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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 97685 (ALL)

AWADESH KUMAR AGRAHARI v. STATE OF U.P.

BAIL/32137/2025 · 2025-09-24

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 32137 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 129/2025, अंतगर्त धारा 317(2), 317(4) बी.एन.एस., थाना दुबौिलया, िजला बस्ती में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा ऐसा कोई भी कृ त्य कािरत नहीं िकया गया है, जैसािक प्राथिमकी में दिशत िकया गया है। प्रथम सूचना िरपोटर् िवलिम्बत है तथा उक्त िवलम्ब का कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। आवेदक प्रथम सूचना िरपोटर् में नािमत नहीं है, पुिलस चेिकग के दौरान पकड़े गये तीन व्यिक्तयों अिनल िनषाद, राहुल िनषाद एवं वीरू िनषाद ने कथन िकया िक उक्त चोरी िकये गये सामान को आवेदक के हाथों बेचा गया। उक्त बयान के आधार पर आवेदक का नाम प्रकाश में आया है। आवेदक के पास से वतर्मान घटना से संबंिधत िकसी भी संिदग्ध वस्तु की बरामदगी दिशत नहीं की गयी, आवेदक के पास से 359.60 ग्राम सफे द धातु, 1.16 ग्राम की चार पीली धातु एवं 12.46 ग्राम की एक और पीली धातु की बरामदगी दिशत की गयी है, वह पूणर्तः बनावटी एवं फजीर् है तथा उक्त बरामदगी का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। उक्त बरामदगी की कोई िशनाख्त परेड नहीं करायी गयी है। आवेदक एक आभूषण की दुकान संचािलत करने हेतु पंजीकृ त है तथा आवेदक द्वारा िकसी प्रकार के चोरी िकये गये सामान की खरीद-फरोख्त नहीं की गयी है। आवेदक घटनास्थल पर मौके से िगरफ्तार नहीं िकया गया है। अिभलेख पर आवेदक के िवरुद्ध कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, िजससे आवेदक के िवरुद्ध आक्षेिपत अपराध बनता प्रतीत हो रहा हो। उक्त घटना के पूवर् तक आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं था, िकन्तु प्रश्नगत चोरी के बाद आवेदक की िगरफ्तारी की गयी एवं िमथ्या बरामदगी के आधार पर आवेदक को अन्य वाद में िगरफ्तार करके जेल भेज िदया गया एवं उसी तद्क्रम में उसी िदन सात अन्य मुकदमों में नािमत कर िदया गया। उक्त चोरी के मुकदमें में आवेदक को जमानत प्राप्त हो चुकी है। आवेदक द्वारा अपने अन्य आपरािधक इितहासों को शपथपत्र के प्रस्तर सं० 17 में स्पष्ट िकया गया है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी Versus Counsel for Applicant(s) : Vinay Kumar Agrahari Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Awadesh Kumar Agrahari .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 08.07.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय। 5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 25, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 32137 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad