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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 96758 (ALL)

MANOJ AND ANOTHER v. STATE OF U.P.

BAIL/32869/2025 · 2025-09-23

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 32869 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 2. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदकगण मनोज एवं उमेश की ओर से मु०अ०सं० 11/2018, अंतगर्त धारा 420, 468, 471, 120-बी. भा.दं.सं., थाना देहलीगेट, िजला मेरठ में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 3.(क) आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदकगण को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उन्होंने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदकगण द्वारा िकसी प्रकार की धोखाधड़ी कािरत नहीं की गयी है। घटना वषर् 2006-07 की है एवं प्राथिमकी काफी िवलम्ब से वषर् 2018 में पंजीकृ त करायी गयी है एवं उक्त िवलम्ब का कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। प्रासंिगक तथ्य यह है िक वषर् 2006 में भारत सरकार द्वारा कन्या िवद्या धन योजना के अंतगर्त सरकारी कमर्चािरयों राजस्व िनरीक्षक, तहसीलदार और िशक्षा अिधकारी की देखरेख में एक योजना शुरू की गई थी। उस समय आवेदक संख्या 1 ने अपनी (भांजी) के अिभभावक के रूप में और आवेदक संख्या 2 ने अपनी (बेटी) के अिभभावक के रूप में इस आशय से हस्ताक्षर िकए थे िक यिद कोई जानकारी गलत पाई जाती है तो अिभभावक का आवेदन अस्वीकार कर िदया जाए और ऐसा ही हुआ। आवेदन अस्वीकार कर िदया गया और कन्या िवद्या धन योजना के अंतगर्त कोई धनरािश जारी नहीं की गई। आवेदकगण का किथत आरोपों से कोई वास्ता-सरोकार नहीं है, न ही वतर्मान मामले में उनकी कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संिलप्तता है और न ही वे उक्त िवसंगित के लाभाथीर् हैं। उक्त जाँच वषर् 2009 से लंिबत है और आवेदकगण को कोई सूचना या सुनवाई का अवसर प्रदान नहीं िकया गया तथा लगभग एक दशक के बाद प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् की गई। िदनांक 08.06.2009 का जाँच आदेश के वल 6 व्यिक्तयों के संबंध में था, परन्तु िबना िकसी सूचना या नोिटस िदए, उसे 84 व्यिक्तयों के िवरुद्ध बढ़़़़ा िदया गया। आवेदकगण को दस्तावेजों के Versus Counsel for Applicant(s) : Deisy Pundir, Rahul Singh Tomar Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Manoj And Another .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) सत्यापन में शािमल नहीं िकया गया और संबंिधत अिधकािरयों द्वारा दस्तावेजों के सत्यापन के बाद, कन्या िवद्या धन योजना के लाभ के िलए पात्र उम्मीदवारों की सूची प्रकािशत की गई, िजसमें आवेदकगण द्वारा िदये गये आवेदन को िनरस्त कर िदया गया। राजस्व कमर्चािरयों, तहसीलदार और िजला मिजस्ट्रेट के अिधकािरयों द्वारा दस्तावेजों के सत्यापन की प्रिक्रया पूरी की गई, परन्तु उनके िवरुद्ध कोई कारर्वाई नहीं की गई और आवेदकगण को वतर्मान मामले में अिभयुक्त बना िदया गया। आवेदकगण के िवरुद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है और न ही आवेदकगण द्वारा की गई जालसाजी के संबंध में कोई साक्ष्य है। सूचनाकतार् ने वतर्मान घटना कािरत करने में आवेदकगण की कोई िविशष्ट भूिमका विणत नहीं की है। (ख) अिग्रम आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा कथन िकया गया िक अिभयोजन पक्ष ने आवेदकगण के िवरुद्ध पिरिस्थितजन्य साक्ष्य तैयार करने का प्रयास िकया, परंतु श्रृंखला पूरी नहीं हुई है और मन:िस्थित, आशय और उद्देश्य तथा मौिखक साक्ष्य या दस्तावेजी साक्ष्य के अभाव में कोई भी व्यिक्त िकसी भी अपराध में संिलप्त नहीं हो सकता। वतर्मान घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है एवं आवेदकगण वतर्मान वाद में िकसी प्रकार से लाभाथीर् नहीं हैं। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदकगण की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार हैं और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएंगे और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार हैं जो न्यायालय उन पर अिधरोिपत करेंगी। आवेदकगण िनदोर्ष हैं तथा वह इस प्रकरण में िद० 03.09.2025 से कारागार में िनरुद्ध हैं। इसिलए आवेदकगण को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदकगण के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदकगण द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदकगण को जमानत पर न छोड़ा जाय। 5. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदकगण को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदकगण को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो-दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदकगण िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे। ii. आवेदकगण अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेंगे/धमकायेंगे नहीं। iii. आवेदकगण न्यायालय के आदेशों का पालन करेंगे, वे परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होंगे तथा परीक्षण में ईमानदारी BAIL No. 32869 of 2025 2 से सहयोग करेंगे। iv. आवेदकगण जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेंगे और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होंगे न कोई अपरािधक कृ त्य करेंगे। v. आवेदकगण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देंगे न ही उनसे कोई वायदा करेंगे, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदकगण की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 24, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 32869 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad