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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 32763 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 270/2025, अंतगर्त धारा 109(1), 333, 115(2), 351(3) बी.एन.एस., थाना बुढ़़़ाना, िजला मुजफ्फरनगर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3.(क) आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। प्राथिमकी िवलिम्बत है तथा उक्त िवलम्ब का कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। सूचनाकतार् ने आवेदक और अन्य अिभयुक्तगण के िवरुद्ध प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् कराई थी, लेिकन घटना का समय प्रथम सूचना िरपोटर् में नहीं बताया गया है। सूचनाकतार् ने प्रथम सूचना िरपोटर् में आवेदक और अन्य सह-अिभयुक्तों के िवरुद्ध सामान्य भूिमका िनिदष्ट की गई है एवं िकसी भी अिभयुक्त की िविशष्ट भूिमका नहीं दिशत की गयी है। सूचनाकतार् ने प्राथिमकी और धारा 180 बी.एन.एस .एस.
के अंतगर्त अपने बयान में आवेदक और सह-अिभयुक्तों के िवरुद्ध कोई िविशष्ट हिथयार िनिदष्ट नहीं िकया गया है। िदनांक 21.06.2025 को घायल अशोक की िचिकत्सकीय जांच की गई और डॉक्टर ने दो चोटें नोट कीं। डॉक्टर द्वारा पूरक िरपोटर् और एक्स-रे िरपोटर् तैयार की गई। उक्त चोटें िकस अिभयुक्त के द्वारा कािरत की गयी, यह स्पष्ट नहीं है। यह िवचारणीय तथ्य है िक चार लोगों द्वारा िमलकर चुटैल के साथ मारपीट की गयी, िकन्तु चुटैल को मात्र दो चोटें आयी हैं। उक्त से भी अिभयोजन कथानक संिदग्ध प्रतीत हो रहा है। (ख) प्रासंिगक तथ्य यह है िक सूचनाकतार् ने प्राथिमकी में चार अिभयुक्तगण को प्रश्नगत किथत घटना कािरत करने में नािमत िकया है, िकन्तु चुटैल ने अपने बयान में कथन िकया है िक तीन उक्त घटना तीन लोगों के द्वारा कािरत की गयी है। उक्त प्राथिमकी एवं चुटैल के बयान में परस्पर िवरोधाभास है, िजससे अिभयोजन कथानक संदेहास्पद पिरलिक्षत हो रहा है। चुटैल एवं साक्षीगण ने भी अपने बयान में िकसी भी अिभयुक्त के िवरुद्ध िविशष्ट कथन नहीं िकया है, वरन् सभी की सामान्य भूिमका दिशत की गयी है। आवेदक के पास से प्रश्नगत किथत घटना से िकसी भी हिथयार की बरामदगी नहीं पायी है। िचिकत्सीय आख्या से भी अिभयोजन कथानक का समथर्न नहीं हो रहा है। आवेदक द्वारा वतर्मान घटना को कािरत करने का कोई हेतुक नहीं Versus Counsel for Applicant(s) : Pavan Kumar Mishra Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Dhruv .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
है। आवेदक को कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 24.06.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 23, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 32763 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad