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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 31802 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुनरीिक्षत वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक वीरेन्द्र कु मार की ओर से मु०अ०स० 214/2025, अन्तगर्त धारा 318(4)/ 338/ 336(3)/ 340(2)/ 61(2)(ka) भा.न्या.सं., थाना रजपुरा, िजला संभल में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। तथाकिथत घटना का कोई भी समय, िदनांक, महीना व सन् अंिकत नहीं है और न ही घटना को वादी द्वारा अंदाजे से भी िक घटना िकतने िदन पुरानी है, का उल्लेख िकया है। आवेदक का कोई संगिठत िगरोह नहीं है और न ही आवेदक ने कोई धोखाधड़ी करके वादी मुकदमा धमेर्न्द्र के फजीर् हस्ताक्षर करके कोई पसर्नल लोन नहीं िलया और न ही उसका पैसा हड़पा है और न ही कोई धमेर्न्द्र के नाम की पॉिलसी करायी है और न ही कू टरिचत दस्तावेजों के आधार पर वादी मुकदमा धमेर्न्द्र जीिवत को मृत िदखकर कोई क्लेम की धनरािश हड़पी है। धमेर्न्द्र जीिवत होते हुए फजीर् मृत्यु प्रमाणपत्र जारी िकया है और न ही बीमा की धनरािश हड़पी है और न ही फजीर् हस्ताक्षर िकये हैं और न ही िकसी दस्तावेज या अिभलेख की कू टरचना कर छल के प्रयोजन से उपयोग में लायी गयी है और न ही िकसी कू टरिचत दस्तावेज या इलैक्ट्रोिनक्स अिभलेख को असली के रूप में उपयोग में लाये गये हैं। आवेदक एक सम्भ्रान्त सीधा-साधा सज्जन व्यिक्त है, आवेदक के कब्जे से िकसी भी दस्तावेज आिद की बरामदगी नहीं हुई है। तथकिथत घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है, जो भी साक्षी हैं, वह िहतबद्ध हैं। तथाकिथत घटना सहअिभयुक्त पंकज कु मार ढ़़़ाली की िविशष्ट भूिमका है। के स डायरी में सहअिभयुक्त पंकज कु मार ढ़़़ा़ली को Versus Counsel for Applicant(s) : Sunil Kumar Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Virendra Kumar .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) ऐंजल मैंगा मोल में बने ऑिफस से िगरफ् तार िकया जाना दशार्या गया है, िजसमें उसके कब्जे से दो अदद मोबाइल, एक लैपटॉप, 09 चैकबुक ऐिक्सस बैंक व एक चैक बुक फीडअरल बैंक व 8 चैक बुक आईडीएफसी फस्ट बैंक व 16 चैक बुक यस बैंक व 02 चैक बुक सीएसबी बैंक व 27 आधार काडर् व 22 पैन काडर् बरामद होने दशार्या गये हैं तथा अिभयुक्त पंकज कु मार द्वारा िववेचक को िदये गये बयान में यह स्वीकार िकया गया है िक उसने सहअिभयुक्त शाहरूख व सहअिभयुक्ता कल्पना के साथ िमलकर वादी मुकदमा धमेर्न्द्र की िविभन्न इंश्योरेन्स कम्पनी में बीमा पॉिलसी करायीं तथा पॉिलसी का रूपया हड़पने के िलए शाहरूख व कल्पना द्वारा धमेर्न्द्र का मृत्यु प्रमाण-पत्र व इलाज के जीबी पंत अस्पताल से कागजात तैयार
कराये। वादी मुकदमा के मृत्यु प्रमाण-पत्र को भी के स डायरी का भाग बनाया गया है। इसप्रकार आवेदक के िवरूद्ध कोई भी साक्ष्य पत्रावली में नहीं है न ही आवेदक से िकसी प्रकार की कोई बरामदगी है। सहअिभयुक्त पंकज कु मार ढ़़़़ाली के संस्वीकृ ित बयान के अलावा आवेदक के िखलाफ कोई साक्ष्य़ पत्रावली पर मौजूद नहीं है सहअिभयुक्त के संस्वीकृ ित बयान में भी आवेदक की भूिमका मात्र सहयोग करने की है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 01.09.2025 से कारागार में िनरुद्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर् का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंम्भीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये।
5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की सन्तुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
1.
आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
2. BAIL No. 31802 of 2025 2
आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगी, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा।
4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
5. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 24, 2025 S.Mishra BAIL No. 31802 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad