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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 99559 (ALL)

SMT. SAJEELA v. STATE OF U.P.

NABAIL/7749/2025 · 2025-09-21

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 7749 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र आवेिदका श्रीमती सजीला की ओर से मु०अ०स० 251/2025 अन्तगर्त धारा 115(2)/ 352/ 351(2)/ 351(3)/ 118(1)/ 105 बी.एन.एस., थाना शालीमार गाडेर्न, िजला गािजयाबाद में अिग्रम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया 3. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेिदका िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, िजस कारण रंिजशन वादी मुकदमा द्वारा उक्त मुकदमा दायर िकया गया। उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। आवेिदका दारा प्राथिमकी में दिशत उपरोक्त धाराओं का अपराध कािरत नहीं िकया गया है। आवेिदका की ओर से यह भी आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक इस मामले में अिभयुक्ता के िवरूद्ध पयार्प्त साक्ष्य के आधार पर िवचारण न्यायालय द्वारा अिभयुक्ता को तलब िकया गया है तथा िवचारण न्यायालय के प्रश्नगत आदेश में कोई िविधक त्रुिट पिरलिक्षत नहीं है, इसके कारण प्रश्नगत आदेश में कोई हस्तक्षेप िकये जाने की आवश्यकता प्रतीत नही हो रही है। उन्होंने आगे यह भी अवगत कराया िक आवेिदका ने सहअिभयुक्तगण के साथ िमलकर वादी Versus Counsel for Applicant(s) : Ajay Singh Yadav Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Smt. Sajeela .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) के घर जाकर अकारण ही वादी के पुत्र पर लाठी , डंडो से वार कर मारपीट कर चोट पहुंचायी थी। अिभयुक्ता द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है इसिलए आवेदक को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई औिचत्य प्रतीत नहीं होता है अतः अिभयुक्ता का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाय। 5. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अिग्रम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृ ित और गंभीरता, अिभयुक्त का पूवर्वृत्त, अिभयुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयुक्त के िवरुद्ध उपलब्ध संपूणर् सामग्री का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयुक्त की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए। 6. वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेिदका की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए एवं सम्पूणर् दस्तावेजों के अवलोकन से मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, तद्रुसार आवेिदका का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार िकया जाता है। 7. उपरोक्तानुसार वाद के गुण-दोष पर िटप्पणी िकये बगैर यह अिग्रम जमानत प्राथर्नापत्र िनरस्त िकया जाता है। 8. इस वाद में यिद कोई अंतिरम आदेश हो, तो वह स्वतः समाप्त समझा जाए। 9. आवेिदका िनयिमत जमानत प्राथर्नापत्र दािखल करने हेतु स्वतंत्र है एवं कायार्लय को िनदेर्िशत िकया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप अिवलम्ब संबंिधत िवचारण न्यायालय के भेजना सुिनिश्चत करें। September 22, 2025 S.Mishra NABAIL No. 7749 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad