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Allahabad High Court · body

2026 DAILYLAW 13069 (ALL)

JAYPAL v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

NA528/43270/2026 · 2026-10-06

Gautam Chowdhary

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 43270 of 2026 Court No. - 73 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदक की ओर से भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता, 2023 की धारा 528 के अंतगर्त यह आवेदन पत्र, के स संख्या 30 of 2020 (राज्य बनाम जयपाल व अन्य), जो अपराध संख्या 1038 of 2019 से उद्भूत है, के संबंध में, उत्तर प्रदेश िगरोहबंद और समाज-िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, की धारा 2/3(1), पुिलस स्टेशन दादरी, िजला गौतम बुद्ध नगर के अंतगर्त िवद्वान अपर िजला जज/पोक्सो िद्वतीय, गौतम बुद्ध नगर द्वारा पािरत एन.बी.डब्ल्यू./एन.एस. आदेश िदनांिकत 14.08.2023 को अपास्त करने एवं संपूणर् कायर्वाही को अपास्त करने हेतु योिजत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् िदया है िक आवेदक को गैंगस्टर अिधिनयम में झूठा फं साया गया है। उन्होंने आगे कहा िक 1986 का अिधिनयम के वल धारा 2 के उप-धारा (ख) और (ग) के तहत क्रमशः "िगरोह" और "िगरोिहयों" की पिरभाषा के अनुसार, अपराध में िलप्त आरोपी- आवेदक की िस्थित को "िगरोही" के रूप में पिरभािषत करता है। िवद्वान अिधवक्ता द्वारा यह तकर् िदया िक 1986 का अिधिनयम कोई अपराध/जुमर् सृिजत नहीं करता है। उपरोक्त तकर् के अलावा, िवद्वान अिधवक्ता ने यह भी तकर् िदया िक िगरोह चाटर् के वल 1986 के अिधिनयम की धारा 2(ख) के तहत िनिदष्ट अपराध में आवेदकों की संिलप्तता को दशार्ता है, िजसके िलए सजा पहले से ही िनधार्िरत है। इस प्रकार उन्होंने कहा िक िबना िकसी अपराध के ही आवेदक पर गैंगस्टर अिधिनयम लागू िकया गया है। यह कानून में स्थािपत िसद्धांत है िक कानून में अपराध के िबना कोई सजा नहीं हो सकती। िवद्वान अिधवक्ता ने िशव प्रताप िसह उफर् िचनू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य के मामले में माननीय सवोर्च्च न्यायालय द्वारा आपरािधक अपील संख्या 3979/2026: 2026 INSC 894 में िदए गए फै सले पर भरोसा जताया है। िवद्वान अिधवक्ता ने आगे तकर् िदया है िक आवेदक के िखलाफ गैंगस्टर अिधिनयम लगाना कानून की प्रिक्रया का दुरुपयोग मात्र है और इसिलए इस न्यायालय द्वारा पूरी कायर्वाही को रद्द िकया जाना चािहए। 4. मामला िवचारणीय है। 5. मामला िवचारणीय है। 5. िवपक्षी सं० 2 को नोिटस जारी हो। आवेदक की ओर से नोिटस भेजने के संबंध में आवश्यक पैरवी 1 सप्ताह के अन्दर की जाय। Versus Counsel for Applicant(s) : Vidit Narayan Mishra Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Jaypal .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) 6. िवपक्षी 4 सप्ताह में प्रितशपथपत्र दािखल करें। तत्पश्चात् आवेदक की ओर से 2 सप्ताह में प्रत्युत्तरशपथपत्र दािखल िकया जाय। 7. तत्पश्चात इस वाद को सूचीबद्ध िकया जाय। 8. प्रश्नगत मामले के समस्त तथ्यों एवं पिरिस्थितयों के दृिष्टगत उपरोक्त विणत वाद में आवेदक के िवरूद्ध अिग्रम आदेश तक कोई प्रपीड़क कायर्वाही नहीं की जाएगी। October 7, 2026 CP.sahani NA528 No. 43270 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad