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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 32223 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 182/2025, अंतगर्त धारा 308(2), 308(6), 308(7), 115(2), 352, 351(3) बी.एन.एस. एवं धारा 61(2), 217, 229, 248-बी. बी.एन.एस., थाना िकदवई नगर, िजला कानपुर नगर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा सूचनाकतार् से िकसी प्रकार की िफरौती अथवा रंगदारी की माँग नहीं की गयी है, न ही िकसी प्रकार की धनरािश प्राप्त की है। प्राथिमकी लगभग तीन वषर् बाद अित-िवलम्ब से दजर् करायी गयी है तथा उक्त िवलम्ब का कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। िववेचना के पश्चात साक्षी के बयान के आधार पर सह-अिभयुक्त अिखलेश दुबे को िविशष्ट भूिमका दिशत की गयी एवं उसी के साथ आवेदक को िमथ्या रूप से वतर्मान घटना में अिभयुक्त बना िदया गया तथा आवेदक की कोई िविशष्ट भूिमका विणत नहीं की है, वरन् सामान्य भूिमका दशार्यी गयी है। प्रासंिगक तथ्य यह है िक सूचनाकतार् के िवरुद्ध सह-अिभयुक्त अिखलेश के द्वारा प्राथिमकी पंजीकृ त अंतगर्त धारा 452, 376-डी. 506 भा.दं.सं.
506 भा.दं.सं. एवं धारा 4जी./6 पॉक्सो एक्ट में दजर् करायी गयी थी, िजसमें दबाव बनाने के िलए सूचनाकतार् द्वारा आवेदक को वतर्मान घटना में नािमत अिभयुक्त बना िदया गया है। पत्रावली पर ऐसा कोई भी साक्ष्य संलग्न नहीं है, िजससे यह स्पष्ट हो सके िक आवेदक की उपिस्थित में सह-अिभयुक्त अिखलेश दुबे द्वारा 2.5 करोड़ की धनरािश की माँग की गयी है। आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की Versus Counsel for Applicant(s) : Gaurav Kumar Sharma, Nand Kishor Mishra, Pawan Kumar Tripathi Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Lavi Mishra @ Ayush Mishra .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 18.08.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv.
आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 26, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 32223 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad