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Allahabad High Court · body

2026 DAILYLAW 10818 (ALL)

HAFIZ MOHAMMAD NIZAMUDDIN v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

NA528/42450/2026 · 2026-09-30

Gautam Chowdhary

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 42450 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदक की ओर से धारा 528 भारतीय सुरक्षा संिहता के अंतगर्त यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 0692/2021, अंतगर्त धारा 120बी भारतीय दण्ड संिहता व धारा 3/5(1) उ०प्र० िविध िवरूदध धमर् पिरवतर्न, थाना कोतवाली, िजला फतेहपुर में प्रेिषत आरोप पत्र, िदनांिकत 05.01.2023 से उद्भूत वाद सं० 8732/2024 (State Vs. Mohd. Siddiq & others) के न्यायालय में लंिबत है, में पािरत आदेश िद० 05.01.2023 तथा इस वाद की संपूणर् कायर्वाही को िनरस्त करने हेतु योिजत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता का तकर् है िक आवेदक के िवरुद्ध कोई अपराध प्रकट नहीं होता है और वतर्मान अिभयोजन दुभार्वनापूणर् इरादे से उत्पीड़न करने के उद्देश्य से संिस्थत िकया गया है। यहां प्रासंिगक है िक संबंिधत िववेचक द्वारा पूरी िववेचना के दौरान िदनांक 22.01.2011 के िनकाहनामे की ज़ेरॉक्स (छायाप्रित) के आधार पर कोई भी मूल िनकाहनामे का दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं कराया गया है, और िवद्वान मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट, फतेहपुर द्वारा उत्तर प्रदेश िविध िवरुद्ध धमर् पिरवतर्न प्रितषेध अिधिनयम की धारा 3/5(1) एवं 120-बी के तहत आवेदक के िवरुद्ध संज्ञान ले िलया गया है। आवेदक द्वारा संबंिधत िववेचक द्वारा उस पर लगाए गए अपराध को कािरत नहीं िकया गया है, िकतु कु छ स्थानीय िहदू संगठन आवेदक से नाराज थे और वे आवेदक के िखलाफ िकसी एक सुराग की तलाश में थे, अंततः वे अपने उद्देश्य में सफल रहे और वतर्मान अिभयोजन में आवेदक को झूठा फं सा िदया गया है। सूचनाकतार्/पीिड़ता द्वारा अपने धारा 161 दं०प्र०सं० एवं िदनांक 21.10.2021 को िवद्वान अपर मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट, कोटर् संख्या-2, फतेहपुर के समक्ष दंड प्रिक्रया संिहता की धारा 164 के अंतगर्त अपने बयान के दौरान भी आवेदक का नाम उजागर नहीं िकया गया है। इससे पिरलिक्षत हो रहा है िक आवेदक की इस मामलें में कोई भूिमका नहीं है। पुनः उनके द्वारा अपने तकर् के समथर्न में कु छ दस्तावेजों और बयानों की ओर ध्यान आकिषत िकया। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने कथन िकया िक प्रश्नगत मामलें में समुिचत िववेचना के उपरांत अिभयुक्त के िवरूद्ध आरोप पत्र दािखल िकया जा चुका है तथा उस पर संबंिधत िवचारण न्यायालय द्वारा पयार्प्त आधार पर प्रश्नगत आदेश पािरत िकया है तथा अिभयुक्त के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा प्रश्नगत आदेश को अपास्त करने हेतु जो तकर् प्रस्तुत िकए गए वे बलहीन है। Versus Counsel for Applicant(s) : Jitendra Singh, Sonam Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Hafiz Mohammad Nizamuddin .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) 5. इस चरण पर, आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा उठाए गए तकर् में तथ्यात्मक िववाद का न्याियक िनणर्य (adjudication) और साक्ष्य का मूल्यांकन (appraisal) शािमल है। 6. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं एवं अिभलेख पर मौजूद सामग्री के अवलोकन से और इस चरण पर मामले के तथ्यों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता िक आवेदक के िवरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता है। बार (न्यायालय) के समक्ष िकए गए सभी अिभवचन (submissions) तथ्य के िववािदत प्रश्नों से संबंिधत हैं, िजनका इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एन.एन.एस. के अंतगर्त न्याियक िनणर्य नहीं िकया जा सकता है। इस चरण पर के वल प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला देखा जाना है, जैसा िक माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा आर.पी. कपूर बनाम पंजाब राज्य, ए.आई.आर. 1960 एस.सी. 866, हिरयाणा राज्य बनाम भजन लाल, 1992 एससीसी (िक्रिमनल) 426, िबहार राज्य बनाम पी.पी. शमार्, 1992 एससीसी (िक्रिमनल) 192 और अंत में झंडू फामार्स्युिटकल वक्सर् िलिमटेड बनाम मोहम्मद शराफु ल हक एवं अन्य (पैरा-10) 2005 एससीसी (िक्रिमनल) 283 के मामलों में प्रितपािदत कानून के आलोक में स्पष्ट िकया गया है। इसिलए, इस मामले की संपूणर् कायर्वाही को िनरस्त करने की प्राथर्ना को अस्वीकार िकया जाता है। 7. तद्नुसार, यह आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाता है। 8. कायार्लय को िनदेर्श िदया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप संबंिधत अवर न्यायालय को अिवलम्ब भेजना सुिनिश्चत िकया जाय। 9. यिद इस वाद में कोई अंतिरम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय। October 1, 2026 CP.sahani NA528 No. 42450 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad