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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 7698 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र आवेिदका की ओर से मु०अ०सं० 0134/2025, अन्तगर्त धारा 80(2), 85, 115(2), 352, 351(3) बी.एन.एस. एवं धारा 3/4 डी.पी. एक्ट, थाना कोतवाली, िजला झाँसी में अिग्रम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता श्री हरे कृ ष्ण ित्रपाठी एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री राजेंद्र िसह को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेिदक का िवद्वान अिधवक्ता की तरफ से आज पूरक शपथपत्र तथा पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता श्री हरे कृ ष्ण ित्रपाठी द्वारा आज वकालतनामा दािखल िकया गया, िजसे पत्रावली पर रखा जाय।
4. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेिदका िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। प्राथिमकी अित िवलिम्बत है तथा उक्त िवलम्ब का कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। आवेिदका द्वारा ऐसा कोई भी अपराध कािरत नहीं िकया गया है, जैसािक प्राथिमकी में उल्लेिखत िकया गया है। घटना के समय आवेिदका घर पर मौजूद नहीं थी। प्रश्नगत घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। आवेिदका मृतका की सास है तथा मृतका का यह दूसरा िववाह है। आवेिदका द्वारा मृतका को दहेज हेतु शारीिरक अथवा मानिसक रूप से परेशान व प्रतािड़त नहीं िकया गया है। आवेिदका को पूवर् में आरोपपत्र दािखल िकये जाने तक अिग्रम जमानत प्रदान की गयी थी। उनका यह भी कथन है िक आवेिदका के िवरूद्ध अभी तक Versus Counsel for Applicant(s) : Ranjeet Kumar, Syed Mohammad Abbas Abdy Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Smt. Malti Devi .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)
कोई भी बाध्यकारी प्रिक्रया नहीं अपनाई गयी है एवं आवेिदका की ओर से यह भी आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगी और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी।
5.
िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक आवेिदका द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है तथा आवेिदका के िवरुद्ध पयार्प्त साक्ष्य के आधार पर पुिलस द्वारा आवेिदका के िवरुद्ध संबंिधत िवचारण न्यायालय में आरोपपत्र प्रेिषत िकया गया है। इसिलए आवेिदका को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई औिचत्य प्रतीत नहीं होता है। अतः आवेिदका का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाय।
6. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अिग्रम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृ ित और गंभीरता, अिभयुक्त का पूवर्वृत्त, अिभयुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयुक्त के िवरुद्ध उपलब्ध संपूणर् सामग्री का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयुक्त की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए।
7. वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदक की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए चूंिक संबंिधत िवचारण न्यायालय में आवेिदका के िवरुद्ध साक्ष्य पाये जाने के उपरान्त आरोपपत्र प्रेिषत िकया जा चुका है, अतः मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, तद्नुसार आवेिदका का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार िकया जाता है।
8. उपरोक्तानुसार वाद के गुण-दोष पर िटप्पणी िकये बगैर यह अिग्रम जमानत प्राथर्नापत्र िनरस्त िकया जाता है।
9. कायार्लय को िनदेर्िशत िकया जाता है िक इस आदेश की प्रितिलिप संबंिधत िवचारण न्यायालय को अिवलम्ब प्रेिषत करें। September 19, 2025 Pawan Kumar NABAIL No. 7698 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad