ARVIND KUMAR MISHRA AND ANOTHER v. STATE OF U.P. AND ANOTHER
NA528/19764/2026 · 2026-05-13
Gautam Chowdhary
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DailyLaw.ai
[ 2026 DAILYLAW 1563 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 19764 of 2026 Court No. - 82 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. आवेदकगण की ओर से धारा 528 बी.एन.एन.एस. के अन्तगर्त यह आवेदन प्ऴ, पिरवाद सं० 842 सन 2020 (राम अिभलाष बनाम अरिवन्द कु मार व अन्य), अन्तगर्त धारा 323, 504, 506, 427 भा०दं०िव०, थाना मऊआइमा, िजला ्ऺयागराज में िवशेष मुख्य न्याियक मिजस््िेट, ्ऺयागराज ्षारा पािरत एकप्षीय आदेश िद० 25.03.2026 को अपास्त करने हेतु योिजत िकया गया है।
2. आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
3.
आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक न्याियक मिजस््िेट ्ऺयागराज ्षारा एकप्षीय आदेश िदनांक 25.03.2026 के ्षारा आवेदकगण की ओर से धारा 145(2) के तहत उन्मोचन आवेदन को इस आधार पर खािरज कर िदया गया है िक जब मामले की सुनवाई की गई तो आवेदक और उनके अिधव्वा उपिस्थत नहीं थे, जबिक आवेदक ्षारा आदेश फलक पर हस्ता्षर बनाये गये है। यहां ्ऺासंिगक है िक अिभयोजन प्ष के कथनानुसार, संि्षप्त में, मामला यह है िक िदनांक 06/08/2020 को शाम 5 बजे, आवेदक ने पिरवादी (िशकायतकतार्) की तरफ का दरवाजा खोला और िवरोध करने पर उन्होंने पिरवादी के साथ गाली-गलौज की तथा मारपीट की। पिरवादी के तकर् के अनुसार, उसने संबंिधत थाने की पुिलस को सूिचत िकया था, परंतु उसकी ्ऺथम सूचना िरपोटर् दजर् नहीं की गई, इसिलए उसने आवश्यक कारर्वाई के िलए िदनांक 12.10.2020 को विर्ष पुिलस अधी्षक, ्ऺयागराज को ्ऺाथर्ना प्ऴ िदया। पिरवादी ने किथत घटना के 2 महीने बाद, िदनांक 21.10.2020 को िवशेष मुख्य न्याियक मिजस््िेट, इलाहाबाद के सम्ष धारा 323, 504, 506, 452, 427 आई.पी.सी., थाना मऊआइमा, िजला ्ऺयागराज के अंतगर्त वषर् 2026 का पिरवाद प्ऴ ्ऺस्तुत कर दािखल िकया। पिरवादी ने िवशेष मुख्य न्याियक मिजस््िेट इलाहाबाद के न्यायालय के Versus Counsel for Applicant(s) : Pawnesh Tiwari, Pramila Tiwari, Somesh Tiwari Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Arvind Kumar Mishra And Another .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) सम्ष िदनांक 13.01.2021 को धारा 200 दंड ्ऺि्वया संिहता के तहत अपना बयान दजर् कराया। धारा 200 दंड ्ऺि्वया संिहता के तहत दजर् बयान के अवलोकन से यह पूरी तरह से स्प्ि हो जाएगा िक दोनों प्षों के बीच आबादी की भूिम के संबंध में एक दीवानी िववाद चल रहा है। उ्व बयान के अवलोकन से यह भी स्प्ि है िक आवेदकों के िवरु्ध उपयुर््व उल्लेिखत धाराओं तहत कोई भी ्ऺथम दृ्िया मामला नहीं बनता है। आगे यह भी कहा गया िक पिरवादी की पत्नी, गवाहों में से एक उषा िम्शा का बयान िदनांक 25.02.2021 को धारा 202 दंड ्ऺि्वया संिहता के तहत दजर् िकया गया है। उ्व गवाह के बयान के अवलोकन से यह पूरी तरह स्प्ि है िक उसने पिरवाद के िवपरीत िवरोधाभासी बयान िदया है। एक अन्य गवाह शारदा ्ऺसाद ितवारी, जो दूसरे िजले यानी िजला ्ऺतापग़ा का िनवासी है, का बयान िदनांक 03.02.2021 को धारा 202 दंड ्ऺि्वया संिहता के तहत दजर् िकया गया है। चूंिक यह गवाह दूसरे िजले का िनवासी और पिरवादी का िरश्तेदार है, इसिलए उसका साष्य िव्षसनीय
नहीं है। िरकॉडर् पर उपलब्ध साम्षी पर िवचार िकए िबना, िव्षान मिजस््िेट ने धारा 204 दंड ्ऺि्वया संिहता के तहत आदेश िदनांक 08.09.2021 पािरत िकया और आवेदकों को धारा 323, 504, 506, 427 आई.पी.सी. के तहत तलब िकया। पिरवाद के साथ पिरवादी ने कोई भी िचिकत्सकीय िरपोटर् ्ऺस्तुत नहीं की है, िजससे यह िस्ध हो सके िक उसे वैसी चोटें आई थीं जैसी पिरवाद में आरोप लगाया गया है। वास्तव में, न तो पिरवाद में लगाए गए आरोपों के अनुसार कोई घटना घटी और न ही उसे या उसके पिरवार के िकसी भी सदस्य को कोई चोट आई। समिनग आदेश के अवलोकन से यह पूरी तरह स्प्ि है िक धारा 452 आई.पी.सी. के तहत कोई अपराध नहीं बनता है और तदनुसार आवेदकों को धारा 452 आई.पी.सी.
के तहत तलब नहीं िकया गया है। आरोप के अनुसार, चोट घर के भीतर पहुंचाई गई है और इलेक््िॉिनक सामान को उसके अंदर तोड़ा गया है। यिद यह पाया जाता है िक आवेदकों ने घर में ्ऺवेश नहीं िकया, तो पिरवादी का आरोप पूरी तरह झूठा सािबत होता है। उल्लेखनीय है िक आवेदकगण ने िव्षान िवचारण अदालत के सम्ष पिरवाद वाद संख्या 842/2020 (राम अिभलाष बनाम अरिवद कु मार एवं अन्य), अंतगर्त धारा 323, 504, 506, 427 आई.पी.सी., थाना मऊआइमा, िजला ्ऺयागराज में अपने अिधव्वा के माध्यम से धारा 145(2) दंड ्ऺि्वया संिहता के तहत िदनांक 03.12.2025 को िवशेष मुख्य न्याियक मिजस््िेट के न्यायालय के सम्ष एक उन्मोचन आवेदन (discharge application) ्ऺस्तुत िकया था। धारा 245(2) दंड ्ऺि्वया संिहता के तहत िदए गए आवेदन पर कोई िनणर्य नहीं िलया गया और कोई आदेश पािरत नहीं िकया गया। आवेदक ने भारतीय नागिरक सुर्षा संिहता, 2023 की धारा 528 के तहत आवेदन संख्या 50989/2025 दायर करते हुए इस माननीय न्यायालय की शरण ली। भारतीय नागिरक सुर्षा संिहता, 2023 की धारा 268 के तहत आवेदकों को यह वैधािनक उपचार ्ऺाप्त है िक यिद कोई मामला नहीं बनता है, तो उन्हें िकसी भी पूवर्वतर् चरण में उन्मोिचत िकया जा सकता है। उपरो्व आवेदन संख्या 50979/2025 पर िवचार करते हुए, माननीय न्यायालय ने िदनांक 19.12.2025 को आदेश पािरत करने की कृ पा की, िजसमें िवचारण न्यायालय को आवेदक ्षारा ्ऺस्तुत उन्मोचन आवेदन पर उिचत आदेश पािरत NA528 No. 19764 of 2026 2
करने का िनदरॏश िदया गया था। आवेदक ने िदनांक 19.12.2025 के आदेश को िदनांक 13.02.2026 को िवचारण न्यायालय के सम्ष इस ्ऺाथर्ना के साथ ्ऺस्तुत िकया िक आदेश िदनांक 19.12.2025 के अनुपालन में आवेदक के उन्मोचन आवेदन का िनस्तारण िकया जाए। उपरो्व आदेश िदनांक 19.12.2025 के अनुपालन में, िवचारण न्यायालय ने आदेश िदनांक 25.02.2026 पािरत करने की कृ पा की, िजसमें पिरवादी को उन्मोचन आवेदन पर अपनी आपि्त दजर् करने का िनदरॏश देते हुए अगली ितिथया िनयत की गई तथा बाद में आवेदक अनुपिस्थित में ्ऺश्नगत आदेश पािरत कर िदया गया। इससे पिरलि्षत है िक संबंिधत िवचारण न्यायालय ्षारा पािरत ्ऺश्नगत आदेश सकारण एवं िविध सम्मत नहीं हैं, आवेदक के िवरू्ध उपरो्व धाराओं का कोई अपराध नहीं बनता है। उनका यह भी कथन है िक वह िवचारण न्यायालय में उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ दािखल करने की अनुमित चाहते हैं तथा उनके ्षारा दािखल िकए गए उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ का िनस्तारण करने को संबंिधत िवचारण न्यायालय को िनदरॏश िदया जाय।
4.
िव्षान अिधव्वा अपर शासकीय अिधव्वा ्षारा आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा के तकॏल का ्ऺबल िवरोध िकया गया ।
5. उभय प्ष के िव्षान अिधव्वागण के तकॏल को सुनने एवं प्ऴावली पर उपलब्ध अिभलेखों के अवलोकन से इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता है िक उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ के िखलाफ उपरो्व धाराओं के अन्तगर्त कोई अपराध गिठत नहीं होता है। उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ की ओर से जो तकर् ्ऺस्तुत िकए गए हैं वे िववािदत तािथ्यक ्ऺश्न से संबंिधत हैं, िजनके िवषय में इस न्यायालय ्षारा धारा 528 बी.एन.एन.एस. के आवेदन प्ऴ पर कोई फै सला देना संभव नहीं है, चूंिक उ्व तािथ्यक ्ऺश्नों का िविन्ाय िवचारण न्यायालय ्षारा ही साष्य आने के बाद िकया जा सकता है। इस संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय ्षारा R.P. Kapur Vs. State of Punjab, AIR 1960 SC 866, State of Haryana Vs. Bhajan Lal, 1992 SCC (Cri.) 426, State of Bihar Vs. P.P. Sharma, 1992 SCC (Cri.) 192 and lastly Zandu Pharmaceutical Works Ltd. Vs. Mohd. Saraful Haq and another, (Para-10) 2005 SCC (Cri.) 283 में िदए गए िनणर्यों में यह अवधािरत िकया गया है िक इस स्तर पर के वल ्ऺथम दृ्िया ही के स देखा जाना है। मुिल्जमान का जो िववािदत बचाव कथन है उस पर इस स्तर पर िवचार नहीं िकया जा सकता है।
6. हालांिक, यह आवेदन इस समुि्व के साथ िनस्तािरत िकया जाता है िक, यिद आवेदकगण ्षारा संबंिधत िवचारण न्यायालय के सम्ष 01 माह के अंदर उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ दािखल िकया जाता है तो संबंिधत िवचारण न्यायालय ्षारा उभय प्ष को सुनवाई का सम्यक अवसर ्ऺदान करते हुए उभय प्ष को सुनकर, उन्मोचन ्ऺाथर्ना प्ऴ का िनस्तारण उपलब्ध साष्य के आधार पर यथासंभव 02 माह में करना सुिनि्ात करेंगे। NA528 No. 19764 of 2026 3
7. उ्व िनदरॏशों के साथ यह ्ऺाथर्ना प्ऴ अिन्तम रूप से िनस्तािरत िकया जाता है। May 14, 2026 CP.sahani NA528 No. 19764 of 2026 4 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad