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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 33072 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 146/2025, अंतगर्त धारा 221, 132, 109(1), 324(3), 352, 351(2), 318(4), 338 बी.एन.एस., थाना रतनपुरी, िजला मुजफ्फरनगर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता श्री अजय कु मार पाण्डेय एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा ऐसा कोई भी कृ त्य कािरत नहीं िकया गया है, जैसािक प्राथिमकी में विणत िकया गया है। आवेदक द्वारा िकसी व्यिक्त पर जान से मारने की नीयत से गाड़ी नहीं चलाई गयी है। प्राथिमकी अज्ञात में दजर् करायी गयी है, दौरान िववेचना यह तथ्य प्रकाश में आया िक उक्त गाड़ी के मािलक सुनील कु मार है, िजन्होंने अपने बयान में कथन िकया िक िदनांक 16.07.2025 को उनका बेटा (तरुण, सह- अिभयुक्त) एवं पुष्पेंद्र लेकर गये थे, तत्पश्चात आवेदक को वतर्मान घटना में अिभयुक्त बनाया गया। दौरान िववेचना सह-अिभयुक्त तरुण के पड़ोसी द्वारा िववेचक को सूचना प्राप्त हुई और उन्होंने बताया िक आवेदक और सह-अिभयुक्त तरुण ने उन्हें बताया था िक वे दोनों हिरद्वार से लौट रहे थे और जब पुिलस ने उन्हें गाड़ी रोकने का िनदेर्श िदया, तो तरुण तेज़ी से गाड़ी चला रहा था। उन्होंने यह भी बताया िक घटना के दौरान गाड़ी की नंबर प्लेट िगर गई थी। के स डायरी के अनुसार, यह िबल्कु ल स्पष्ट है िक किथत वाहन सह-अिभयुक्त तरुण चला रहा था और आवेदक के वल उक्त वाहन में बैठा था। आवेदक के िवरुद्ध कोई आरोप नहीं लगाया गया है, िसवाय इसके िक वह भी उक्त वाहन में मौजूद था। किथत घटना में तीन लोगों को चोट आने का कथन िकया गया है, िकन्तु सभी चुटैलों की िचिकत्सीय आख्या के मुतािबक उनके शरीर के िकसी भी ममर्स्थल पर कोई चोट नहीं पायी गयी है एवं सभी चोटें साधारण प्रकृ ित की हैं तथा जीवन के Versus Counsel for Applicant(s) : Ajay Kumar Pandey, Vijay Tripathi Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Pushpendra .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
िलए हािनकारक नहीं हैं। आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। वतर्मान मामले के बाद पुिलस किमयों द्वारा मुकदमा अपराध संख्या 151/2025, धारा 109(1), 262 भा.दं.सं.
और धारा 3/5/25/28 शस्त्र अिधिनयम के तहत थाना रतनपुरी, िजला मुजफ्फरनगर में एक और मुकदमा पंजीकृ त कर िदया गया, िजसमें आवेदक पूवर् से ही जमानत पर है। आवेदक न तो वाहन का स्वामी है और न ही वाहन चालक, उसका किथत घटना से कोई संबंध नहीं है। उक्त घटना के संबंध में कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 28.07.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv.
आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। BAIL No. 33072 of 2025 2
7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 24, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 33072 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad