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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 96819 (ALL)

RAJA SINGH v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

BAIL/32228/2025 · 2025-09-25

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 32228 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 0189/2025, अंतगर्त धारा 465, 506, 384, 447, 352, 420, 467, 468, 471, 120-बी. भा.दं.सं., थाना नौबस्ता, िजला कानपुर नगर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक प्राथिमकी में नािमत अिभयुक्त नहीं है, दौरान िववेचना आवेदक का नाम प्रकाश में आया है। आवेदक द्वारा िकसी प्रकार के दस्तावेज की कू टरचना कािरत नहीं की गयी है, न ही कोई धोखाधड़ी/फजीर्वाड़ा कािरत िकया गया है। अन्य नािमत अिभयुक्तों को िविशष्ट भूिमकाएं सौंपी गयी हैं, िकन्तु आवेदक की कोई िविशष्ट भूिमका विणत नहीं की गयी है। उक्त के अितिरक्त यह भी कथन िकया गया है िक राजा िसह, िजसका नाम एफआईआर में "राजा िसह के गड्ढ़़़े के िनकट" के रूप में िदया गया है, वह राजा िसह एक अलग व्यिक्त है और आवेदक वतर्मान मामले से कहीं भी संबंिधत नहीं है। इस मामले के ठीक 5 िदन बाद यानी िदनांक 21.05.2025 को कािसम राजा नामक व्यिक्त द्वारा उसी थाने में एक और एफआईआर दजर् कराई गई थी, िजसका मुकदमा अपराध संख्या 0205/2025, थाना नौबस्ता, िजला कानपुर नगर था। उस मामले में भी लगभग उन्हीं आरोिपयों को अिभयुक्त बनाया गया है और उस मामले में भी वही िववाद शािमल है। इस प्रकार यह स्पष्ट है िक आवेदक को इस मामले में झूठा िमथ्या रूप से अिभयुक्त बनाया गया है। आवेदक ने पहले ही सीपीसी की धारा 9 के तहत िसिवल जज (जे.डी.) की अदालत में मुकदमा संख्या 388/2019 के तहत सूचनाकतार् के साथ-साथ तीन अन्य सह-अिभयुक्तों (राजा Versus Counsel for Applicant(s) : Akshay Raghuvanshi, B.K.Singh Raghuvanshi Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Raja Singh .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) िसह बनाम कािसम राजा और अन्य) के िखलाफ मुकदमा दायर िकया है। बाद में मामला दीवानी न्यायालय, (एस.डी.) कानपुर नगर में स्थानांतिरत कर िदया गया। िसिवल जज (एस.डी .) कानपुर नगर के न्यायालय ने िदनांक 04.03.2020 के आदेश द्वारा आवेदक के पक्ष में प्रश्नगत भूखण्डों के संबंध में अंतिरम िनषेधाज्ञा प्रदान की है। िसिवल जज (एस.डी.) कानपुर नगर द्वारा वाद संख्या 388/2019 (राजा िसह बनाम कािसम राजा एवं अन्य) में आवेदक के पक्ष में पािरत अंतिरम िनषेधाज्ञा अभी भी प्रभावी है। वतर्मान िववाद पूणर्तः दीवानी प्रकृ ित का है और अिभलेखों से ही स्पष्ट है िक इस मामले में शािमल आराजी संख्या 1115, अथार्त् इसी िववाद के संबंध में पहले से ही एक मुकदमा लंिबत है। आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा माननीय सवोर्च्च न्यायालय द्वारा िनणीर्त एस.एन. िवजय लक्ष्मी बनाम कनार्टक राज्य की तरफ न्यायालय का ध्यान आकृ ष्ट कराया, िजसके मामले में पहले ही माना गया है िक, "दीवानी िववाद में आपरािधक कायर्वाही शुरू नहीं की जा सकती।" यहाँ प्रासंिगक तथ्य यह भी है िक यिद िकसी व्यिक्त द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा िकया गया है, तो सक्षम प्रािधकारी द्वारा प्राथिमकी दजर् करायी जानी चािहए, न िक िकसी सामान्य व्यिक्त द्वारा, जबिक आवेदक के िवरुद्ध प्राथिमकी सक्षम प्रािधकारी द्वारा नहीं दजर् करायी गयी है, वरन् िजसके द्वारा प्राथिमकी पंजीकृ त करायी गयी है, वह सामान्य व्यिक्त है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 26.06.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय। 5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। BAIL No. 32228 of 2025 2 iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 26, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 32228 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad