PRIYANK @ PRIYANKESH JAIN AND 3 OTHERS v. STATE OF U.P. AND ANOTHER
NA528/35901/2026 · 2026-09-28
Saurabh Srivastava
body2026
DailyLaw.ai
[ 2026 DAILYLAW 11268 (ALL) · dailylaw.ai ]
DailyLaw.ai
[ 2026 DAILYLAW 11268 (ALL) · dailylaw.ai ]
Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 35901 of 2026 Court No. - 79 HON'BLE SAURABH SRIVASTAVA, J.
1. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता श्री राज कु मार ित्रपाठी एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना गया तथा पत्रावली का अवलोकन िकया गया।
2. आवेदकगण की ओर से धारा 528 बी.एऩ.एस.एस. के अन्तगर्त यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 87/2025 से उद्भूत वाद सं० 4880/2026 (State vs. Priyankesh Jain and others), अन्तगर्त धारा 303(2), 318(4) बी.एन.एस., थाना िसकन्दरा, िजला आगरा, जो िवद्वान मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट, आगरा के न्यायालय में लिम्बत है, में प्रेिषत आरोपपत्र सं० 368/2025, िदनांिकत 18.09.2025 एवं प्रसंज्ञान/तलबी आदेश िदनांिकत 25.03.2026 की सम्पूणर् कायर्वाही को अपास्त िकये जाने हेतु योिजत िकया गया है।
3.
आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक िवपक्षी संख्या-2 की दुभार्वनापूणर् मंशा एवं कु ित्सत उद्देश्य के कारण आवेदकगण को वतर्मान प्रकरण में झूठा फं साया गया है। अिभलेख पर उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों के अवलोकन से उपयुर्क्त धाराओं के अंतगर्त आवेदकगण के िवरुद्ध दंडनीय कोई अपराध प्रथमदृष्टया स्थािपत नहीं होता है। सूचनाकतार् कम्पनी जूतों की िनमार्ता कम्पनी है तथा उक्त कम्पनी अपने िनिमत जूतों की आपूित Flipkart के माध्यम से करती है, जो उक्त वस्तुओं की िबक्री हेतु एक ऑनलाइन िवक्रय मंच के रूप में कायर् करता है। आवेदक संख्या 1 एवं 2, जो ग्लैम लॉिजिस्टक्स के स्वामी एवं प्रबंधक हैं तथा सूचनाकतार् द्वारा आपूित िकए गए माल का िवतरण िफ्लपकाटर् के वेयरहाउस से प्राप्त िनदेर्शों के अनुसार ग्राहकों तक करते हैं।आवेदक संख्या 1 एवं 2 का सूचनाकतार्/कम्पनी से िकसी भी प्रकार का कोई सरोकार, संबंध अथवा संबद्धता नहीं है। आवेदक संख्या 3 एवं 4 िफ्लपकाटर् के आगरा िस्थत वेयरहाउस के मात्र कमर्चारी हैं तथा वे अपने उच्चािधकािरयों द्वारा िदए गए आदेशों एवं िनदेर्शों के अनुसार अपने कतर्व्यों का िनवर्हन करते हैं। सूचनाकतार् कम्पनी से प्राप्त स्टॉक के प्रबंधन अथवा उसके संबंध में िलए जाने वाले Versus Counsel for Applicant(s) : Raj Kumar Tripathi Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Priyank @ Priyankesh Jain And 3 Others .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)
िकसी भी िनणर्य में आवेदक संख्या 3 एवं 4 की कोई भूिमका नहीं है। आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक उपर्युक्त मामलें में िवचारण न्यायालय द्वारा आक्षेिपत आदेश पािरत करते समय न तो साक्ष्यों की कोई िववेचना की गई और न ही इस पर िवचार िकया गया िक आवेदकगण द्वारा किथत रूप से क्या कृ त्य िकया गया था। अतः आक्षेिपत संज्ञान आदेश एवं आरोप-पत्र िनरस्त एवं अपास्त िकए जाने योग्य हैं।
4.
िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा प्रस्तुत तकोर्ं का खंडन करते हुए कथन िकया गया िक आवेदकगण की ओर से उठाए गए तकर् िववािदत तथ्य के प्रश्नों से संबंिधत हैं तथा उनके िनधार्रण हेतु साक्ष्यों का मूल्यांकन आवश्यक होगा। प्रश्नगत मामलें में समुिचत िववेचना के उपरांत िवचारण न्यायालय द्वारा पयार्प्त आधार पर प्रश्नगत आदेश पािरत िकया है, िजसमें कोई िविधक अथवा क्षेत्रािधकार संबंधी त्रुिट पिरलिक्षत नहीं हो रही है। यह भी प्रस्तुत िकया गया िक संज्ञान ग्रहण िकए जाने के स्तर पर न्यायालय को के वल प्रथमदृष्टया प्रकरण की िवद्यमानता पर िवचार करना होता है और संबंिधत िवचारण न्यायालय से लघु िवचारण (िमनी ट्रायल) िकए जाने की अपेक्षा नहीं की जाती है।
5. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा प्रस्तुत तकोर्ं को सुनने तथा अिभलेख का पिरशीलन करने के पश्चात न्यायालय का मत है िक तलबी आदेश जारी िकए जाते समय संबंिधत मिजस्ट्रेट को अिभलेख पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर मात्र प्रथमदृष्टया राय अिभिलिखत करनी होती है और उससे लघु िवचारण (िमनी ट्रायल) करने अथवा अिभयुक्त के बचाव पक्ष का परीक्षण करने की अपेक्षा नहीं की जाती है। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा िनणीर्त S.W. Palanitkar and Others Vs. State of Bihar and Another; (2002) 1 SCC 241 में प्रितपािदत िकया गया है िक इस स्तर पर लागू िकया जाने वाला परीक्षण यह है िक क्या कायर्वाही आगे बढ़ाने के िलए "पयार्प्त आधार" िवद्यमान है, न िक यह, िक क्या दोषिसिद्ध के िलए "पयार्प्त आधार" िवद्यमान है। इसी प्रकार Nupur Talwar Vs. Central Bureau of Investigation and Another; (2012) 11 SCC 465 के मामले में यह पुनः प्रितपािदत िकया गया िक प्रिक्रया जारी िकए जाने के स्तर पर साक्ष्यों पर िवचार का उद्देश्य सीिमत एवं अस्थायी प्रकृ ित का होता है, जो िवचारण के दौरान प्रस्तुत िकए जाने वाले वास्तिवक साक्ष्य से िभन्न है। इस स्तर पर यह परीक्षण िकया जाना है िक क्या मिजस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत सामग्री "अिभयुक्त के िवरुद्ध कायर्वाही िकए जाने के िलए पयार्प्त" है, न िक यह, िक क्या वह "दोष िसद्ध एवं स्थािपत करने के िलए पयार्प्त" है।
6. हाल ही में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा िनणीर्त Criminal Appeal No. 4752 of 2025 (arising out of S.L.P. (Criminal) No. 1531 of 2025) में पािरत Muskan Vs.
Ishaan Khan (Sataniya) and others के िनणर्य में यह प्रितपािदत NA528 No. 35901 of 2026 2
िकया गया है िक दंड प्रिक्रया संिहता की धारा 482 के अंतगर्त न्यायालय की शिक्तयों के संबंध में यह स्थािपत िविध है िक कायर्वाही िनरस्त िकए जाने के चरण पर न्यायालय से लघु िवचारण (िमनी ट्रायल) करने की अपेक्षा नहीं की जाती है। अतः धारा 482 दं.प्र.सं. के अंतगर्त िनरस्तीकरण के संबंध में न्यायालय का क्षेत्रािधकार कु छ सीमा तक सीिमत है और न्यायालय को के वल इस बात पर िवचार करना होता है िक अिभयुक्त के िवरुद्ध कायर्वाही आगे बढ़ाने हेतु कोई पयार्प्त साक्ष्य उपलब्ध है अथवा नहीं। यिद पयार्प्त साक्ष्य उपलब्ध है, तो धारा 482 के अंतगर्त शिक्त का प्रयोग नहीं िकया जाना चािहए।
7. पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन से इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता िक आवेदकगण के िवरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता है। आवेदकगण द्वारा िकए गए झूठे फं साए जाने के कथन तथ्यात्मक प्रश्न हैं, िजनका समुिचत िनराकरण िवचारण न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर िकया जाना आवश्यक है तथा धारा 528 बी.एन.एस.एस. के अंतगर्त कायर्वाही में उनका िनणार्यक रूप से िनधार्रण नहीं िकया जा सकता। धारा 528 बी.एन.एस.एस. के अंतगर्त कायर्वाही में यह न्यायालय लघु िवचारण (िमनी ट्रायल) करने के पक्ष में नहीं है।
8. यह िविध का सुस्थािपत िसद्धांत है िक धारा 528 बी.एन.एस.एस. के अंतगर्त िनिहत शिक्तयों का प्रयोग अत्यंत संयम एवं सावधानी के साथ िकया जाना चािहए, मुख्यतः न्यायालय की प्रिक्रया के दुरुपयोग को रोकने अथवा न्याय के उद्देश्यों की पूित सुिनिश्चत करने के िलए। वतर्मान प्रकरण में धारा 528 बी.एन.एस.एस. के अंतगर्त इस न्यायालय के असाधारण क्षेत्रािधकार का प्रयोग िकए जाने हेतु कोई पयार्प्त आधार पिरलिक्षत नहीं हो रहा है तथा िवद्वान िवचारण न्यायालय द्वारा पािरत प्रश्नगत आदेश सकारण एवं उिचत आदेश है तथा उसमें कोई िविधक त्रुिट नहीं है।
9. तद्नुसार, आवेदकगण की ओर से धारा 528 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के अंतगर्त प्रस्तुत यह आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाता है। September 29, 2026 Pawan Kumar NA528 No. 35901 of 2026 3 (Saurabh Srivastava,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad