AMIT TRIPATHI @ MUKUND v. STATE OF U.P. AND ANOTHER
NA528/42442/2026 · 2026-09-30
Gautam Chowdhary
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[ 2026 DAILYLAW 11026 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 42442 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. आवेदक की ओर से धारा 528 भारतीय सुरक्षा संिहता के अंतगर्त यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 163/2025, अंतगर्त धारा 8/20/29 एन.डी.पी.एस. एक्ट, थाना हांिडया, िजला इलाहाबाद/प्रयागराज में प्रेिषत आरोप पत्र, िदनांिकत 21.07.2025 से उद्भूत दािण्डक वाद सं० 71/2025 (State Vs. Amit), जो ए.डी.जे.-13, इलाहाबाद के न्यायालय में लंिबत है, में पािरत प्रसंज्ञान/तलबी आदेश िद० 23.09.2025 तथा इस वाद की संपूणर् कायर्वाही को िनरस्त करने हेतु योिजत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता का तकर् है िक आवेदक के िवरुद्ध कोई अपराध प्रकट नहीं होता है और वतर्मान अिभयोजन दुभार्वनापूणर् इरादे से उत्पीड़न करने के उद्देश्य से संिस्थत िकया गया है। यहां प्रासंिगक है िक इस मामलें में आवेदक दशार्यी गयी बरामदगी का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है और न ही आवेदक का कोई आपरािधक इितहास है। आगे यह कथन िकया गया है िक किथत बरामदगी और संपूणर् कारर्वाई के दौरान संबंिधत अिधिनयम (Act) के अिनवायर् एवं वैधािनक प्रावधानों (Mandatory Provisions) तथा िनयमों का पालन नहीं िकया गया है, िजससे संपूणर् प्रिक्रया िविध-िवरुद्ध और दूिषत हो जाती है। पुनः उनके िवद्वान अिधवक्ता ने अपने तकोर्ं के समथर्न में पत्रावली पर उपलब्ध महत्वपूणर् दस्तावेजों और बयानों की सुसंगत किड़यों की ओर िवशेष रूप से न्यायालय का ध्यान आकिषत िकया है, जो आवेदक के पक्ष की सत्यता को प्रमािणत करते हैं।
4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने कथन िकया िक प्रश्नगत मामलें में समुिचत िववेचना के उपरांत अिभयुक्त के िवरूद्ध आरोप पत्र दािखल िकया जा चुका है तथा उस पर संबंिधत िवचारण Versus Counsel for Applicant(s) : Mohammad Tausif, Vashishtha Naraian Misra Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Amit Tripathi @ Mukund .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)
न्यायालय द्वारा पयार्प्त आधार पर प्रश्नगत आदेश पािरत िकया है तथा अिभयुक्त के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा प्रश्नगत आदेश को अपास्त करने हेतु जो तकर् प्रस्तुत िकए गए वे बलहीन है।
5. इस चरण पर, आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा उठाए गए तकर् में तथ्यात्मक िववाद का न्याियक िनणर्य (adjudication) और साक्ष्य का मूल्यांकन (appraisal) शािमल है।
6.
उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं एवं अिभलेख पर मौजूद सामग्री के अवलोकन से और इस चरण पर मामले के तथ्यों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता िक आवेदक के िवरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता है। बार (न्यायालय) के समक्ष िकए गए सभी अिभवचन (submissions) तथ्य के िववािदत प्रश्नों से संबंिधत हैं, िजनका इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एन.एन.एस. के अंतगर्त न्याियक िनणर्य नहीं िकया जा सकता है। इस चरण पर के वल प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला देखा जाना है, जैसा िक माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा आर.पी. कपूर बनाम पंजाब राज्य, ए.आई.आर. 1960 एस.सी. 866, हिरयाणा राज्य बनाम भजन लाल, 1992 एससीसी (िक्रिमनल) 426, िबहार राज्य बनाम पी.पी. शमार्, 1992 एससीसी (िक्रिमनल) 192 और अंत में झंडू फामार्स्युिटकल वक्सर् िलिमटेड बनाम मोहम्मद शराफु ल हक एवं अन्य (पैरा-10) 2005 एससीसी (िक्रिमनल) 283 के मामलों में प्रितपािदत कानून के आलोक में स्पष्ट िकया गया है। इसिलए, इस मामले की संपूणर् कायर्वाही को िनरस्त करने की प्राथर्ना को अस्वीकार िकया जाता है।
7. तद्नुसार, यह आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाता है।
8. कायार्लय को िनदेर्श िदया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप संबंिधत अवर न्यायालय को अिवलम्ब भेजना सुिनिश्चत िकया जाय।
9. यिद इस वाद में कोई अंतिरम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय। October 1, 2026 CP.sahani NA528 No. 42442 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad