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High Court of Rajasthan · body

2026 DAILYLAW 17414 (RAJ)

JEERA DURGA S/O SHRI DHARAMSHAKA v. MANAGER SHREE RAM FERTILIZERS AND CHEMICALS

CW/7114/2025 · 2026-01-06

Sameer Jain

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

[2026:RJ-JP:155] HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN BENCH AT JAIPUR S.B. Civil Writ Petition No. 7114/2025 Jeera Durga S/o Shri Dharamshaka, Aged About 62 Years, Resident Of Uriya Basti, Talwandi, Kota ----Petitioner Versus 1. Manager Shree Ram Fertilizers And Chemicals, Shree Ram Nagar, Kota. 2. Manager, M/s Erectors And Fabricators, E-77, Indraprastha Udyogic Khsetra, Kota ----Respondents For Petitioner(s) : Ms. Sarita Choudhary for Mr. Suresh Kashyap For Respondent(s) : HON'BLE MR. JUSTICE SAMEER JAIN Judgment 06/01/2026 1. The present petition has been filed against the award dated 19.11.2024 passed by the Labour Court, Kota. 2. Learned counsel for the petitioner has submitted that the order is perverse and bad in law. However, no specific grounds have been spelled out to refute the findings in the impugned award. 3. Heard and perused the impugned award. 4. Paras 12 and 13 of the impugned award read as under:- “12. इस संबंध मे पारर का यह करन रहा है कक कदनांक 05.09.2003 को उसकी डूटी समाप होने के पूरर ही पकतपकी संखा 2 ने अकारण ही गाली गलौच करके भगा कदया, कजसके कारण पारर का सास खराब हो गया और रह कदनांक 6, 7 र 8 कसतमर 2003 को बीमारी के कारण डूटी पर उपससत नहीं हो सका। कदनांक 09.09.2003 को पारर पातः [2026:RJ-JP:155] (2 of 3) [CW-7114/2025] 7.45 बजे डूटी पर उपससत हआ तो उसे पकतपकी संखा 2 ने कोई काम नहीं और सोर मे बैठा कदया। दोपहर के समय पकतपकी संखा 2 ने पारर को कहा कक शाम को तुनारा कहसाब कर देगे। पारर को पकतपकी संखा 2 ने 4 बजे तक भी कोई उतर नहीं कदया और बाद मे घर रापस भेज कदया। पारर दारा बार- बार डूटी पर उपससत होने के बाद भी पकतपकों संखा 2 दारा पारर को कदनांक 05.09.2003 के बाद डूटी पर नहीं कलया गया और उसकी सेराएं कदनांक 05.09.2003 से ही समाप कर दी गयी। इसके खणन मे अपारर संखा 2 के कररद एकपकीय कायरराही होने से उसकी ओर से कोई जराब पेश नहीं ककया गया है परंतु अपारर संखा 1 की ओर से अपने जराब मे यह करन ककया गया है कक पारर जो अपारर संखा 2 के यहां कनयोकजत रा और पारर के दारा सेरा से सयं पररताग ककया गया है, इस संबंध मे अपारर संखा 2 की ओर से पारर के अकधरका को पेकषत जराब डबू, 17 पदकशरत हआ है। 13. हसगत पकरण मे साक के कररेचन से यह तथ पमाकणत है कक पारर अपारर संखा 2 के दारा कनयोकजत रा और उसी के दारा पारर को रेतन कदया जाता रा कजसके संबंध मे पारर दारा भी अपनी साक मे सीकारोसक की गयी है। पतारली पर अरससत जराब पदशर डबू. 17 कजसमे पारर के अकधरका दारा पेकषत नोकटस के जराब मे अपारर संखा 2 की ओर से जराब पारर के अकधरका को उनके नोकटस के जराब मे कदया गया है, कजसमे करन ककया गया है कक " पारर को जो कायर बताया गया रा रह रे नहीं कर रहे रे अतः उनसे कायर करने को कहा गया तो उनोंनने कहा कक उसे तो आपके यहां कायर नहीं करना है, उसका कहसाब कर कदया जारे।" ऐसे मे पारर के दारा अपारर संखा 2 की सेरा से पररताग ककये जाने के करनों का अंकन ककया गया है। पारर दारा उक जराब पदशर डबू, 17 के पशात अपारर संखा 2 के यहां डूटी जोईन ककये जाने हेतु उपससत हअ हो तरा अपारर संखा 2 के दारा डूटी पर नहीं कलये जाने के पशात ककसी पकार का पताचार डूटी पर कलये जाने के संबंध मे पारर दारा अपारर संखा 2 के समक ककया गया हो, ऐसा पतारली के अरलोकन से पकट नहीं है। पारर की ओर से ऐसा कोई करन नहीं ककया गया है कजससे यह पकट होता हो कक अपारर संखा 2 या अन ककसी से उसकी रंकजश हो और उसके कररद सेरा से हटाने की कायरराही दुभाररनारश की गई हो, ऐसी ससकत मे उपरोक कररेचन र करशलेषण के पररपेक मे यह पकट हो रहा है कक पारर को अपारर संखा 2 दारा सेरा से पृरक नहीं ककया गया है बसल पारर कदनांक 05.09.2003 के बाद यह सेरा पर कभी उपससत नही हआ और उसने सयं ही अपनी सेरा ताग [2026:RJ-JP:155] (3 of 3) [CW-7114/2025] (Abandon) की है। पारर की ओर से पसुत नाकयक दषांत हसगत पकरण के तथों र पररससकतयों से कभन होने से पकरण पर चसा नहीं होती है और पारर को ककसी पकार की कोई सहायता पदान नहीं करती है। ऐसी ससकत मे पारर, अपाररगण से कोई अनुतोष पाप का अकधकारी नहीं होने से रेफरेस भी इसी अनुरप उतररत ककए जाने ” योग है। 5. The learned Labour Court, while passing the impugned award, has given a categorical finding that present is a case of abandonment and not retrenchment. Further, on the basis of the same, it has specifically noted that even prior to 05.09.2003, the requisite requirement of ‘240 days’ in the preceding twelve months was not fulfilled. 6. In view of the above, and taking note of the fact that the order impugned is passed sans any irregularities and upon due consideration of material facts, this Court is not inclined to entertain the present petition and the same is accordingly, dismissed. 7. Pending applications, if any, stand disposed of. (SAMEER JAIN),J CHANDAN /8