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Allahabad High Court · body

2026 DAILYLAW 11187 (ALL)

ATUL KUMAR PANDEY v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

NA528/35918/2026 · 2026-09-28

Saurabh Srivastava

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 35918 of 2026 Court No. - 79 HON'BLE SAURABH SRIVASTAVA, J. 1. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना गया तथा पत्रावली का अवलोकन िकया गया। 2. आवेदक की ओर से धारा 528 बी.एऩ.एस.एस. के अन्तगर्त यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 298/2025 से उद्भूत दािण्डक वाद सं० 5394/2025 (State vs. Atul Pandey), अन्तगर्त धारा 352, 351(3) बी.एन.एस., थाना ज्ञानपुर, िजला भदोही, जो िवद्वान अपर मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट, ज्ञानपुर भदोही के न्यायालय में लिम्बत है, में प्रेिषत आरोपपत्र सं० 1/2025, िदनांिकत 14.12.2025 एवं तलबी आदेश िदनांिकत 13.03.2026 की कायर्वाही को अपास्त िकये जाने हेतु योिजत िकया गया है। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा न्यायालय के समक्ष मात्र यह तकर् प्रस्तुत िकया गया है िक भारतीय न्याय संिहता की धाराएँ 352, 351(3) असंज्ञेय अपराधों से संबंिधत हैं तथा भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता, 2023 की धारा 2(1)(h) के स्पष्टीकरण के आलोक में संबंिधत िववेचक द्वारा प्रस्तुत आरोप-पत्र को पुिलस वाद के रूप में आगे नहीं बढ़ाया जा सकता, बिल्क उक्त प्रकरण में कायर्वाही पिरवाद (Complaint Case) के रूप में की जानी अपेिक्षत है। अपने उक्त तकर् के समथर्न में आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने Murli and others Vs. State of U.P. and another, 2008 (61) ACC 54, Virendra Singh and others Vs. State of U.P. and others, 2002 (45) ACC 609 तथा Shakila Bano and others Vs. State of U.P. and another, 2008 (61) ACC 636 में पािरत िनणर्यों की तरफ न्यायालय का ध्यान आकृ ष्ट िकया है। 4. इसके िवपरीत, िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं का प्रबल िवरोध िकया गया, िकन्तु आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा अवलंिबत एवं प्रितपािदत िविध के स्थािपत िसद्धांत का खंडन करने में वे असमथर् रहे। Versus Counsel for Applicant(s) : Ashish Kumar Pandey, Shyamdhar Pandey Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Atul Kumar Pandey .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) 5. चूँिक, आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा एक िविधक प्रश्न उठाया गया है, अतः िवपक्षी संख्या -2 को नोिटस जारी करने की प्रिक्रया से छू ट प्रदान की जाती है। 6. अग्रेतर िवचार से पूवर्, संदभर् की सुिवधा हेतु भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता, 2023 की धारा 2(1)(h) के प्रासंिगक उपबंधों का उल्लेख िनम्नवत् िकया जाना उिचत होगा:- "2. Definitions.-In this Sanhita, unless the context otherwise requires,- (h) "complaint" means any allegation made orally or in writing to a Magistrate, with a view to his taking action under this Sanhita, that some person, whether known or unknown, has committed an offence, but does not include a police report. Explanation. A report made by a police officer in a case which discloses, after investigation, the commission of a non- cognizable offence shall be deemed to be a complaint; and the police officer by whom such report is made shall be deemed to be the complainant." 7. उपयुर्क्त तथ्यों के आलोक में, वतर्मान प्रकरण में संबंिधत िववेचक द्वारा भारतीय न्याय संिहता की धाराओं 352, 351(3) के अंतगर्त प्रस्तुत आरोप-पत्र को पिरवाद के रूप में माना जाना अपेिक्षत है तथा प्रकरण का िनस्तारण पिरवाद (Complaint Case) के रूप में ही िकया जाना िविधसम्मत होगा। अतः िवद्वान मिजस्ट्रेट द्वारा उक्त आरोप-पत्र पर राज्य वाद (State Case) के रूप में संज्ञान िलया जाना िविधक दृिष्ट से त्रुिटपूणर् है। अतः उनके द्वारा पािरत आदेश िविधक दृिष्ट से पोषणीय नहीं है तथा अपास्त िकए जाने योग्य है। 8. उपरोक्तानुसार, िवद्वान अपर मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट, भदोही ज्ञानपुर द्वारा िदनांक 13.03.2026 को पािरत आदेश, िजसके द्वारा संबंिधत िववेचक द्वारा भारतीय न्याय संिहता की धाराओं 352, 351(3) के अंतगर्त प्रस्तुत आरोप-पत्र को राज्य वाद (State Case) के रूप में मानते हुए उसके आधार पर आवेदक को तलब िकया गया है, एतद्द्वारा अपास्त िकया जाता है। 9. तदनुसार, प्रस्तुत प्राथर्नापत्र आंिशक रूप से स्वीकार िकया जाता है। 10. हालांिक, यह स्पष्ट िकया जाता है िक इस आदेश से संबंिधत िवद्वान न्यायालय को, यिद आवश्यक हो, िविध के अनुसार उक्त प्रकरण को पिरवाद (Complaint Case) के रूप में मानते हुए अग्रेतर कायर्वाही करने में कोई बाधा नहीं होगी। September 29, 2026 Pawan Kumar NA528 No. 35918 of 2026 2 (Saurabh Srivastava,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad