Research › Search › Judgment

Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 98542 (ALL)

SMT SAVITA v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

ABAIL/9435/2024 · 2025-09-23

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 9435 of 2024 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेिदका की ओर से मु०अ०सं० 15/2024 अन्तगर्त धारा 420, 467, 468, 471, 388, 406, 506, 34, 120B भारतीय दण्ड संिहता, थाना िनवाड़ी, िजला गािजयाबाद में अिग्रम जमानत की मॉग करते हुए इस प्राथर्ना के साथ दायर िकया गया है िक िगरफ्तारी की िस्थित में आवेिदका को जमानत पर िरहा िकया जा सके । 2. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। इस मामलें में प्रासंिगक तथ्य यह है िक न्यायालय के आदेश िदनांक 24.09.2024 के द्वारा आवेिदका के िगरफ्तारी पर रोक लगाते हुए िववािदत धनरािश रिजस्ट्रार जनरल के समक्ष जमा करने हेतु िनदेर्िशत िकया गया था, िजसका अनुपालन आवेिदका द्वारा कर िदया गया है, िजसकी पिरपुिष्ट न्यायालय के आदेश िदनांक 01.10.2024 के द्वारा भी हो रही है। आगे यह भी कहा गया िक सूचनाकतार् के अिधवक्ता द्वारा अभी तक उक्त धनरािश प्राप्त नहीं की गयी है। आवेिदका का कोई आपरािधक इितहास नहीं है। आवेिदका जमानत पर मुक्त िकये जाने योग्य है। पुनः उनका कथन है िक आवेिदका िवचारण और जॉच के दौरान सहयोग करने का वचन देती है िक वह जॉच एजेंसी या न्यायालय द्वारा अपेिक्षत समय पर उपिस्थत रहेगी एवं आवेिदका की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के Versus Counsel for Applicant(s) : Deepak Rana Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Shyam Surat Shukla Smt Savita .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगी और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है, जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। 4. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता उक्त िववािदत धनरािश सूचनाकतार् की ओर से प्राप्त करने हेतु सहमत है। 5. यहां प्रासंिगक तथ्य है िक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अवधािरत िकया गया है िक अिग्रम जमानत यािचका पर न्याय-िनणर्यन करते समय न्यायालय को आरोपों की प्रकृ ित और गंभीरता, आरोपी की न्याियक प्रिक्रया से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए और यह िक न्यायालय को आरोपी के िवरूद्ध उपलब्ध सभी सामग्री का सावधानी से मूल्यांकन करना चािहए और आरोपी की वास्तिवक भूिमका पर भी िवचार करना चािहए। 6. उभय पक्ष के तकोर् एवं वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेिदका की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए, मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए अिग्रम जमानत की प्राथर्ना स्वीकार िकए जाने योग्य है। 7. तद्नुसार, यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकया जाता है। 8. उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में सिम्मिलत आवेिदका की िगरफ्तारी की दशा में, उसे संबंिधत िवचारण न्यायालय की संतुिष्ट पर रू० 50,000/- का व्यिक्तगत बंध पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर, सत्र परीक्षण के िनस्तारण होने तक िनम्न शतोर् के अधीन अिग्रम जमानत पर मुक्त िकया जाएगा :- i) आवेिदका अिभयोजन पक्ष के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगी। ii) आवेिदका अिभयोजन पक्ष के गवाहों को धमकाएगा या परेशान नहीं करेगी। iii) आवेिदका िवचारण न्यायालय द्वारा िनधार्िरत प्रत्येक ितिथ पर उपिस्थत होगी। iv) आवेिदका उस अपराध के समान कोई अपराध नहीं करेगी, िजसका आरोप आवेदक पर लगाया गया है या िजसके िकए जाने का संदेह है। v) आवेिदका मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई प्रलोभन, धमकी या वादा नहीं करेगी, िजससे वह व्यिक्त न्यायालय या िकसी पुिलस ABAIL No. 9435 of 2024 2 अिधकारी को तथ्य बताने से िवमुख हो जाए या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करें। 9. उपयुर्क्त िकसी भी शतर् के उल्लंघन की िस्थित में, िवचारण न्यायालय कानून के अनुसार आवेिदका की जमानत रद्द करने के िलए स्वतंत्र होगा। 10. महािनबंधक, उच्च न्यायालय, इलाहाबाद को िनदेर्िशत िकया जाता है िक न्यायालय के आदेश िदनांक 24.09.2024 के अनुपालन में आवेदक की ओर से जमा की गयी धनरािश अंकन 56,000/- रूपये, िविधक कायर्वाही करते हुए सूचनाकतार् के पक्ष में तत्काल अवमुक्त करना सुिनिश्चत करें। September 24, 2025 CP.sahani ABAIL No. 9435 of 2024 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad