिदका को यथाथर् सुपर स्पेशिलस्ट अस्पताल में भतर् कराया गया और वह िदनांक 08.05.2025 से 12.05.2025 तक भतर् रही। आवेिदका कैं सर से पीिड़त है और उसका उपचार झाँसी एवं ग्वािलयर में चल रहा था और यिद वह अपनी पु्ऴी के पास न आती, तो उसका जीवन नहीं बचाया जा सकता था। िवप्षी संख्या-२ ने िदनांक 09.07.2025 को मुख्य न्याियक मिजस््िेट, देविरया के सम्ष चार ्िि्वयों, यथा संजय कु मार िसह (दामाद) पु्ऴ ्शीकांत िसह, िमथलेश िसह पत्नी संजय कु मार िसह, ्ऺदीप िसह दामाद आसमान िसह और अचर्ना िसह पत्नी ्ऺदीप िसह के िवरु्ध उपरो्व आपरािधक पिरवाद दायर िकया, िजसमें आरोप लगाया गया िक वे आवेिदका को उसकी स्वतं्ऴ इच्छा के िवरु्ध जबरन ले गए
हैं और उसकी पत्नी के कब्जे से मूल्यवान आभूषण भी ले गए हैं। तत्प्ाात, िव्षान न्यायालय ने पिरवाद पर सं्ञान िलया और बी.एन.एस. की धारा २२३ के तहत बयान दजर् करने हेतु 26.11.2025 की ितिथ िनधार्िरत की। िवप्षी संख्या-२ का बयान 09.11.2025 को दजर् िकया गया है िजसमें उसने एक दूसरी कहानी बताई है और कहा है िक उसकी माँ अपनी बहन ( आवेदक की पु्ऴी) के साथ गई है। बयान में ितिथ और समय का उल्लेख नहीं िकया गया है, अतः उ्व बयान िवरोधाभासी है। इसिलए, आवेिदका का धारा 223 भारतीय नागिरक सुर्षा संिहता का बयान अंिकत कराने हेतु िनदरॏिशत िकया जाय। उपरो्व तथ्यों से पिरलि्षत है िक िवप्षी सं० 2 ्षारा दुराशय के तहत उसके दो बेिटया व दो दामादों के िवरू्ध वतर्मान पिरवाद योिजत िकया गया है। उपरो्व ्ऺश्नगत आदेश समुिचत िववेचना एवं तथ्यों पर आधािरत नहीं है। इसिलए, ्ऺश्नगत आदेश ्ऴुिटपूणर् है एवं अपास्त िकए जाने योग्य है।
4. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने कथन िकया िक ्ऺश्नगत आदेश में कोई िविधक अथवा ्षे्ऴािधकार संबंधी ्ऴुिट पिरलि्षत नहीं हो रही है। ्ऺश्नगत आदेश को अपास्त करने हेतु जो तकर् ्ऺस्तुत िकए गए वे आधारहीन है, क्योंिक वतर्मान आवेदन अपिरपक्व स्ऴ पर है। इसिलए, ्ऺश्नगत आदेश में हस्त्षेप िकए जाने की कोई आवश्यकता ्ऺतीत नहीं हो रही है।
5. उभय प्ष के िव्षान अिधव्वागण के तकॏल को ्शवणोपरांत एवं प्ऴावली व ्ऺश्नगत आदेशों का सम्यक रूपेण पिरशीलन िकया तथा िव्षान अवर न्यायालय ्षारा पािरत ्ऺश्नगत आदेश समुिचत िववेचना पर आधािरत है, सकारण एवं उिचत आदेश है। उसमें कोई सारवान अिनयिमतता, अनौिचत्यता या ्ऺि्वया या ्षे्ऴािधकार संबंधी ्ऴुिट पिरलि्षत नहीं होती है। इसिलए, यह आवेदन प्ऴ को िनरस्त िकए जाने योग्य है।
6. तद्नुसार, आवेिदका की ओर से धारा 528 भारतीय नागिरक सुर्षा संिहता के अंतगर्त ्ऺस्तुत यह आवेदन प्ऴ िनरस्त िकया जाता है।
7.
कायार्लय को िनदरॏश िदया जाता है िक इस आदेश की एक ्ऺितिलिप संबंिधत अवर न्यायालय को अिवलम्ब भेजना सुिनि्ात िकया जाय। NA528 No. 17234 of 2026 2
8. यिद इस वाद में कोई अंतिरम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय। May 5, 2026 CP.sahani NA528 No. 17234 of 2026 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad