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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 98698 (ALL)

RAKESH KUMAR v. STATE OF U.P.

BAIL/32448/2025 · 2025-09-21

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 32448 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 43/2025, अंतगर्त धारा 316(5) बी.एन.एस., थाना चकरघट्टा, िजला चंदौली में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. संक्षेप में अिभयोजन कथानक इस प्रकार है िक वादी द्वारा इस आशय की प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् कराई गई िक उसने अपना एकाउंट एस.बी.आई. बैंक ितवारीपुर थाना चकरघट्टा, िजला चन्दौली में खुलवाया है िजसमें कु ल तीन लाख दस हजार रूपया था। उसने अपने उक्त एकाउंट से साठ-साठ हजार रूपया करके दो बार में कु ल िमलाकर एक लाख बीस हजार रूपया िनकाला, िफर एक लाख तीस हजार रूपया राके श कु मार पुत्र रामनरेश िनवासी ितवारीपुर से िनकलवाया, िजसने उसमें से सत्तर हजार रूपया उसे िदया और शेष साठ हजार रूपया स्वयं रख िलया। पुनः िदनांक 24-07-2025 को साठ हजार रूपया िनकाला तो उसे राके श ने रख िलया और कागज पर साठ हजार का पुजार् बनाकर दे िदया और बोला की 26-07-2025 को दे दूंगा। उक्त के आधार पर राके श कु मार को नािमत करते हुए प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् िकया गया। 4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक ने सूचनाकतार् के धन का दुरुपयोग नहीं िकया, जैसा िक प्रथम सूचना िरपोटर् में उल्लेख िकया गया है। आवेदक भारतीय स्टेट बैंक के एक ग्राहक सेवा कें द्र (CSP) का संचालन करता था, िजसके माध्यम से ग्रामीण अपनी जमा रािश िनकालने के िलए उससे संपकर् करते थे। आवेदक अपनी रािश िनकालकर संबंिधत खाताधारकों को सौंप देता था। सूचनाकतार् ने भी आवेदक से धन िनकासी के िलए संपकर् िकया था, िजस पर िववाद उत्पन्न हो गया। इसका लाभ उठाकर, सूचनाकतार् ने जानबूझकर एक झूठी और मनगढ़़़़ंत कहानी गढ़़़़ी और आवेदक को वतर्मान मामले में झूठा फं साया। आवेदक पर सूचनाकतार् का कोई बकाया नहीं है। आवेदक का प्रश्नगत वाद से कोई वास्ता-सरोकार नहीं है। आवेदक द्वारा सूचनाकतार् से िकसी प्रकार की धनरािश नहीं ली गयी है तथा पत्रावली पर ऐसा कोई भी साक्ष्य संलग्न नहीं है, िजससे यह स्पष्ट हो सके िक आवेदक द्वारा सूचनाकतार् से रुपए िलये गये हैं एवं ऐसा कोई भी स्वतंत्र साक्षी नहीं है, िजसने अिभयोजन कथानक का समथर्न िकया हो। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए Versus Counsel for Applicant(s) : Deepak Singh Yadav Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Rakesh Kumar .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 27.07.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय। 6. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 8. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 22, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 32448 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad