BABA BHAGWAN DAS YADAV @ MAHANT BHAGWAN DAS FALAHARI AND ANOTHER v. STATE OF U.P. AND 2 OTHERS
NA528/43318/2026 · 2026-10-06
Gautam Chowdhary
body2026
DailyLaw.ai
[ 2026 DAILYLAW 15735 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 43318 of 2026 Court No. - 73 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. आवेदकगण की ओर से धारा 528 भारतीय सुरक्षा संिहता के अंतगर्त यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 25/2026, अंतगर्त धारा 11(1)(a) पशुओं के प्रित क्रू रता का िनवारण, 325 भारतीय न्याय संिहता तथा धारा 5(ख) गौ हत्या िनवारण अिधिनयम, थाना कोटरा, िजला जालौन में प्रेिषत आरोप पत्र, िदनांिकत 26.04.2026 से उद्भूत वाद सं० 5212/206 (State Vs. Baba Bhagwan Das Yadav and another), जो मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट, जालौन िस्थत उरई द्वारा पािरत तलबी/प्रसंज्ञान आदेश िद० 27.05.2026 तथा इस वाद की संपूणर् कायर्वाही को अपास्त करने हेतु योिजत िकया गया है।
2. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता का तकर् है िक आवेदक के िवरुद्ध कोई अपराध प्रकट नहीं होता है और वतर्मान अिभयोजन दुभार्वनापूणर् इरादे से उत्पीड़न करने के उद्देश्य से संिस्थत िकया गया है। यहां प्रासंिगक तथ्य है िक आवेदकगण द्वारा कभी भी कोई क्रू रता नहीं की गई है। मंिदर पिरसर में कई आवारा गायें प्रवेश कर जाती हैं और प्रसाद को नुकसान पहुँचाती हैं, तथा आवेदकों ने के वल गाय के आने पर उसे भगाने का प्रयास िकया था। गभर्वती गाय का आरोप एक बाद का िवचार (मनगढ़ंत बात) है। कोई भी गाय घायल नहीं पाई गई, गाय का कोई भी स्वामी सामने नहीं आया, और न ही गाय का कोई जब्ती मेमो (पंजी) तैयार िकया गया। पशु िचिकत्सा अिधकारी द्वारा के वल एक गाय का िचिकत्सीय परीक्षण िकया गया, जो उक्त गाय के स्वामी आवेदक संख्या-1 हैं, और पशुिचिकत्सा डॉक्टर अथार्त् डॉ. िनितन कु मार गुप्ता ने अपने बयान में कहा है िक घायल गाय के िपछले बाएँ पैर के जोड़ पर के वल सूजन पाई गई। प्रथम सूचना िरपोटर् सुनी-सुनाई वायरल वीिडयो पर आधािरत है; मूल वीिडयो, मोबाइल या स्रोत को कभी भी ज़ब्त नहीं िकया गया और न ही भारतीय साक्ष्य अिधिनयम की धारा 63 के तहत Versus Counsel for Applicant(s) : Ram Krishna Yadav Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Baba Bhagwan Das Yadav @ Mahant Bhagwan Das Falahari And Another .....Applicant(s) State Of U.P. And 2 Others .....Opposite Party(s)
एफएसएल भेजा गया। धारा 63 बी.एस.ए.
के प्रमाण पत्र के िबना िद्वतीयक इलेक्ट्रॉिनक साक्ष्य के आधार पर अपराध िसद्ध नहीं िकया जा सकता है। उन्होंने अपने तकर् के समथर्न में कु छ दस्तावेजों और बयानों की ओर ध्यान आकिषत िकया।
4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने कथन िकया िक प्रश्नगत मामलें में समुिचत िववेचना के उपरांत िवचारण न्यायालय द्वारा पयार्प्त आधार पर प्रश्नगत आदेश पािरत िकया है तथा आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा प्रश्नगत आदेश को अपास्त करने हेतु जो तकर् प्रस्तुत िकए गए वे बलहीन है।
5. इस चरण पर, आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा उठाए गए तकर् में तथ्यात्मक िववाद का न्याियक िनणर्य (adjudication) और साक्ष्य का मूल्यांकन (appraisal) शािमल है।
6. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं एवं अिभलेख पर मौजूद सामग्री के अवलोकन से और इस चरण पर मामले के तथ्यों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता िक आवेदक के िवरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता है। बार (न्यायालय) के समक्ष िकए गए सभी अिभवचन (submissions) तथ्य के िववािदत प्रश्नों से संबंिधत हैं, िजनका इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एन.एन.एस. के अंतगर्त न्याियक िनणर्य नहीं िकया जा सकता है। इस चरण पर के वल प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला देखा जाना है, जैसा िक माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा आर.पी. कपूर बनाम पंजाब राज्य, ए.आई.आर. 1960 एस.सी. 866, हिरयाणा राज्य बनाम भजन लाल, 1992 एससीसी (िक्रिमनल) 426, िबहार राज्य बनाम पी.पी. शमार्, 1992 एससीसी (िक्रिमनल) 192 और अंत में झंडू फामार्स्युिटकल वक्सर् िलिमटेड बनाम मोहम्मद शराफु ल हक एवं अन्य (पैरा-10) 2005 एससीसी (िक्रिमनल) 283 के मामलों में प्रितपािदत कानून के आलोक में स्पष्ट िकया गया है। इसिलए, इस मामले की संपूणर् कायर्वाही को िनरस्त करने की प्राथर्ना को अस्वीकार िकया जाता है।
7. तद्नुसार, यह आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाता है।
8. कायार्लय को िनदेर्श िदया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप संबंिधत अवर न्यायालय को अिवलम्ब भेजना सुिनिश्चत िकया जाय।
9. यिद इस वाद में कोई अंतिरम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय। October 7, 2026 CP.sahani NA528 No. 43318 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad