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Allahabad High Court · body

2026 DAILYLAW 15288 (ALL)

SHAHABUDDIN KHAN v. STATE OF U.P. AND 2 OTHERS

NA528/43036/2026 · 2026-10-05

Gautam Chowdhary

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 43036 of 2026 Court No. - 73 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदक की ओर से धारा 528 बी.एऩ.एस.एस. के अन्तगर्त यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 4234/2022 से अन्तगर्त धारा 135 भारतीय िवद्युत अिधिनयम, थाना एंटी पॉवर थेफ्ट इलाहाबाद, िजला इलाहाबाद,में प्रेिषत आरोपपत्र िदनांिकत 03.09.2025 िजसमें िवद्वान एिडशनल सेशन जज/स्पेशल जज, ई.सी. एक्ट द्वारा पािरत प्रसंज्ञान आदेश िदनांक 03.03.2023 की सम्पूणर् कायर्वाही को अिभखिण्डत िकये जाने हेतु योिजत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, िवपक्षी (पॉवर कापोर्रेशन) के िवद्वान अिधवक्ता श्री नरेन्द्र कु मार ितवारी के सहयोगी अिधवक्ता शरद कु मार आस्थाना एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधकता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता का कथन है िक चूंिक संबंिधत वाद समझौता-योग्य (कं पाउंडेबल) है और आवेदक मामले को समझौते के आधार पर पूणर् रूप से िनपटारे हेतु तैयार है, इसिलए आवेदक को िवद्युत अिधिनयम की धारा 152 के अंतगर्त इस वाद को सुलझाने हेतु संबंिधत प्रािधकारी से संपकर् करने के िलए कु छ समय िदया जाए। 4. पावर कॉपोर्रेशन के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा कथन िकया गया िक अगर िवद्युत अिधिनयम के संबंिधत प्रावधान के तहत वाद का समझौता (कं पाउंिडग) िकया जाता है, तो उन्हें कोई आपित्त नहीं है। 5. मामले के तथ्यों और पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए तथा उभयपक्ष के िवद्वान अिधवक्तागण के तकोर्ं पर िवचार करने के साथ-साथ आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता की सहमित को देखते हुए, प्रथमदृष्टया यह पिरलिक्षत हो रहा है िक वतर्मान वाद को लंिबत रखने से कोई लाभ नहीं होगा। Versus Counsel for Applicant(s) : Mohd Ahmad Ansari Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Narendra Kumar Tiwari Shahabuddin Khan .....Applicant(s) State Of U.P. And 2 Others .....Opposite Party(s) 6. उपरक्तानुसार, आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता को िनदेर्िशत िकया जाता है िक यिद आवेदक आज से दो सप्ताह के भीतर संबंिधत प्रािधकारी के पास इस आदेश की प्रमािणत प्रितिलिप के साथ िवद्युत अिधिनयम के संबंिधत प्रावधानों के तहत कं पाउंिडग के िलए प्राथर्नापत्र प्रस्तुत करता है, तो संबंिधत प्रािधकारी कानून में प्रदत्त प्रावधानों के तहत जल्द से जल्द उस प्राथर्नापत्र पर िवचार करके एवं उभयपक्ष को सुनने के पश्चात प्राथर्नापत्र प्रस्तुत करने की ितिथ से छह सप्ताह के भीतर उसका िनस्तारण करेगा। 7. तद्नुसार, वतर्मान वाद में आज से दो माह की अविध तक या आवेदक द्वारा प्रस्तुत प्राथर्नापत्र के िनस्तारण तक (इनमें से जो भी पहले हो), आवेदक के िवरुद्ध कोई प्रपीड़क कायर्वाही नहीं की जाएगी। 8. यह स्पष्ट िकया जाता है िक यिद आवेदक उक्त आदेश का अनुपालन नहीं करता है, तो यह आदेश स्वतः िनष्प्रभावी समझा जाय और संबंिधत िवद्वान िवचारण न्यायालय आवेदक के िवरुद्ध कायर्वाही हेतु स्वतंत्र होगा। 9. उपरोक्त िदशा-िनदेर्शों के साथ वतर्मान प्राथर्नापत्र अंतगर्त धारा 528 बी.एन.एस.एस. अंितम रूप से िनस्तािरत िकया जाता है। October 6, 2026 S.Mishra NA528 No. 43036 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad