SUHANA AND ANOTHER v. THE STATE OF U.P. AND 3 OTHERS
WRIC/41105/2026 · 2026-10-08
Gautam Chowdhary
body2026
DailyLaw.ai
[ 2026 DAILYLAW 15743 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD WRIT - C No. - 41105 of 2026 Court No. - 73 HON'BLE DR.
GAUTAM CHOWDHARY, J. 1- याचीगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान स्थायी अिधवक्ता को सुना एवं पत्रावली का पिरशीलन िकया। 2- याचीगण की ओर से इस यािचका के माध्यम से, याचीगण एक परमादेश िरट जारी करने की मांग कर रहे हैं, िजसमें प्रत्युत्तरदातागण को याचीगण के शांितपूणर् जीवन (िलव इन िरलेशनिशप) में हस्तक्षेप न करने का िनदेर्श िदया जाए एवं संबंिधत अिधकािरयों को यह िनदेर्श देने की मांग की गयी है िक वे याचीगण को सुरक्षा प्रदान करें। 3- याचीगण के िवद्वान अिधवक्ता का कथन है िक दोनों याचीगण बािलग हैं। वे अिववािहत हैं और िलव-इन िरलेशनिशप में रह रहे हैं। उक्त के अितिरक्त यह भी कथन िकया गया है िक िनजी प्रितवाद और पिरवार के अन्य सदस्य नाराज हो गए हैं और उनके जीवन को गंभीर खतरा है क्योंिक उन्हें धमकी दी जा रही है और परेशान िकया जा रहा है। इसिलए, यािचकाकतार्ओं ने िनजी प्रितवािदयों से अपने जीवन की रक्षा के िलए पुिलस अिधकािरयों को िनदेर्श जारी करने के िलए भारत के संिवधान के अनुच्छेद 226 के तहत यह िरट यािचका दायर की है। 4- वतर्मान यािचका में उल्लेिखत मामले पर पूवर् में ही िरट-सी संख्या 35171/2025 ( आकांक्षा और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और तीन अन्य), िनणर्य िदनांिकत 17.12.2025 को आदेश पािरत िकया जा चुका है। वतर्मान मामले के तथ्य उल्लेिखत यािचका के समान हैं। इसिलए वतर्मान िरट यािचका का िनपटारा िनम्नानुसार िकया जा रहा है 5- यिद कोई व्यिक्त, जो वयस्क है, अपना जीवनसाथी चुन लेता है, तो िकसी अन्य व्यिक्त, चाहे वह पिरवार का सदस्य ही क्यों न हो, को आपित्त करने और उनके शांितपूणर् जीवन में बाधा डालने का अिधकार नहीं है। राज्य का यह कतर्व्य है, जैसा िक उन पर संवैधािनक दाियत्वों के अनुसार सौंपा गया है, िक वह प्रत्येक नागिरक के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करे। मानव जीवन के अिधकार को बहुत उच्च स्थान िदया जाना चािहए, चाहे नागिरक नाबािलग हो या वयस्क, िववािहत हो या अिववािहत। याचीगण द्वारा िववाह संपन्न न होने से उन्हें भारत के संिवधान में िनिहत मौिलक अिधकार से वंिचत नहीं िकया जा सकता, क्योंिक वे भारत के Versus Counsel for Petitioner(s) : Sudhakar Shukla Counsel for Respondent(s) : C.S.C. Suhana And Another .....Petitioner(s) The State Of U.P. And 3 Others .....Respondent(s) नागिरक हैं। न्यायालय यह मानने में कोई संकोच नहीं करता िक भारत के संिवधान के अनुच्छेद 21 के अंतगर्त प्राप्त मौिलक अिधकार का िवशेष महत्व है। यह पिवत्र अिधकार है और संवैधािनक व्यवस्था के अंतगर्त
िववाह संपन्न होने या न होने की िस्थित में भी इसकी रक्षा की जानी चािहए। 6- चूंिक याचीगण जो बािलग हैं, ने िववाह की पिवत्रता के िबना एक साथ रहने का िनणर्य िलया है और उनके इस िनणर्य पर न्यायालयों का कोई अिधकार नहीं है। यिद यािचकाकतार्ओं ने कोई अपराध नहीं िकया है, तो न्यायालय को उनकी सुरक्षा प्रदान करने की प्राथर्ना को स्वीकार न करने का कोई कारण नहीं िदखता। 7- अतः मामले के तथ्यों और पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय का यह मत है िक याचीगण को शांितपूवर्क एक साथ रहने की स्वतंत्रता है और िकसी को भी उनके शांितपूणर् जीवन में हस्तक्षेप करने की अनुमित नहीं दी जाएगी। जीवन का अिधकार संिवधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुिनिश्चत एक मौिलक अिधकार है, िजसमें यह प्रावधान है िक िकसी भी व्यिक्त को उसके जीवन और व्यिक्तगत स्वतंत्रता के अिधकार से कानून द्वारा स्थािपत प्रिक्रया के अलावा िकसी अन्य तरीके से वंिचत नहीं िकया जाएगा। 8- यिद याचीगण के शांितपूणर् जीवन में िकसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है, तो याचीगण इस आदेश की प्रमािणत प्रित के साथ संबंिधत पुिलस आयुक्त/एसएसपी/एसपी से संपकर् करेंगे और पुिलस अिधकारी यह सुिनिश्चत करने के बाद िक याचीगण वयस्क हैं और स्वेच्छा से एक साथ रह रहे हैं, याचीगण को तत्काल सुरक्षा प्रदान करेंगे। यिद याचीगण िशिक्षत हैं और वे अपने शैक्षिणक प्रमाण पत्र और कानून के तहत मान्य अन्य प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते हैं, िजनसे यह स्पष्ट होता है िक वे वयस्क हैं और अपनी मजीर् से रह रहे हैं, तो कोई भी पुिलस अिधकारी उनके िखलाफ कोई भी दंडात्मक कारर्वाई नहीं करेगा, जब तक िक उनके िखलाफ िकसी भी अपराध के संबंध में एफ.आई.आर.
दजर् न हो। यिद उनके पास आयु संबंधी कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं है और वे ग्रामीण पृष्ठभूिम से आते हैं और/या िनरक्षर/अधर्-साक्षर हैं, तो पुिलस अिधकारी उनकी सही उम्र का पता लगाने के िलए उनका ऑिसिफके शन टेस्ट करवा सकता है और कानून के अंतगर्त प्रदत्त दूसरी प्रिक्रयाओं का भी पालन कर सकता है। 9- उपरोक्त िदशा-िनदेर्शों के साथ वतर्मान यािचका िनस्तािरत की जाती है। October 9, 2026 S.Mishra WRIC No. 41105 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad