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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 35881 of 2026 Court No. - 79 HON'BLE SAURABH SRIVASTAVA, J.
1. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता श्री िदलीप कु मार एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना गया तथा पत्रावली का अवलोकन िकया गया।
2. आवेदक की ओर से धारा 528 बी.एऩ.एस.एस. के अन्तगर्त यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 274/2021 से उद्भूत वाद सं० 21111/2022 (State of U.P. vs. Shiv Kumar and others), अन्तगर्त धारा 447, 298 भा.दं.सं., थाना िबनावर, िजला बदायूं, जो िवद्वान अपर िसिवल जज (जे.डी.)/न्याियक मिजस्ट्रेट तृतीय कक्ष, बदायूं के न्यायालय में लिम्बत है, में प्रेिषत आरोपपत्र िदनांिकत 23.03.2022 एवं प्रसंज्ञान आदेश िदनांिकत 24.08.2022 तथा आदेश िदनांिकत 27.08.2025 को जारी गैर जमानती अिधपत्र (एन.बी.डब्ल्यू.) की सम्पूणर् कायर्वाही को अपास्त िकये जाने हेतु योिजत िकया गया है।
3. प्रथम सूचना िरपोटर् में विणत कथनों तथा आक्षेिपत आदेश एवं आरोप-पत्र के अवलोकन से यह िनष्कषर् पिरलिक्षत हो रहा है िक यह ऐसा प्रकरण नहीं है, िजसमें इस न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप िकया जाना अपेिक्षत हो। वतर्मान प्राथर्नापत्र में ऐसा कोई आधार दृिष्टगोचर नहीं होता है, िजसके आधार पर आक्षेिपत आदेश के साथ-साथ आरोप-पत्र को िनरस्त िकया जा सके ।
4. तदनुसार, वतर्मान प्राथर्नापत्र के माध्यम से की गई प्राथर्ना अस्वीकृ त की जाती है।
5. अंत में, आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा िनवेदन िकया गया िक आवेदक को संबंिधत न्यायालय के समक्ष आत्मसमपर्ण कर जमानत हेतु आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता प्रदान की जाए, िजस पर िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को कोई आपित्त नहीं है।
6. उपयुर्क्त प्रस्तुितयों पर िवचार करने तथा प्रकरण के तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को दृिष्टगत रखते हुए यह िनदेर्िशत िकया जाता है िक यिद आवेदक के िवरुद्ध जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) के अनुपालन में वह आज से तीन सप्ताह के भीतर संबंिधत न्यायालय के समक्ष आत्मसमपर्ण Versus Counsel for Applicant(s) : Dileep Kumar Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Vikash Babu .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)
करता है और तत्पश्चात जमानत हेतु प्राथर्ना-पत्र प्रस्तुत करता है, तो सम्बिन्धत न्यायालय के समक्ष अन्य िविधक बाधा न हो, तो उसके जमानत प्राथर्नापत्र पर िविध के अनुसार, Satender Kumar Antil Vs. Central Bureau of Investigation and others, (2022 SCC OnLine SC 825) में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रितपािदत िविध के आलोक में, शीघ्रतापूवर्क िवचार कर िनस्तािरत िकया जाए।
7. आज से तीन सप्ताह की अविध तक आवेदक के िवरुद्ध कोई प्रपीड़क कारर्वाई नहीं की जाएगी।
8.
यह स्पष्ट िकया जाता है िक यिद आवेदक उपयुर्क्त िनधार्िरत अविध (तीन सप्ताह) के भीतर जमानत हेतु सम्बिन्धत िवचारण न्यायालय के समक्ष कोई प्राथर्ना-पत्र प्रस्तुत नहीं करता है, तो वतर्मान आदेश के जिरए आवेदक को प्रदान की गयी राहत स्वतः समाप्त समझी जाय।
9. उपयुर्क्त िटप्पिणयों के साथ, वतर्मान प्राथर्नापत्र अंतगर्त धारा 528 बी.एन.एस.एस. अंितम रूप से िनस्तािरत िकया जाता है। September 29, 2026 Pawan Kumar NA528 No. 35881 of 2026 2 (Saurabh Srivastava,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad