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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD WRIT - C No. - 40386 of 2026 Court No. - 73 HON'BLE DR.
GAUTAM CHOWDHARY, J. 1- याचीगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान ए०सी०एस०सी० को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 2- इस यािचका के माध्यम से, याचीगण एक परमादेश िरट जारी करने की मांग कर रहे हैं, िजसमें प्रत्युत्तरदातागण को िलव-इन-िरलेशनिशप में यािचकाकतार्ओं के शांितपूणर् जीवन में हस्तक्षेप न करने का िनदेर्श िदया जाए एवं संबंिधत अिधकािरयों को यह िनदेर्श देने की मांग की गयी है िक वे याचीगण को सुरक्षा प्रदान करें। 3- याचीगण के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक याचीगण वयस्क हैं और वे अपनी मजीर् और सहमित से िबना िकसी दबाव के एक-दूसरे के साथ िलव-इन-िरलेशनिशप रह रहे हैं, याचीगण ने अपने उम्र के समथर्न में अपने-अपने हाईस्कू ल प्रमाण पत्र/आधार काडर् की प्रितिलिप, यािचका के साथ संलग्न िकया है, िजनके अवलोकन से यह स्पष्ट है िक दोनों याचीगण बािलग हैं, यािचका में िदए गए कथन याचीगण के संयुक्त हलफनामों द्वारा समिथत हैं।याचीगण द्वारा स्वेच्छा से एक- दूसरे के साथ िलव-इन-िरलेशनिशप में रह रहे है। इसके अलावा यह भी अनुरोध िकया गया है िक िनजी प्रत्युत्तरदाता और पिरवार के अन्य सदस्य याचीगण द्वारा एक साथ रहने के कारण नाराज हो गए हैं और उनके द्वारा याचीगण को धमकी दी जा रही है और उन्हें परेशान िकया जा रहा है िजसके कारण याचीगण के जीवन को गंभीर खतरा है। 4- िवद्वान ए०सी०एस०सी० ने तकर् प्रस्तुत िकया िक याची सं० 1 लगभग 20 वषीर्य पूवर् से ही शादीशुदा मिहला है। इस स्तर पर उन्होंने न्यायालय का ध्यान इस ओर भी आकृ ष्ट िकया िक याची सं० 1 द्वारा पूवर् में ही िववाह िकया गया है, िजससे तलाक/िववाह-िवच्छेद के संबंध में कोई कथन नहीं िकया गया और न ही कोई इससे संबंिधत दस्तावेज प्रस्तुत िकया गया, िजससे प्रतीत होता है िक याची सं० 1 का उसकी पित से िववाह-िवच्छेद नहीं हुआ है। उन्होंने अपने तकर् के समथर्न में न्यायालय का ध्यान इस न्यायालय की द्वयपीठ द्वारा िनणीर्त वाद Asha Devi and Another vs. State of U.P. and others passed in Writ (C) No. 18743 of 2020 की नजीर एवं अन्य बहुत सी नजीरों की ओर आकृ ष्ट िकया। अन्ततः उन्होंने अनुरोध िकया िक उनके द्वारा प्रस्तुत िकए गए तकोर् एवं नजीरों को देखते हुए याचीगण वांिछत अनुतोष प्राप्त करने के अिधकारी नहीं है एवं यह यािचका िनरस्त िकए जाने योग्य है, तद्नुसार याचीगण की यािचका िनरस्त कर दी जाय। 5- िवद्वान ए०सी०एस०सी०गण के तकोर् के पिरप्रेक्ष्य में इस न्यायालय की द्वयपीठ द्वारा िनणीर्त वाद Asha Devi and Another vs. State
of U.P. and others passed in Writ (C) Versus Counsel for Petitioner(s) : Dhirpal Singh, Mayank Yadav Counsel for Respondent(s) : C.S.C. Geeta And Another .....Petitioner(s) State Of U.P. And 4 Others .....Respondent(s) No. 18743 of 2020 की को देखते हुए एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर याचीगण को उनके द्वारा वांिछत अनुतोष प्रदान िकए जाने का कोई औिचत्य नहीं है तथा यह यािचका िनरस्त िकए जाने योग्य है। 6- तद्नुसार वाद के गुण दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए यह यािचका िनरस्त की जाती है। October 6, 2026 CP.sahani WRIC No. 40386 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad