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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 7729 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेिदका रेखा की ओर से मु०अ०स० 112/2024, अन्तगर्त धारा 108 बी.एन.एस, थाना पैकोिलया, िजला बस्ती में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता जाह्नवी ित्रपाठी एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेिदका िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। उनका यह भी कथन है िक आवेिदका का कोई आपरािधक इितहास नहीं रहा है और आवेिदका के िवरूद्ध अभी तक कोई भी बाध्यकारी प्रिक्रया नहीं अपनाई गयी है। इस प्रकरण में सह अिभयुक्त दयानन्द यादव उफर् लल्लू यादव की अिग्रम जमानत, अिग्रम जमानत आवेदन पत्र सं. 5458 सन 2025 में इस न्यायालय की अन्य न्यायपीठ के आदेश िद. 15.09.2025 द्वारा स्वीकार की जा चुकी है। आवेदक का के स भी उक्त सहअिभयुक्त के समान है, इसिलए आवेदक भी सह अिभयुक्त से समानता के आधार पर जमानत पाने का अिधकारी है। पुनः उनका कथन है िक आवेिदका िवचारण और जॉच के दौरान सहयोग करने का वचन देती है िक वह जॉच एजेंसी या न्यायालय द्वारा अपेिक्षत समय पर उपिस्थत रहेगी एवं आवेिदका की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगी और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी।
4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा अिभयुक्त के अिग्रम जमानत के िवरोध में यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक आवेिदका द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है। मामले के तथ्य एवं पिरिस्थितयों को दृिष्टगत रखते हुये अिभयुक्ता को अिग्रम जमानत पर िरहा िकये जाने का पयार्प्त अधार नहीं है। अतः अिभयुक्ता को अिग्रम जमानत पर न छोड़ा जाये। Versus Counsel for Applicant(s) : Jahnavi Tripathi, Upasna Agrawal, Varun Srivastava Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Rekha .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s)
5.
यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अवधािरत िकया गया है िक अिग्रम जमानत यािचका पर न्याय-िनणर्यन करते समय न्यायालय को आरोपों की प्रकृ ित और गंभीरता, आरोपी की न्याियक प्रिक्रया से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए और यह िक न्यायालय को आरोपी के िवरूद्ध उपलब्ध सभी सामग्री का सावधानी से मूल्यांकन करना चािहए और आरोपी की वास्तिवक भूिमका पर भी िवचार करना चािहए।
6. उभय पक्ष के तकोर्ं एवं वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेिदका की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए, मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए अिग्रम जमानत की प्राथर्ना स्वीकार िकए जाने योग्य है। तद्नुसार अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकया जाता है।
7. उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में सिम्मिलत आवेदक की िगरफ्तारी की दशा में, उसे संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर रू० 50,000/- का व्यिक्तगत बंध पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर, सत्र परीक्षण के िनस्तारण तक िनम्न शतोर् के अधीन अिग्रम जमानत पर िरहा िकया जाएगा :- 1- आवेिदका, यिद आवश्यक होगा तो िवचारण न्यायालय के समक्ष अपेिक्षत समय पर उपिस्थत रहेगी। 2- आवेिदका मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई धमकी, वादा या प्रलोभन नहीं देगी िजससे िक वह ऐसे तथ्य को न्यायालय के समक्ष या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष प्रकट न करने पर मान जाए। 3- आवेिदका िवचारण के दौरान सहयोग करेगी और जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नहीं करेगी। उपरोक्त शतोर् के उल्लंघन की िस्थित में िववेचनािधकारी/अिभयोजन पक्ष को, आवेिदका को प्रदत्त अिग्रम जमानत के िनरस्तीकरण हेतु उपयुक्त आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता होगी।
8. तद्नुसार यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र उपरोक्त िटप्पिणयों के साथ अंितम रूप से िनस्तािरत िकया जाता है। September 22, 2025 S.Mishra NABAIL No. 7729 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad