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Allahabad High Court · body

2026 DAILYLAW 16098 (ALL)

ALIM AND 2 OTHERS v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

NA528/43133/2026 · 2026-10-06

Gautam Chowdhary

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 43133 of 2026 Court No. - 73 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदकगण की ओर से धारा 528 भारतीय सुरक्षा संिहता के अंतगर्त यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 0146/2019, अंतगर्त धारा 3/5/8 गौ हत्या िनवारण अिधिनयम व धारा 11 पशुओं के प्रित क्रू रता का िनवारण अिधिनयम, थाना नागल, िजला सहारनपुर में प्रेिषत आरोप पत्र, िदनांिकत 15.02.2020 से उद्भूत दािण्डक वाद सं० 471/2024 (State Vs. Alim and others), में िसिवल जज (जू०िड०) जे.एम. देवबंद, सहारनपुर द्वारा पािरत तलबी/प्रसंज्ञान आदेश िद० 14.03.2024 तथा इस वाद की संपूणर् कायर्वाही को अपास्त करने हेतु योिजत िकया गया है। 2. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को िवस्तार से सुना गया तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त दस्तावेजों एवं साक्ष्यों का गहन पिरशीलन िकया गया। 3. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता का तकर् है िक आवेदक के िवरुद्ध कोई अपराध प्रकट नहीं होता है और वतर्मान अिभयोजन दुभार्वनापूणर् इरादे से उत्पीड़न करने के उद्देश्य से संिस्थत िकया गया है। यहां प्रासंिगक तथ्य यह है िक प्रथम सूचना िरपोटर् के अनुसार घटना की िदनांक 29.06.2019 है तथा पुिलस किमयों द्वारा िनरीक्षण का समय राित्र 21:30 बजे और छापेमारी (राइड) का समय प्रातः 04:30 बजे है, परंतु प्रथम सूचना िरपोटर् में छापेमारी की कोई ितिथ अंिकत नहीं की गई है। इसिलए यह स्पष्ट है िक पुिलस द्वारा प्रस्तुत यह प्रथम सूचना िरपोटर् आवेदकों को झूठे मामले में फं साने के िलए जानबूझकर दजर् की गई है। पुिलस द्वारा किथत घटना स्थल से िदनांक 30.06.2019 को प्रातः 04:30 बजे 120 िकलोग्राम मांस, 1 जीिवत सफे द रंग का सांड (बैल), 1 गाय का िसर, 1 संपूणर् खाल, पूँछ, खुर और उपकरण की एक सुिनयोिजत (प्लांटेड) बरामदगी िदखाई गई है। उपयुर्क्त तथ्यों से पिरलिक्षत हो रहा है िक आवेदक के िवरूद्ध उपरोक्त धाराओं का कोई अपराध संिस्थत नहीं हो रहा है। उन्होंने अपने तकर् के समथर्न में कु छ दस्तावेजों और बयानों की ओर ध्यान आकिषत िकया। Versus Counsel for Applicant(s) : Mohd. Ibrar Khan, Umair Mahmood, Zeeshan Ali Khan Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Alim And 2 Others .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) 4. इसके िवपरीत, िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा िवरोध करते हुए यह कथन िकया गया िक प्रश्नगत मामले में पुिलस द्वारा िविधवत एवं उिचत िववेचना संपन्न की गई है। िववेचना के दौरान एकत्र िकए गए साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया अिभयुक्तगण के िवरुद्ध संज्ञेय अपराध पूणर् रूप से िसद्ध होता है, िजसके उपरांत िवचारण न्यायालय द्वारा पयार्प्त आधार पर प्रश्नगत प्रसंज्ञान एवं तलबी आदेश पािरत िकया गया है। आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा प्रश्नगत आदेश को अपास्त करने हेतु जो भी आधार और तकर् प्रस्तुत िकए गए हैं, वे िवचारण के स्तर पर साक्ष्य के मूल्यांकन से संबंिधत हैं और वतर्मान प्रक्रम पर वे पूरी तरह से बलहीन एवं अस्वीकार योग्य हैं। 5. इस चरण पर, पत्रावली के पिरशीलन से यह स्पष्ट होता है िक प्रथम सूचना िरपोटर् और आरोप पत्र में लगाए गए आरोपों तथा संकिलत साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया अपराध का गठन होता है। जहाँ तक प्रथम सूचना िरपोटर् में ितिथयों या समय के अंतर तथा बरामदगी को ' प्लांटेड' बताने का प्रश्न है, यह पूणर्तः रक्षात्मक साक्ष्य (Defense plea) का िवषय है, िजसकी सत्यता और िवश्वसनीयता का परीक्षण के वल और के वल िवचारण (Trial) के दौरान साक्ष्यों के आधार पर ही िकया जा सकता है। धारा 528 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के अंतगर्त इस स्तर पर साक्ष्यों की सत्यता की गहरी छानबीन करने या गुण-दोष के आधार पर मामले की प्रारंिभक जाँच करने का अिधकार इस न्यायालय को नहीं है, जब तक िक आरोप पत्र से पूणर्तः अनापश्यक या िनराधार मामला न प्रतीत होता हो। 6. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं एवं अिभलेख पर मौजूद सामग्री के अवलोकन से और इस चरण पर मामले के तथ्यों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता िक आवेदक के िवरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता है। न्यायालय के समक्ष िकए गए सभी अिभवचन (submissions) तथ्य के िववािदत प्रश्नों से संबंिधत हैं, िजनका इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एन.एन.एस. के अंतगर्त न्याियक िनणर्य नहीं िकया जा सकता है। इस चरण पर के वल प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला देखा जाना है, जैसा िक माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा आर.पी. कपूर बनाम पंजाब राज्य, ए.आई.आर. 1960 एस.सी. 866, हिरयाणा राज्य बनाम भजन लाल, 1992 एससीसी (िक्रिमनल) 426, िबहार राज्य बनाम पी.पी. शमार्, 1992 एससीसी (िक्रिमनल) 192 और अंत में झंडू फामार्स्युिटकल वक्सर् िलिमटेड बनाम मोहम्मद शराफु ल हक एवं अन्य (पैरा-10) 2005 एससीसी (िक्रिमनल) 283 के मामलों में प्रितपािदत कानून के आलोक में स्पष्ट िकया गया है। इसिलए, इस मामले की संपूणर् कायर्वाही को िनरस्त करने की प्राथर्ना को अस्वीकार िकया जाता है। 7. तद्नुसार, यह आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाता है। 8. कायार्लय को िनदेर्श िदया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप संबंिधत अवर न्यायालय को अिवलम्ब भेजना सुिनिश्चत िकया जाय। NA528 No. 43133 of 2026 2 9. यिद इस वाद में कोई अंतिरम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय। October 7, 2026 CP.sahani NA528 No. 43133 of 2026 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad