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Allahabad High Court · body

2026 DAILYLAW 14764 (ALL)

VEER SHAILENDRA AKSHAYA PRATAP SINGH @ SHIVAM PATEL v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

NABAIL/4078/2026 · 2026-10-05

Gautam Chowdhary

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 4078 of 2026 Court No. - 73 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 0055/2024 अन्तगर्त धारा 323, 504, 506, 420, 406 बी.एन.एस., थाना कोंच, िजला जालौन में अिग्रम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक की िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक का यह िद्वतीय अिग्रम जमानत आवेदन पत्र है। आवेदक का प्रथम अिग्रम जमानत, अिग्रम जमानत आवेदन पत्र सं० 396/2025 में इस न्यायालय के आदेश िदनांक 25.03.2026 के द्वारा िनरस्त की जा चुकी है। 4. आवेदक की िवद्वान अिधवक्ता द्वारा नवीन तथ्य यह प्रस्तुत िकया गया िक यद्यिप आवेदक का प्रथम अिग्रम जमानत आवेदन, उसमें िनिदष्ट शतोर्ं का अनुपालन न िकए जाने के कारण िनरस्त कर िदया गया था, तथािप इस प्रकरण में प्रासंिगक तथ्य यह है िक िवचारण न्यायालय (Trial Court) की आदेश-पित्रका (Order Sheet) के अवलोकन से स्पष्ट है िक आवेदक िवचारण में पूणर् सहयोग प्रदान कर रहा है। उसके द्वारा िवचारण के दौरान कोई भी अनावश्यक स्थगन ( Adjournment) नहीं िलया गया है। पुनः आवेदक की ओर से यह भी आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। 5. इसके िवपरीत, िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक प्रथम अिग्रम जमानत आवेदन-पत्र िनरस्त होने के उपरांत िवचारण के दौरान कई ितिथयों पर हािजरी Versus Counsel for Applicant(s) : Gunjan Yadav Counsel for Opposite Party(s) : Fakhruzzaman, G.A. Veer Shailendra Akshaya Pratap Singh @ Shivam Patel .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) माफी (Exemption from Appearance) के प्राथर्ना-पत्र प्रस्तुत िकए गए हैं, िजससे यह स्पष्ट रूप से पिरलिक्षत होता है िक आवेदक द्वारा िवचारण में सहयोग नहीं िकया जा रहा है। इन्हीं तथ्यों एवं पिरिस्थितयों के सम्यक् पिरशीलन के उपरांत ही माननीय न्यायालय द्वारा अिभयुक्त का प्रथम अिग्रम जमानत आवेदन िनरस्त िकया जा चुका है। अतः अिभयुक्त का यह िद्वतीय अिग्रम जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकये जाने योग्य है। 6. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अिग्रम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृ ित और गंभीरता, अिभयुक्त का पूवर्वृत्त, अिभयुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयुक्त के िवरुद्ध उपलब्ध संपूणर् सामग्री का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयुक्त की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए। 7. वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदक की भूिमका और इस मामलें में इस तथ्य को देखते हुए िक, आवेदक की ओर से कोई उपयुक्त नवीन तथ्त प्रस्तुत नहीं िकया गया है। इसिलए, मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, तद्नुसार आवेदक का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार िकया जाता है। 8. तद्नुसार, इस अिग्रम जमानत आवेदन पत्र को िनरस्त िकया जाता है। 9. इस वाद में यिद कोई अंतिरम आदेश हो, तो वह स्वतः समाप्त समझा जाए। 10. कायार्लय को िनदेर्िशत िकया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप अिवलम्ब संबंिधत िवचारण न्यायालय के भेजना सुिनिश्चत करें। October 6, 2026 CP.sahani NABAIL No. 4078 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad