Research › Search › Judgment

Allahabad High Court · body

2026 DAILYLAW 15711 (ALL)

CHAND MOUHAMMAD AND ANOTHER v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

NA528/43760/2026 · 2026-10-07

Gautam Chowdhary

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 43760 of 2026 Court No. - 73 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदकगण की ओर से धारा 528 भारतीय सुरक्षा संिहता के अंतगर्त यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 379/2021, अंतगर्त धारा 447 भारतीय दंड संिहता व धारा 3/4 िप्रवेन्शन ऑफ डेमेज टु पिब्लक प्रोपटीर् एक्ट, 1984, थाना ककोड़, िजला बुलन्दशहर में प्रेिषत आरोप पत्र, िदनांिकत 29.10.2021 से उद्भूत वाद सं० 10259/2022 (State Vs. Chand Mohammad and others), जो िसिवल न्यायाधीश (एस.डी.), फास्ट ट्रैक कोटर्, बुलन्दशहर द्वारा पािरत तलबी/प्रसंज्ञान आदेश िद० 23.06.2022 तथा इस वाद की संपूणर् कायर्वाही को अपास्त करने हेतु योिजत िकया गया है। 2. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता का तकर् है आवेदकगण के िवरुद्ध कोई अपराध प्रकट नहीं होता है और वतर्मान अिभयोजन दुभार्वनापूणर् इरादे से उत्पीड़न करने के उद्देश्य से संिस्थत िकया गया है। यहां प्रासंिगक है िक आवेदकगण के िवरुद्ध यह आरोप लगाया गया है िक आवेदकगण ने किब्रस्तान की भूिम पर अितक्रमण िकया है, जो पूणर्तः असत्य और िनराधार है। वास्तव में, उक्त गाटे के उपयुर्क्त क्षेत्र में एक मिस्जद िस्थत है तथा उक्त मिस्जद की कमेटी द्वारा वजूखाने का िनमार्ण कराया गया था और आवेदक भी वजूखाने के िनमार्ण में सहायता के िलए मजदूरी का कायर् कर रहे थे। िकतु सूचनाकतार् ने मनमाने ढंग से िकसी की सूचना पर आवेदकगण के िवरुद्ध उपयुर्क्त एफ.आई.आर. दजर् करा दी है। वतर्मान समय में उपयुर्क्त क्षेत्र मिस्जद के अंतगर्त आच्छािदत है। मौके के नक्शे की एक प्रित इसके साथ इस शपथ पत्र के संलग्नक संख्या-5 के रूप में संलग्न कर दािखल की जा रही है। एफ.आई.आर. और आरोप -पत्र (चाजर्शीट) में अंतिवष्ट आरोप, यिद उन्हें उनके संपूणर् रूप में भी स्वीकार कर िलया जाए, तो वे आवेदकों के िवरुद्ध किथत अपराधों के आवश्यक तत्वों को प्रकट नहीं करते हैं।उन्होंने अपने तकर् के समथर्न में कु छ दस्तावेजों और बयानों की ओर ध्यान आकिषत िकया। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने कथन िकया िक प्रश्नगत मामलें में समुिचत िववेचना के उपरांत िवचारण न्यायालय द्वारा पयार्प्त आधार पर प्रश्नगत आदेश पािरत िकया है तथा Versus Counsel for Applicant(s) : Mohammad Saif Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Chand Mouhammad And Another .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा प्रश्नगत आदेश को अपास्त करने हेतु जो तकर् प्रस्तुत िकए गए वे बलहीन है। 5. इस चरण पर, आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा उठाए गए तकर् में तथ्यात्मक िववाद का न्याियक िनणर्य (adjudication) और साक्ष्य का मूल्यांकन (appraisal) शािमल है। 6. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं एवं अिभलेख पर मौजूद सामग्री के अवलोकन से और इस चरण पर मामले के तथ्यों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता िक आवेदक के िवरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता है। बार (न्यायालय) के समक्ष िकए गए सभी अिभवचन (submissions) तथ्य के िववािदत प्रश्नों से संबंिधत हैं, िजनका इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एन.एन.एस. के अंतगर्त न्याियक िनणर्य नहीं िकया जा सकता है। इस चरण पर के वल प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला देखा जाना है, जैसा िक माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा आर.पी. कपूर बनाम पंजाब राज्य, ए.आई.आर. 1960 एस.सी. 866, हिरयाणा राज्य बनाम भजन लाल, 1992 एससीसी (िक्रिमनल) 426, िबहार राज्य बनाम पी.पी. शमार्, 1992 एससीसी (िक्रिमनल) 192 और अंत में झंडू फामार्स्युिटकल वक्सर् िलिमटेड बनाम मोहम्मद शराफु ल हक एवं अन्य (पैरा-10) 2005 एससीसी (िक्रिमनल) 283 के मामलों में प्रितपािदत कानून के आलोक में स्पष्ट िकया गया है। इसिलए, इस मामले की संपूणर् कायर्वाही को िनरस्त करने की प्राथर्ना को अस्वीकार िकया जाता है। 7. तद्नुसार, यह आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाता है। 8. कायार्लय को िनदेर्श िदया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप संबंिधत अवर न्यायालय को अिवलम्ब भेजना सुिनिश्चत िकया जाय। 9. यिद इस वाद में कोई अंतिरम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय। October 8, 2026 CP.sahani NA528 No. 43760 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad