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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 98532 (ALL)

GAMA AND ANOTHER v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

NA528/36207/2025 · 2025-09-18

Saurabh Srivastava

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 36207 of 2025 न्यायालय सं०-77 माननीय सौरभ श्रीवास्तव, न्यायमूित 1- प्राथीर्गण की ओर से यह प्राथर्ना पत्र अन्तगर्त धारा 528 बी.एन.एस.एस., सत्र वाद संख्या 328 वषर् 2021, मु०अ०सं० 253 वषर् 2020 अन्तगर्त धारा 3(1) उ०प्र० िगरोहबन्द एवं समाज िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, 1986, थाना िडडोली, िजला अमरोहा में प्रेिषत आरोप पत्र िदनाँक 05.12.2020 एवं प्रसंज्ञान आदेश िदनाँिकत 18.08.2021 के साथ उपरोक्त वाद जो िवद्वान अपर िजला एवं सत्र न्यायाधीश/एफ.टी.सी.- िद्वतीय, अमरोहा के समक्ष लिम्बत है, की सम्पूणर् कायर्वाही को िनरस्त करने हेतु योिजत िकया गया है। 2- प्राथीर्गण की ओर से िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की ओर से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को िवस्तारपूवर्क सुना एवं पत्रावली का अवलोकन िकया। 3- प्राथीर्गण के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा तकर् प्रस्तुत िकया गया िक प्राथीर्गण के िवरूद्ध िगरोहबन्द अिधिनयम के अन्तगर्त कायर्वाही, मु०अ०सं० 78/2020 एवं मु०अ०सं० 135/2020 के दो मामलों के आधार पर शुरू की गई है। उक्त दोनों मामलों में प्राथीर्गण को सम्बिन्धत िवद्वान न्यायालय द्वारा िदनांक 08.04.2025 को दोषमुक्त िकया जा चुका है। प्राथीर्गण के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा यह भी तकर् प्रस्तुत िकया गया िक एक बार मूल मामले में आवेदक को दोषमुक्त कर िदये जाने के बाद, िगरोहबन्द अिधिनयम के अन्तगर्त अिग्रम कायर्वाही नहीं की जा सकती। आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा अपने कथन के समथर्न में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पािरत आदेश फरहाना बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य (2024) 0 आई.एन.एस.सी. 118 में दी गयी िविध व्यवस्था प्रस्ततु की है एवं कथन िकया िक जब मूलवाद का मामला पहले ही प्राथीर् के पक्ष में िनरस्त कर िदया गया या प्राथीर् को पहले ही उसमें दोषमुक्त कर िदया गया है, तो िगरोहबन्द अिधिनयम के तहत आरोिपत कायर्वाही नहीं चल सकती है एवं पूरी प्रिक्रया अिस्थर है और इसे िनरस्त िकया जाना चािहए। 4- इसके िवपरीत िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा प्राथीर्गण के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं का प्रबल िवरोध िकया गया, लेिकन साथ ही उन्होंने सम्बिन्धत िवद्वान न्यायालय द्वारा पािरत आदेश िदनांक 08.04.2025 के आदेश का िवरोध नहीं िकया गया। Versus Counsel for Applicant(s) : Ajay Kumar Mishra Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Gama And Another .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) 5- पक्षों के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा प्रस्तुत िकये गये तकोर्ं से यह स्पष्ट है िक िगरोहबन्द चाटर् में दशार्ए गए मूलवाद को पहले ही िनरस्त कर िदया गया और एक बार िगरोहबन्द चाटर् में दशार्ए गये मूल मामलों की कायर्वाही रद्द कर दी गयी या अिभयुक्त को दोषमुक्त कर िदया गया है, तो उत्तर प्रदेश िगरोहबन्द एवं एवं समाज िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम के तहत कायर्वाही िनरस्त करने योग्य है। (सन्दभर्ः माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा फरहाना (उपरोक्त), इस न्यायालय द्वारा आपरािधक पुनरीक्षण संख्या 2541/2011 में सलीम उफर् िपयाऊ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, आपरािधक पुनरीक्षण संख्या 3309/2008 में जय प्रकाश एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं इस न्यायालय द्वारा आवेदन पत्र अन्तगर्त धारा 482 दं०प्र०सं० संख्या 11645/2007 में सरताज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य)। 6. उपरोक्त तथ्यों के दृिष्टगत, चूंिक प्राथीर्गण को पहले ही आधार मामलों में दोषमुक्त िकया जा चुका है, प्राथर्ना पत्र अन्तगर्त धारा 528 बी.एन.एस.एस., सत्र वाद संख्या 328 वषर् 2021, मु०अ०सं० 253 वषर् 2020 अन्तगर्त धारा 3(1) उ०प्र० िगरोहबन्द एवं समाज िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, 1986, थाना िडडोली, िजला अमरोहा में प्रेिषत आरोप पत्र िदनाँक 05.12.2020 एवं प्रसंज्ञान आदेश िदनाँिकत 18.08.2021, जो िवद्वान अपर िजला एवं सत्र न्यायाधीश/एफ.टी.सी.- िद्वतीय, अमरोहा के समक्ष लिम्बत है, के वल प्राथीर्गण की अनुसरण में इसके द्वारा सम्पूणर् कायर्वाही को िनरस्त िकया जाता है। 7. तदनुसार वतर्मान प्राथर्ना पत्र स्वीकार िकया जाता है। 8. यहाँ यह स्पष्ट िकया जाता है िक यह आदेश सम्बिन्धत प्रािधकािरयों को प्राथीर्गण के िवरूद्घ िकसी अन्य मामलें में नवीन कायर्वाही शुरू करने हेतु बाध्यकारी नहीं होगा। िसतम्बर 19, 2025 राहुल NA528 No. 36207 of 2025 2 (सौरभ श्रीवास्तव,न्यायमूित) Digitally signed by :- RAHUL KUMAR High Court of Judicature at Allahabad