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Allahabad High Court · body

2026 DAILYLAW 15471 (ALL)

GIRISH KUMAR RAI AND 2 OTHERS v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

NA528/43715/2026 · 2026-10-07

Gautam Chowdhary

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 43715 of 2026 Court No. - 73 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदकगण की ओर से धारा 528 भारतीय सुरक्षा संिहता के अंतगर्त यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 44/2024, अंतगर्त धारा 7/10 उ०प्र० सावर्जिनक परीक्षा अिधिनयम 1998, थाना िसकन्दरपुर, िजला बिलया में प्रेिषत आरोप पत्र, िदनांिकत 11.03.2024 से उद्भूत दािण्डक वाद सं० 9282/2026 (Dharmendra Prasad Sharma and others Vs. State of U.P.), जो अपर मुख्य न्याियक मिजस्ट्रटे, प्रथम, बिलया द्वारा पािरत तलबी/प्रसंज्ञान आदेश िद० 10.09.2026 तथा इस वाद की संपूणर् कायर्वाही को अपास्त करने हेतु योिजत िकया गया है। 2. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता का तकर् है िक आवेदक के िवरुद्ध कोई अपराध प्रकट नहीं होता है और वतर्मान अिभयोजन दुभार्वनापूणर् इरादे से उत्पीड़न करने के उद्देश्य से संिस्थत िकया गया है। यहां प्रासंिगक है िक प्रथम सूचना िरपोटर् में उल्लेिखत आरोप पूरी तरह से सामान्य और सवर्व्यापी/अस्पष्ट (omnibus) प्रकृ ित के हैं। अिभयोजन पक्ष की कहानी/ कथानक की पुिष्ट (corroboration) के िलए प्रथम सूचना िरपोटर् में िकसी भी स्वतंत्र साक्षी का उल्लेख नहीं िकया गया है, और न ही "उत्तर प्रदेश सावर्जिनक परीक्षा (अनुिचत साधनों का िनवारण) अिधिनयम" की धारा 3 के प्रावधानों का उल्लंघन, उल्लंघन करने का प्रयास या दुष्प्रेरण करने के संबंध में धारा 9 के तहत आवेदकों के िवरुद्ध कोई िविशष्ट आरोप लगाया गया है। अतः संपूणर् आपरािधक कायर्वाही को तदनुसार रद्द (quash) िकया जाना चािहए, अन्यथा िवद्यालय के छात्रों का भिवष्य और िवद्यालय प्रबंधन की साख/चिरत्र प्रभािवत होगा, इसिलए संपूणर् आपरािधक कायर्वाही को रद्द िकया जाना सवर्था उिचत है। उन्होंने अपने तकर् के समथर्न में कु छ दस्तावेजों और बयानों की ओर ध्यान आकिषत िकया। Versus Counsel for Applicant(s) : Gopal Ji Rai Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Girish Kumar Rai And 2 Others .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने कथन िकया िक प्रश्नगत मामलें में समुिचत िववेचना के उपरांत िवचारण न्यायालय द्वारा पयार्प्त आधार पर प्रश्नगत आदेश पािरत िकया है तथा आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा प्रश्नगत आदेश को अपास्त करने हेतु जो तकर् प्रस्तुत िकए गए वे बलहीन है। 5. इस चरण पर, आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा उठाए गए तकर् में तथ्यात्मक िववाद का न्याियक िनणर्य (adjudication) और साक्ष्य का मूल्यांकन (appraisal) शािमल है। 6. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं एवं अिभलेख पर मौजूद सामग्री के अवलोकन से और इस चरण पर मामले के तथ्यों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता िक आवेदक के िवरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता है। बार (न्यायालय) के समक्ष िकए गए सभी अिभवचन (submissions) तथ्य के िववािदत प्रश्नों से संबंिधत हैं, िजनका इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एन.एन.एस. के अंतगर्त न्याियक िनणर्य नहीं िकया जा सकता है। इस चरण पर के वल प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला देखा जाना है, जैसा िक माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा आर.पी. कपूर बनाम पंजाब राज्य, ए.आई.आर. 1960 एस.सी. 866, हिरयाणा राज्य बनाम भजन लाल, 1992 एससीसी (िक्रिमनल) 426, िबहार राज्य बनाम पी.पी. शमार्, 1992 एससीसी (िक्रिमनल) 192 और अंत में झंडू फामार्स्युिटकल वक्सर् िलिमटेड बनाम मोहम्मद शराफु ल हक एवं अन्य (पैरा-10) 2005 एससीसी (िक्रिमनल) 283 के मामलों में प्रितपािदत कानून के आलोक में स्पष्ट िकया गया है। इसिलए, इस मामले की संपूणर् कायर्वाही को िनरस्त करने की प्राथर्ना को अस्वीकार िकया जाता है। 7. तद्नुसार, यह आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाता है। 8. कायार्लय को िनदेर्श िदया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप संबंिधत अवर न्यायालय को अिवलम्ब भेजना सुिनिश्चत िकया जाय। 9. यिद इस वाद में कोई अंतिरम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय। October 8, 2026 CP.sahani NA528 No. 43715 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad